फेफड़ा क्या है और फेफड़े का कार्य

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श्वास लेने और श्वास फेंकने की क्रिया को रेस्पिरेशन (Respiration) कहा जाता है। वायु को अन्दर लेने की क्रिया को (Inspiration) और वायु बाहर फेंकने की क्रिया को एक्सपीरेशन कहते हैं। शरीर में निरन्तर होने वाली प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष गति से कार्बन-डाई ऑक्साइड उत्पन्न होती है और शरीर में शक्ति उत्पादन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। अत: ऑक्सीजन शरीर को प्रदान करने तथा कार्बन डाई ऑक्साइड को बाहर निकालने के लिए यह संस्थान (श्वसन संस्थान) कार्य करता है।

हृदय की दूषित रक्त ( जो शरीर से आया होता है ) फेफड़े की धमनियों द्वारा फेफड़े में पहुँचता है वहां उस रक्त में ऑक्सीजन मिल जाती है जो रक्त पुन: हृदय के बाँये भाग में पहुँचता है और वहाँ से सारे शरीर में पहुँचता है और इस प्रकार शरीर में ऑक्सीजन रक्त के साथ ही पहुँचता है तथा शरीर के (तन्तुओं) में जाकर प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट को जलाकर शक्ति उत्पन्न करता है तथा उन तन्तुओं (Tissues) से कार्बन डाईऑक्साइड को लेकर दूषित हुए पुन: उसी विधान से फुफ्फुसों में पहुँचता है। यह क्रम जीवन पर्यन्त चलता ही रहता है।

(1) एक्सटर्नल रेस्पिरेशन (External Respiration) – जब फुफ्फुसगत रक्त वाहिनियों के रक्त में उपस्थित कार्बन-डाई-ऑक्साइड तथा फेफड़ों की एलवी औलाई में वायु का विनिमय होता है तो इसमें ऑक्सीजन रक्त में मिल जाती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड फुफ्फुसों में रह जाती है जो ‘एक्सपीरेशन’ से बाहर निकलती है। इस क्रिया का सम्पादन फुफ्फुस में होता है।

(2) इन्टरनल रेस्पिरेशन (Internal Respiration) – इसमें शरीर के कोषाओं में होने वाले वायु के विनिमय (आदान-प्रदान) को समझा जाता है। इसको Tissue Respirationकहते हैं। इस क्रिया के द्वारा टिश्यू रक्त से ऑक्सीजन लेते हैं और रक्त में कार्बन-डाई-ऑक्साइड छोड़ देते हैं।

इस प्रकार इन्टरनल रेस्पिरेशन का रक्त वाहक संस्थान के द्वारा सम्पादन होता रहता है।

फेफड़े के कार्य

साँस लेने को हिन्दी में ‘श्वास’ और साँस छोड़ने को ‘प्रश्वास’ कहा जाता है। इन फुफ्फुसों के द्वारा यह श्वास-प्रश्वास क्रिया सम्पन्न होती है। साधारणतया एक स्वस्थ मनुष्य 1 मिनट में 16 से 20 बार तक सांस लेता है। हमारे रक्त में ऑक्सीजन (Oxygen) वायु इस श्वास-प्रश्वास की क्रिया द्वारा मिलती रहती है।

शिराओं द्वारा दूषित रक्त शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से से हृदय में आता है। हृदय से यह अशुद्ध रक्त शुद्ध होने के लिए दाहिने और बाँये फुफ्फुस में फुफ्फुसीया धमनी (Pulmonary Artery) के द्वारा (नोट-फुफ्फुसीया शिराओं द्वारा नहीं) दोनों फुफ्फुसों में प्रवेश करता है। हमारे फुफ्फुस चूँकि रक्त-शोधक यन्त्र है, इसलिए यहाँ पर अशुद्ध रक्त की शुद्धि होती है । फुफ्फुसों में से अशुद्ध रक्त कार्बन-डाई-ऑक्साइड वायु छोड़कर ऑक्सीजन वायु ग्रहण कर लेता है जिससे वह शुद्ध हो जाता है। प्रश्वास द्वारा रक्त कार्बनडाई-ऑक्साइड छोड़ देता है। इस प्रकार फुफ्फुसों का मुख्य कार्य सारे शरीर के रक्त को शुद्ध करना है।

श्वास गति (Breathing Rate)

आयु संख्या (प्रति मिनट)
02 मास से 02 साल तक 35 प्रति मिनट
02 साल से 06 साल तक 23 प्रति मिनट
06 साल से 12 साल तक 20 प्रति मिनट
12 साल से 15 साल तक 18 प्रति मिनट
15 साल से 21 साल तक 16 – 18 प्रति मिनट

 

 

 

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