Bone Development And Growth In Hindi [ अस्थि विकास एवं वृद्धि ]

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भ्रूण के प्रारम्भिक विकास के समय उसका कंकाल केवल उपास्थियों एवं तन्तु-ऊतकों से ही निर्मित होता है जिसके अन्तर्गत वास्तविक अस्थि शनै:-शनै: विकसित होती रहती है। इसको अस्थि भवन (Ossification Or Osteogenesis) क्रिया के नाम से जाना जाता है। यह क्रिया पूर्णतय: अस्थि कारकों (Osteoblasts) द्वारा संचालित होती है । (1) तन्तु ऊतकों (Fibrous Tissues) में विकसित होने वाली क्लास्थि (Manbrain Bone) तथा उपास्थि ऊतकों (Cartilages Tissues) द्वारा विकसित होने वाले अस्थि भवन को उपास्थि-भवन के नाम से जाना जाता है।

प्रथम प्रकार की अस्थि भवन क्रिया द्वारा विकसित होने वाली अस्थियों की श्रेणी में करोटि तथा चेहरे की अस्थियाँ आती हैं । शेष कंकाल की लगभग सभी अस्थियों का विकास दूसरे प्रकार की क्रिया द्वारा ही सम्पन्न होता है।

अंतरकला अस्थि भवन (Intramembranous Ossification) – इस क्रिया की अस्थि विकास क्रिया एक निश्चित केन्द्रक अस्थि कोशिका से प्रारम्भ होती है तथा शनै:-शनै: इस केन्द्रक अस्थि कोशिका को अन्य अस्थि कोशिकायें घेरे रहती हैं। इस स्थान से अस्थि भवन क्रिया प्रारम्भ होकर एक अस्थि का रूप लेते हुए किनारों की तरफ बढ़ती चली जाती है। इस प्रकार से अस्थि भवन के साथ-साथ एक विशेष अस्थि का आकार भी साथ ही साथ बनता चला जाता है । धीरे-धीरे इस प्रदेश में अस्थि ऊतकों का एक जाल सा बिछ जाता है तथा धीरे-धीरे इन जालीनुमा ऊतकों की मोटाई बढ़कर आपस में मिलने लगती है और इस प्रकार से एक पट्टिका का निर्माण हो जाता है जो कि प्रारम्भिक अस्थि से तन्तु ऊतकों द्वारा अलग हो जाती है।

इन प्रारम्भिक ऊतकों का ऊपरी भाग अस्थ्यावरक कला (Periosteum) का रूप धारण कर लेते हैं तथा इस कला के भीतर भी उपरोक्त अस्थि भवन की क्रिया निरन्तर चलती रहती है, जो कि अन्त में मुख्यास्थि के निर्माण में बदल जाती है।

अन्त: उपास्थिक अस्थिकरण (Endochondrial Ossification) – व्यावहारिक दृष्टिकोण से यह प्रक्रिया भी ठीक पूर्व वर्णित प्रकार से ही है, लेकिन इसका विधान अति जटिल है। अस्थिकोशिका (ओस्टिओब्लास्ट) ‘प्राथमिक अस्थ्यावरक कला’ (Premitive Periosteum) के गहरे हिस्सों से चलकर उपास्थि (कार्टिलेज) में प्रवेश करते रहते हैं तथा कैल्शियम का अंश उसमें जमा करते जाते हैं। रक्त-वाहिकाएँ इस कैल्शियम युक्त प्रदेश से अपना विस्तार करना प्रारम्भ कर देती हैं तथा साथ में उपास्थिक कोशिकाएँ भी प्रारम्भिक मज्जा-स्थलों को बनाते हुए सिकुड़ती एवं समाप्त होनी प्रारम्भ हो जाती हैं।

उपरोक्त प्रकार से निर्मित प्रारम्भिक मज्जा स्थलों (Primary Merrow Cavity) में अस्थिकरण ऊतकों का पड़ाव भी प्रारम्भ हो जाता है। इस प्रकार से एक ऐसा स्थल तैयार हो जाता है जिसमें अस्थि कोशिकायें एक विशेष प्रक्रिया द्वारा मुख्य अस्थि का निर्माण प्रारम्भ कर देती हैं तथा उसके साथ-साथ इस प्रकार से नव-निर्मित अस्थि के बाह्य भाग में भी ‘प्रारम्भिक अस्थ्यावरक कला’ की कोशिकाओं द्वारा अन्य अस्थि भागों का निर्माण भी चलता रहता है।

कैल्शियम युक्त उपास्थियाँ अस्थि शोषकों (Osteo Clasits) के द्वारा शोषित होकर अस्थि कारकों (Osteo blasts) की सहायता से अस्थि के रूप में परिवर्तित हो जाती है। उपरोक्त अस्थि शोषक प्रारम्भिक अस्थि (Primative Bone) का क्षय करके मज्जा स्थलों (Marrow Cavity) का भी साथ में निर्माण करते जाते हैं। इस प्रकार से मलिकास्थियों में प्रारम्भिक केन्द्रीय जालीदार अस्थि भागों का इन्हीं अस्थि शोषकों द्वारा शोषण होकर अस्थिगुहा (Madullory Cavity) का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि अस्थि का गात्र (shaft) अपना पूर्ण विकास नहीं कर लेता है। इसी प्रक्रिया में एक विशेष प्रकार की अस्थि कोशिकाएँ भी भाग लेती हैं जिनका कि मुख्य कार्य अस्थि को एक जीवित कोशिका के रूप में बनाये रखना होता है। अस्थिकोरक एवं सामान्य अस्थि कोशिकाओं का उदगम स्थल एक ही होने के कारण आपात स्थिति में ये एक दूसरे का स्वरूप एवं कार्य ग्रहण करने में भी सक्षम पाये गये हैं।

(Chemical Composition of Bone)

शुष्क अस्थि से कार्बनिक (Organic) तथा अकार्बनिक (Inorganic) दोनों ही प्रकार का सम्मिश्रण लगभग 1: 2 में पाया जाता है। अस्थि को जैविक पदार्थ (Animal Matter) संहता एवं लचक प्रदान करते हैं तथा खनिज पदार्थ (Mineral Matter) उसको कठोर बनाने में मदद करते हैं । ऊष्मा के द्वारा अस्थि के कार्बनिक भाग को हटाने पर अस्थि के आकार में कोई कमी नहीं आती है, लेकिन उसके वजन में 1/3 भाग कमी आ जाती है और अस्थि नितान्त कमजोर हो जाती है। अस्थि से कैल्शियम (चूना) को हटाने पर भी उसके आकार एवं आयतन में कोई अन्तर नहीं आता है, परन्तु अस्थि इतनी मुलायम हो जाती है कि उसे सरलता से मोड़ा जा सकता है। अस्थि द्वारा प्राप्त कार्बनिक पदार्थों को जब गरम किया जाता है तो वे जिलेटिन में परिवर्तित हो जाते हैं । संक्षेप में अस्थिका रासायनिक विश्लेषण निम्नांकित चार्ट द्वारा सरलतापूर्वक समझा जा सकता है।

जिलेटिन 33.30%
फास्फेट ऑफ लाइम 57.35%
कार्बोनेट ऑफ लाइम 3.85%
फास्फेट ऑफ मैग्नेशियम 2.05%
कार्बोनेट व क्लोराइड ऑफ सोडियम 3.45%
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Total – 100%

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