जुकाम से राहत का रामबाण घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार

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जुकाम क्यों होता है?

यह रोग वैसे तो ऋतु के बदलने से होता है, लेकिन प्रायः सभी ऋतुओं में हो जाता है। यह दो ऋतुओं के बीच के दिनों में अधिक होता है। इसके अलावा दूषित वायु मंडल, धूल तथा धुआं वाले स्थान आदि में भी जुकाम हो जाता है। कब्ज की हालत में, नंगे पैर चलने, गर्म स्थान से उठकर ठंडे स्थान में जाने, गर्म स्थान में काम करते-करते ठंडा पानी पी लेने, वर्षा में भीगने, व्यायाम करने के बाद स्नान कर लेने आदि कारणों से भी जुकाम हो जाता है।

जुकाम के लक्षण

जुकाम होने पर नाक से पानी बहने लगता है। छींकें आने लगती हैं और सिर तथा शरीर भारी पड़ जाता है। आंखें लाल हो जाती हैं और गले में खराशें पड़ जाती हैं। एक-दो दिन तक लगातार नाक से निकलने वाला श्लेष्मा गले के नीचे उतरकर कफ बन जाता है, अतः खांसी की भी शिकायत हो जाती है। कभी-कभी नाक बंद हो जाती है और सांस लेने में कठिनाई होती है।

जुकाम का घरेलू उपचार

  • अदरक, काली मिर्च, तुलसी तथा लौंग का काढ़ा बनाकर पीने से जुकाम बहकर निकल जाता है। एक कप पानी में 5-6 पत्तियां तुलसी की, 5 काली मिर्च के दाने, एक छोटी गांठ अदरक (कूटकर) तथा 2 लौंगें उबालना चाहिए। पानी जब चौथाई कप बचा रह जाए, तो उसे धीरे-धीरे पीना चाहिए।
  • एक गिलास पानी में एक नीबू का रस निचोड़कर उसे गुनगुना करके पिएं।
  • एक कप पानी में एक चम्मच अजवाइन डालकर उबालें। इसमें चीनी या गुड़ डालकर पिएं।
  • मूली के बीजों का एक चुटकी चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
  • आधा चम्मच राई पीसकर सूंघे तथा इतनी ही मात्रा में राई को शहद के साथ चाटें।
  • यदि छाती पर अधिक कफ जम गया हो, तो 100 ग्राम सरसों और 100 ग्राम हलदी, दोनों को पीसकर तवे पर भून लें। इसमें से 5-5 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाट लें।
  • सबसे पहले तुलसी और काली मिर्च की चाय आधा कप तैयार कर लें। इसके बाद दो रत्ती फिटकिरी की भस्म फांककर ऊपर से चाय पी लें।
  • पिसी हुई 2 चम्मच सोंठ और 10-15 ग्राम गुड़। दोनों को आंच पर एक कप जल में पकाएं। जब जल चौथाई कप रह जाए, तो उसे उतार कर पी लें।
  • दालचीनी 5 ग्राम और जायफल का चूर्ण 5 ग्राम। दोनों का चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाटें।
  • पके हुए अमरूद को बालू में भून कर खाएं। नीबू के पतों को जलाकर उसकी धूनी लेने से जुकाम व खांसी में काफी लाभ होता है।
  • चार-पांच मुनक्कों को 100 ग्राम पानी में उबालें। पानी जब आधा बचा रह जाए, तो मुनक्के चबाते हुए पानी पी जाएं।
  • बार-बार सर्दी व जुकाम होने पर 250 ग्राम दूध में चार पिण्ड खजूर, चार काली मिर्चे, एक बड़ी इलायची तथा दो लौंगों को कूटकर चूर्ण बना लें। फिर दूध में उबाल कर काढ़ा बनाएं। दूध जब थोड़ा जल जाए, तो उसे उतार कर उसमें एक चम्मच शुद्ध देसी घी डालें। इस काढ़े को धीरे-धीरे चबाते हुए सेवन करें, तीन दिन में सारा जुकाम निकल जाएगा।
  • दो चुटकी पिसी हुई सोंठ लेकर ऊपर से गर्म चाय या दूध पी लें।
  • 7-8 लौंग को 100 ग्राम पानी में उबालें। पानी जब 25 ग्राम रह जाए, तो इसे उतार कर पी लें।
  • जुकाम के साथ यदि ज्वर भी आ गया हो, तो 100 ग्राम गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद, एक चम्मच अदरक का रस और एक चुटकी खाने वाला सोडा डालकर पी लें।
  • राई के तेल को लहसुन के अर्क में मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें। फिर इस तेल को पैरों के तलवों, छाती तथा नाक पर मलें। इससे सर्दी-जुकाम कम हो जाता है।
  • लहसुन की पूतियों को आग में भूनकर पीस लें। इस भस्म में से एक चुटकी भस्म लेकर शहद के साथ सेवन करें।
  • तुलसी की जड़ 5 ग्राम, सोंठ या अदरक 10 ग्राम, काली मिर्च 10 नग और लौंग 5 नग। सबको लेकर 250 ग्राम पानी में उबालें । पानी जब 100 ग्राम रह जाए, तो उसे उतार कर छान लें। उसमें थोड़ी-सी शक्कर डालकर पी जाएं। तीन-चार दिन तक सुबह-शाम भोजन के बाद इसे पीने से सिर दर्द, नाक से पानी बहना, सर्दी, जुकाम, श्वास नली की सूजन, मलेरिया आदि रोग खत्म हो जाते हैं। बच्चों को एक चम्मच की मात्रा में देना चाहिए।
  • कपूर को एक कपड़े में बांधकर सूंघने से सर्दी-जुकाम के कारण बंद नाक खुल जाती है।
  • प्याज काटकर उसकी सूंघने से भी काफी लाभ मिलता है।
  • हींग को पानी में घोलकर सूंघने से जुकाम के रोगी को काफी आराम मिलता है।
  • आंवले का रस दो चम्मच सुबह और दो चम्मच शाम को शहद के साथ चाटें।
  • सोंठ, पीपल और काली मिर्च बराबर की मात्रा में लेकर कूट पीस लें। इसमें एक चुटकी त्रिकुट शहद के साथ चाट लें।
  • जुकाम के साथ ज्वर भी हो, तो 5-6 काली मिर्चें, 7 तुलसी के पत्ते, 2 लौंग, एक छोटी गांठ अदरक, आधा चम्मच जीरा और एक बड़ी इलायची। इन सबको एक कप पानी में पकाएं। पानी जब आधा कप रह जाए, तो उसे छानकर थोड़ी-सी मिसरी मिलाकर पी जाएं।
  • पीपल के काढ़े में शहद मिलाकर पिएं।
  • तुलसी के पत्ते 6-7, गुलगंद एक चम्मच, काली मिर्च 2, सोंठ एक गांठ और लौंग दो-सबका काढ़ा बनाकर पी जाएं।

जुकाम का आयुर्वेदिक उपचार

  • चिरायता, सोंठ, अड़ूसा की जड़, तथा कटेरी की जड़ । सब 10-10 ग्राम तथा छोटी पीपल 6 ग्राम। इन सबको लेकर एक कप पानी में काढ़ा बनाएं। काढ़ा जब आधा कप रह जाए, तो इसे छानकर पिएं।
  • लाल इलायची, काली मिर्च, सोंठ, धनिया, तुलसी के बीज और जीरा। सबको बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण सुबह और एक चम्मच शाम को सेवन करें।
  • तुलसी, मुलेठी, काली मिर्च, अदरक, लाल इलायची। इन सबको पानी में पकाकर काढ़ा बना लें। फिर इसे छानकर शहद के साथ पी लें।
  • तेज जुकाम में जायफल, जावित्री तथा सोंठ को पीसकर रूमाल में रखकर सूंघे।
  • बनफशा, मुलेठी, काली मिर्च, गाजवा, पलगाजवा, तुलसी के सूखे पत्ते, उनाव, मुनक्का तथा मिसरी। इन सबको बराबर-बराबर की मात्रा में लेकर तथा काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पिएं।
  • काकड़ासींगी, खूब कला, उनाव, हंसराज, अड़ूसा, बनफशा, कठली तथा मुलेठी। इन सबको समान मात्रा में लेकर तथा काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पिएं।
  • सोंठ, काली मिर्च, पीपल, चित्रक, तालीम पत्र, चक जीरा, इलायची, दालचीनी, तेजपात। इन सबको समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से एक-एक चुटकी चूर्ण दिन में तीन बार शहद से सेवन करें।
  • लक्ष्मी विलास रस (नारदीय) 1 गोली तीन बार कुनकुने पानी से लें।
  • कफ केतू रस 2 गोली तीन बार लें।
  • सेप्टीलिन टेबलेट 1 टेबलेट तीन बार 10 दिन तक लें।
  • षड् बिन्दु तैल के 1-2 बूंद दोनों नासाछिद्र में डालकर ऊपर खींच लें। सुबह-शाम दो बार लें।

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