लियाट्रिस स्पाइकैटा [ Liatris Spicata In Hindi ]

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Liatris Spicata

[ साग-सब्जी से बनती है। ] – स्थानिक शोथ, सारे अंग-प्रत्यंगों में शोथ या सारा शरीर फूल जाना – यह हृत्पिण्ड की बीमारी से हो या यकृत की बीमारी से अथवा मसाने की बीमारी से, किसी भी कारण से हो – इस दवा का उपयोग करने से क्रमशः पेशाब की मात्रा बढ़कर इस शोथ-रोग में विशेष फायदा होगा। शोथ -रोग में पहले ही इसका उपयोग करें, उदरामय के साथ शोथ में – एसिड एसेट, उदरामय में बहुत वेग, चूतड़ के नीचे दर्द।

क्रम – Q और मात्रा 15 बून्द से 1-2 ड्राम तक, 1 औंस पानी के साथ रोज 3-4 बार सेवन करना चाहिए।

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