पेट्रोसेलीनम सेटाइवम [ Petroselinum Sativum Uses, Benefits & Dosage In Hindi ]

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प्रमेह-रोग की अंतिम ( gleet ) अवस्था में जब कि मूत्रनली का प्रदाह पुराना होकर मूत्राशय के मुँह तक चला जाता है, तब – इससे ज्यादा फायदा होता है। एकाएक पेशाब का वेग होना और उठते-न-उठते पेशाब अपने आप हो जाना – यही इसका प्रधान चरित्रगत लक्षण है। एलो में जैसे एकाएक दस्त आने लगते हैं, वैसे ही पेट्रोसेलीनम में एकाएक पेशाब लग आता है।

एकाएक पेशाब लग आना, यह वेग क्षण-भर भी रोका नहीं जा सकता, पेशाब करने के समय बहुत जलन और तकलीफ होना। इस दवा का प्रयोग करते समय – पेशाब की नली में जोर की खुजली और लिंगमुण्ड में दर्द – इन दो विशेष लक्षणो को हमेशा याद रखना चाहिए। कभी-कभी दूध की तरह सफेद पेशाब होता है। मूत्रनली का मुँह श्लेष्मा से बंद रहता है, स्राव का रंग पीला होता है, समूची मूत्रनली में सुरसुरी होती है और उसमे लगातार पेशाब का वेग आता रहता है।

सदृश – कैनाबिस, कैन्थरिस, मर्क्युरियस।

क्रम – 3x से 200 शक्ति।

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