गलसुआ – कारण, लक्षण और उपचार ( मम्स )

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मम्स, जिसे स्थानीय बोल चाल में गलसुआ कहते हैं, एक प्रकार के वायरस से होने वाली बीमारी है, जिसमें कान के पीछे व आसपास सूजन आ जाती है।

ज्यादातर यह 5 वर्ष से 15 वर्ष तक की उम्र के बच्चों में होती है, लेकिन कभी-कभी बड़ों को भी मम्स हो सकता है। उस स्थिति में यह ज्यादा कष्टकारी होता है। ज्यादातर यह शहरों में भीड़भाड़ वाले स्थानों में होती है। छह माहसे छोटे बच्चों को मां के दूध से पर्याप्त एंटीबाडीज प्राप्त हो जाते हैं, जो इनकी मम्स व अन्य बीमारियों से रक्षा करते हैं।

मम्स के लक्षण

कैसे पहचानें: यह हलका बुखार, जी मिचलाना, थकान तथा भूख न लगने के साथ शुरू होती है। 24 घंटे के अन्दर कान के पास दर्द तथा खाना खाने में तकलीफ होती है। कान के पास सूजन महसूस होती है। साधारणतया 10 से 15 दिन में मरीज स्वस्थ हो जाता है, लेकिन कभी-कभी इसमें काम्पलीकेशन हो सकते हैं, जैसे लड़कों में, अंडकोषों में सूजन व दर्द, लड़कियों की ओवरी में सूजन, कभी-कभी स्तन में सूजन, दिमाग की झिल्ली व दिमाग में सूजन, पेंक्रियाज में सूजन, किडनी में सूजन, कभी-कभी हृदय की मांसपेशियों में सूजन, बहरापन, जोड़ों में सूजन आदि भी देखा गया है।

मम्‍स के होम्योपैथिक उपचार

कैसे बचे : बच्चों को एक साल से डेढ़ साल की उम्र में एम. एम.आर. का टीका लगवा देना चाहिए। इससे बच्चा खसरा, मम्स तथा जर्मन मीजल्स से बच सकता है। अगर आसपास किसी को यह बीमारी हो, तो बच्चों को होमियोपैथी की ‘पल्सेटिला’30 या ‘पैरोटेडिनम’ 30 की एक खुराक दें। ये भी काफी कारगर सिद्ध हुई हैं। ‘मोरबिलाइनम’ 200 में भी कारगर रहती है।

मम्स हो जाने पर सावधानियां : मरीज के उपयोग किये गए वस्त्र, रूमाल, तौलिया, खाने-पीने के बर्तन, चम्मच इत्यादि अच्छी तरह साफ रखें, मरीज को पूरा आराम करने दें, मरीज को दिन में दो-तीन बार कुनकुने पानी से कुल्ला करने के लिए कहें, मरीज को च्युंगम चबाने के लिए दें।

लक्षणों के अनुसार कोई भी दवा दें। अगर फायदा न दिखाई दे, तो समय नष्ट न करें, तुरंत अपने चिकित्सक से मिलें।

एकोनाइट 30 : बिलकुल शुरू में दें, जब सिरदर्द या बुखार अचानक हो जाए या काफी उलझन हो।

बेलाडोना 200 : बुखार अचानक हो, सिरदर्द हो, चेहरा लाल हो।

मर्कसॉल 30 : निगलने में तकलैीफ हो, लार काफी आ रही हो, फिर भी प्यास लग रही हो, सूजन हो या गिल्टी हो।

पल्सेटिला 30 : मुंह बिलकुल सूखा हो, लेकिन प्यास बिलकुल न लग रही हो, मुंह का स्वाद खराब लगे, बच्चा बार-बार सूखे होंठों को जीभ से लगाए।
रसटॉक्स 30 : इससे भी मम्स में काफी लाभ देखा गया है। मरीज को काफी उलझन हो, जीभ पर परत जमी हुई हो, लेकिन आगे नोक पूरी तरह लाल हो, बुखार हो, सूजन हो।

फाइटोलक्का 30 : निगलने में काफी तकलीफ हो, कोई भी गर्म चीज न खाया जा सके, कान में काफी दर्द हो। इसके अलावा लक्षणों के अनुसार कोई भी अन्य दवाएं, जैसे ‘ब्रोमियम’, ‘बेराइटा कार्ब’, ‘काली बाईक्रोम’, ‘पिलोकार्पिन’ दें।

बहुत अधिक टी.वी. देखना हानिकारक होता है

कई अध्ययनों का यह निष्कर्ष है कि जो लोग टी.वी. देखने में बहुत ज्यादा समय बिताते हैं वे ज्यादा अवसादग्रस्त हो जाते हैं। वे ज्यादा स्नैक्स खाते हैं और मोटे हो जाते हैं। जबकि अगर आप टी.वी. न देखें तो आपके पास दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ संवाद स्थापित करने और अपने संबंध मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय होता है। इस तरह रचनात्मक और भावनात्मक क्रियाओं में आपकी सक्रियता भी अधिक बनी रहती है।

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