मुंह के छाले का घरेलू उपचार, कारण, लक्षण – छाले के उपाय

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मुंह के छाले का कारण – मुंह में छाले होने का मुख्य कारण है अजीर्ण व कब्ज। यदि अजीर्ण व कब्ज ठीक हो जाये तो ये स्वयं ही ठीक हो जाते हैं। अधिक मिर्च-मसाले व तेज चूना खाने से भी छाले ही जाते हैं।

मुंह के छाले का लक्षण – ये छाले जीभ के किनारों पर तथा कभी-कभी पूरी जीभ पर हो जाते है। इनमें पानी भरा रहता है। छाले होने पर मुंह में पानी आता रहता है, कुछ भी खाने में असुविधा होती है। इनमें जलन व दर्द महसूस होता हैं। होंठ पर छाले विटामिन ‘बी’ की कमी से होते हैं। विटामिन ‘बी’ की पूर्ति होते ही छाले होना बन्द हो जाते हैं।

छाले का घरेलु इलाज निम्न हैं :

– शहतूत का शर्बत एक चम्मच, एक कप पानी में मिलाकर गरारे करने से लाभ होता है।

– जिन्हें बार-बार छाले होते हैं उन्हें टमाटर अधिक खाने चाहिए। टमाटर का रस पानी में मिलाकर कुल्ला करने से छाले मिट जाते हैं।

– साबुत धनिया पानी में उबालकर गरारे करें। पिसा हुआ धनिया छालों पर डालकर लार टपकायें। धनिये का बारीक चूर्ण, बोरेक्स अथवा खाने वाला सोडा मिलाकर छालों पर लगाने से लाभ पहुँचता है।

– तुलसी और चमेली के पत्ते चबाने से छाले ठीक हो जाते हैं।

– टमाटर के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुँह, होंठ, जीभ के छाले दूर हो जायेंगे।

– हरा पुदीना, सूखा धनिया और मिश्री समान भाग लेकर चबाएँ और लार बाहर निकालते रहें। ऐसा करने से मुख के छाले बहुत जल्दी मिट जाते हैं।

– अमरूद की नरम पत्तियों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुँह के छाले एवं मसूढ़ों का दर्द दूर होता है। मुँह की दुर्गन्ध भी दूर होती है।

– 600 ग्राम पानी में 40 ग्राम सौंफ उबालिये। जब पानी आधा रह जाये तब उसमें भुनी हुई फिटकरी की छोटी-सी डली डाल दीजिये। इस पानी से दिन में दो तीन बार गरारे करने पर मुख के छाले ठीक हो जाते हैं।

– भोजन के उपरान्त थोड़ी सौंफ खाने से छाले नहीं होते।

मुंह के छाले का बायोकेमिक/होमियोपेथिक इलाज

कालीम्यूर 6x, नेट्रम म्यूर 6x – इन दोनों औषधियों के शक्ति के लोशन से कुल्ला करना चाहिए। यदि छालों का रंग सफेद हो और थूक आता हो तो यह चिकित्सा अत्यन्त लाभकर सिद्ध होती हैं।

फेरम फॉस 3x – यदि छालों का रंग लाल हो तो यह औषधि लाभकारी है।

नैट्रम म्योर 6x, 30 – छाले मोती की तरह मुँह के किनारों पर।

नैट्रमफॉस 3x, 6x – पीला स्राव, जख्म, जीभ पर मैल, पाकाशय में अम्ल की अधिकता के कारण मुंह में घाव।

कैलिम्यूर 3x, 6x – मुख के घाव तथा मुख गव्हर के जख्मों में, बच्चों के मुँह में सफेद जख्म, दूध पिलाने वाली माँ के मुँह में घाव, मुँह में छाले के साथ अत्यधिक लार, मसूढ़े फूलना, सफेद लार, सफेद मैली जीभ में दें।

कैलिसल्फ 3x, 30x – निचले होंठ की भीतरी झिल्ली का रूखापन तथा उसका टूटकर निकलना, मुँह में जलन, गर्मी का अनुभव, जीभ पीली, चिकनी जैसी, कभी-कभी किनारे पर मैल, खुली हवा व सर्दी में रोग अच्छा रहना।

मर्कसौल 200, तीसरे दिन व बोरेक्स 30 तथा एसिड सल्फ 6 या 30 में कुछ दिन लें। बोरोग्लिसरीन से सुबह-शाम छालों को धोयें।

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