प्लैटिनम – Platinum Metallicum Homeopathy Uses, Benefits & Dosage In Hindi

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प्लैटिनम का होम्योपैथिक उपयोग

( Platinum Homeopathic Medicine In Hindi )

Platinum Met Case 1

इस लेख में हम Platinum Met के एक केस की चर्चा करेंगे कि Platinum Met का रोगी कैसा होता है।

एक महिला, पीठ दर्द, सर्दी, साइनसाइटिस की समस्या ले कर मेरे पास आईं। वो कलाकार हैं, पेंटिंग करती हैं।

महिला जो पेंटिंग बनाती थी उसमे हर पेंटिंग में महिला की आकृतियों की तुलना में पुरुष आकृतियाँ बहुत छोटी थीं या ऐसे पेंटिंग जिसमे महिला खिड़की की सलाखों को पकड़कर बाहर की ओर देख रही है या पुरुषों की नग्न पेंटिंग।

बचपन में जब उनकी मां काम पर जाती थीं तो उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया जाता था। हो सकता है कि खिड़की से बाहर देखने वाले विषयों वाली उनकी पेंटिंग बचपन के दौरान उनकी भावनाओं को दिखाती है।

महिलाओं से छोटे पुरुषों की पेंटिंग अहंकार और श्रेष्ठता की भावना को दर्शाती है। यह उसके भ्रम को दर्शाता है कि सभी व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से छोटे हैं।

रोगी में संवेदनशीलता के साथ एक बहुत मजबूत ट्यूबरकुलर मिआस्मैटिक अभिव्यक्ति ऐसी परिवर्तित धारणाओं और विकृतियों को सामने ला सकती है।

ऐसे में Tuberculinum 1M की एक खुराक सबसे पहले मैंने दिया और बाद में Platina 200CH की खुराक हफ्ते में एक बार दी गई जिससे पीठ दर्द और साइनसाइटिस कीपरेशानियों से राहत मिली।

वह आज भी स्वस्थ हैं। अगर मैंने उनकी पेंटिंग्स नहीं देखी होती तो इस मामले में Platina को चुनना मुश्किल होता।

Platina में अभिमान और दूसरों को हेय दृष्टि से देखना मिलेगा। मन अशांत धार्मिक भावना, अहंकार, कामुकता और क्रूरता मिलेगा।

खुद में गर्व; दूसरों की ग़लती ढूँढने वाला; कामुक बात; कंपकंपी, भय या क्रोध मिलेगा। उन्हें कपड़े उतारने और दूसरों को कपड़े उतारते देखने की बहुत इच्छा होती है। वे खेल के मैदानों या समुद्र तटों पर नग्न अवस्था में घूमते हैं।

उनका हंसी मज़ाक आमतौर पर सेक्स या यौन मामलों से संबंधित होता है। इनकी आंखों में एक विशेष आकर्षण होता है, उन्हें चमकीले रंग अधिक पसंद होते हैं। वे बहुत जल्दी थक जाते हैं और ऊब जाते हैं।

इन लोगों का मुख्य उद्देश्य आनंद लेना और दिखावा करना है। वे पार्टियों और मेलजोल में काफी खर्च करते हैं। वे कमज़ोर महसूस करते हैं और बहुत जल्दी थक जाते हैं।

Video On Platinum Met 

Platinum Met Case 2

  • एक केस मुझे याद है, जोकि काफी समय पहले एक बुजुर्ग मेरी क्लीनिक पर आते है और पूछते हैं कि आपके पास पाइल्स और कब्ज की कोई दवा है क्या? मुझे कई वर्षों से यह समस्या है। मैं खुद के होमियोपैथी के ज्ञान के आधार पर होमियोपैथिक दवा लेता रहता हूं। फिलहाल सल्फर 30 सुबह में और नक्स वॉमिका 30 रात में ले रहा हूं, कब्ज के लिए बायोकॉम्बिनेशन नंबर चार और पाइल्स के लिए बायोकॉम्बेिशन नंबर 17 ले रहा हूं। जब ज्यादा तकलीफ बढ़ जाती है तो एस्कुलस 30 भी साथ में लेता हूं तो ठीक हो जाता हूं पर अभी अपनी तकलीफ से बहुत परेशान हूं और ठीक नहीं हो पा रहा हूं। तुम्हारे पास कोई दवा हो तो चला दो (तीखी आवाज में बोले) शायद आराम आ जाए। दवा अच्छी क्वालिटी की ही चलाना और कितनी भी महंगी हो पैसे की चिंता मत करना अपने पास पैसों की कोई कमी नहीं है। हम स्वर्ण भस्म खाने वाले आदमी है और घर के खाने में घी की जगह त्रिफला घृत का उपयोग करते है जो बहुत महंगा आता है। हर कोई नहीं खरीद पाता है।

    फिर बोले मै फ्री टाइप की होमियोपैथिक दवाई में विश्वास नहीं रखता आप मुझे अच्छी से अच्छी दवा दो और अपनी फीस लो, आपकी मेहनत का जो बने वह भी मनचाहा पैसा लो लेकिन अच्छा इलाज करो।

    फिर वे अचानक मुझसे कहते हैं डॉक्टर साहब मेरा शॉल देख रहे हैं, इसको छूकर देखो, तो मैने सोचा कि इनकी बीमारी का शॉल से क्या संबंध है, वो बोले यह शॉल खास कश्मीरी है और जब मैं कश्मीर गया था तो वहां से लेकर आया था। शहर क्या पूरे प्रदेश में भी ऐसा आइटम और किसी के पास नहीं होगा।

    फिर वे बोलते है डॉक्टर साहब आप कभी पेरिस गये है? मैने कहा नहीं तो, बोले कोई रिश्तेदार तो रहते होंगे वहां पर? मैने कहा नहीं…तो बोले जीवन में एक बार पेरिस जरूर जाना वहां हर चीज अच्छी मिलती है। यहां तो हर चीजें मिलावटी मिलती है, लेकिन वहां पर जो चीजें मिलती है उनकी गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है। फिर बोले डॉक्टर साहब दवा अच्छी क्वालिटी की ही देना। जर्मन दवा हो तो ज्यादा अच्छा है। हम अच्छी दवाई खाने वाले इंसान है। ऐसी दवाओं का उपयोग करते है जो हर कोई नहीं ले पाता जैसे शिलाजीत, केसर, स्वर्ण भस्म, रोगनबादाम। आप देखिये मेरी इस उम्र में भी बाल नहीं झड़े और आज के युवाओं को देखो कम उम्र में ही उनके बाल कैसे झड़ने लगते हैं और सफेद हो जाते है। जवानी में बुढ़ापा आ जा जाता है और मुझे देखो इस उम्र में भी मेरे बाल कितने अच्छे है। डॉक्टर साहब पैसे की चिंता मत करना अच्छी से अच्छी दवाई देना।

    मैने उनको सभी दवाओं को बंद करने को कहा जो वह पहले से खा रहे थे जैसे सल्फर 30, नक्स वोमिका 30, त्रिफला घृत भी बंद करने के लिए बोला। मैने कहा अगर आपको ठीक होना है तो केवल मेरी ही दवाई खानी पड़ेगी, अन्य सभी दवाएं बंद करनी पड़ेगी और मैने उनके लक्षणों के आधार पर Platina 30 सुबह और शाम लेने की सलाह दी।

    इनके रुब्रिक को समझते हैं :-

  • Exclusive, too – इसका अर्थ है कि उनके पास वो सब है, जो दूसरों के पास उपलब्ध नहीं।
  • Delusion – wealth of – ऐसा मानना कि उनके पास अधिक पैसा है, और उसे दिखाना भी।
  • Boaster – डींगें मारने वाला
  • Delusion – Small, Things – वो सामने वाले या चीज़ों को छोटा समझता है, कि दुसरे के पास जो है वो तुक्छ है।
  • Egotism – अहंकार
  • Shrieking : Aid for, इसका मतलब कि आपसे सहायता भी जोर से, चिल्ला कर मांगेगा।

    इन रुब्रिक के आधार पर मैंने उनको Platina लेने की सलाह दी।

    सात दिन बाद ही वो बुजुर्ग आए और खुश थे। पाइल्स और constipation में काफी आराम था फिर कुछ दिन दस्त लग गये लेकिन दस्त से कोई कमजोरी नहीं आयी वो खुश थे और उन्होंने मुझे बताया कि जैसे जन्मों-जन्मों से जमा हुआ कचरा साफ हो गया है। पेट के साथ मन भी बहत हल्का हो गया आपको जिंदगी में कभी कोई दिक्कत आए तो मुझे बताना।

(1) मानसिक-दृष्टि से अपने को सबसे बड़ा समझना – यह हिस्टीरिया-ग्रस्त उन रोगियों की दवा है जो अपने को दूसरों से बड़ा समझते हैं। स्त्री घमंड में अपने को इतना बड़ा समझती है कि दूसरों को तुच्छ, अत्यन्त छोटा समझने लगती है। रानी की तरह गर्दन तान कर चलती है मानो उसके चारों तरफ के लोग तुच्छ, घृणित जीव हों। उन पर नजर उठा कर देखना भी अपनी शान के खिलाफ समझती है। उन्हें अपनी स्थिति से बहुत नीचे का प्राणी खयाल करती है, मानो उसके सामने सब कीड़े-मकौड़े हो। अपने रिश्तेदारों को अपने वंश से बहुत हीन समझती है।

(2) शारीरिक-दृष्टि से भी अपने को सबसे बड़ा समझती है – इस मानसिक-विक्षेप का असर यहां तक होता है कि वह दूसरों को शारीरिक-दृष्टि से भी अपने से बहुत छोटा देखती है। उसे ऐसा लगता है कि उसका शरीर बहुत बड़ा है, उसके शरीर के मुकाबले में दूसरों का शरीर उसे बहुत छोटा दिखलाई देता है। दूसरों की तुच्छता, क्षुद्रता, छोटेपन को देखकर उनके प्रति उसके मुख पर घृणा का भाव झलकता है। छोटे-छोटे मामलों में जिनमें गंभीरता का कोई स्थान नहीं होता वह गंभीर-मुद्रा धारण कर लेती है, और जरा-जरा-सी बात पर चिढ़ने लगती है, मुंह फुला लेती है।

(3) कभी दु:खी कभी प्रसन्न – परिवर्तित मानसिक-मुद्रा में रहती है – उसकी मानसिक-मुद्रा बदलती रहती है। कभी वह दु:खी दिखलाई देती है, कभी प्रसन्न। इस प्रकार मानसिक-मुद्रा का परिवर्तन इग्नेशिया, क्रोकस, नक्स मौस्केटा, पल्स तथा एकोनाइट में भी पाया जाता है। ये सब हिस्टीरिया-ग्रस्त रोगी के लक्षण हैं।

(4) जीवन से घृणा परन्तु मृत्यु से भय – भय इस औषधि का प्रमुख लक्षण है। उसे डर लगा रहता है कि कुछ अनहोनी बात न हो जाय, ऐसा न हो कि उसका पति जो रोज लौट आया करता है आज न लौटे। वह जीवन से घृणा करती है, चिड़चिड़ा स्वभाव होता है, डर लगता है, परन्तु मरने से भी डरती है। उक्त प्रकार की अवस्था डर जाने, रंज, गुस्सा, अहंकार, विषय-वासना आदि से उत्पन्न हो सकती है।

(5) दर्द धीरे-धीरे बढ़ता और धीरे-धीरे घटता है – इसका दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है, और उच्च शिखर पर आ जाने के बाद धीरे-धीरे घटता है, और दर्द का स्थान सुन्न पड़ जाता है। स्टैनम के दर्द में भी यही लक्षण हैं, परन्तु स्टैनम में छाती की अत्यधिक कमजोरी होती है। जो प्लैटिनम में नहीं है। बेलाडोना और मैग फॉस में दर्द एकाएक शुरू होता है और एकाएक ही समाप्त हो जाता है। सल्फ्यूरिक ऐसिड में दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है, परन्तु एकाएक हट जाता है।

(6) शारीरिक तथा मानसिक लक्षणों का पर्याय-क्रम – इस औषधि का एक विशेष-लक्षण यह है कि जब शारीरिक-लक्षण प्रकट होते हैं, तब मानसिक लक्षण नहीं रहते, जब मानसिक-लक्षण प्रकट होते हैं, तब शारीरिक-लक्षण नहीं रहते। डॉ० नैश ने एक पागलपन के रोगी का उल्लेख किया है जिसके मानसिक-लक्षण तथा रीढ़ की हड्डी-मेरु-दंड-में दर्द के लक्षण एक-दूसरे के बाद आते-जाते रहते थे। जब मानसिक-लक्षण प्रकट होते थे तब स्पाइन का दर्द गायब हो जाता था, जब स्पाइन का दर्द प्रकट होते थे मानसिक लक्षण नहीं रहते थे। वह इस औषधि से ठीक हो गया।

(7) गुदा-प्रदेश में टट्टी चिकनी मिट्टी की तरह चिपक जाती है – मल गुदा-प्रदेश में चिकनी मिट्टी की तरह चिपट जाता है। कब्ज में जब नक्स-वोमिका से भी फल नहीं मिलता तब यह उसे दूर कर देता है।

(8) अप्राकृतिक मैथुन की प्रवृत्ति – जिन लोगों में अप्राकृतिक-मैथुन की घृणित प्रवृत्ति पायी जाती है उनकी इस प्रवृत्ति को यह रोक देता है।

(9) रजोधर्म समय से पहले, देर तक रहने वाला, स्याह रंग का होता है – माहवारी अपने नियमित समय से बहुत पहले होती है, देर तक रहती है। और खून का रंग स्याह, जमा हुआ और बदबूदार होता है। बच्चेदानी में दर्द होता है, खुजली होती है, और ऐसा लगता है कि मानो लटक रही है।

(10) स्त्रियों में अत्यन्त काम की प्रवृत्ति – स्त्रियों में, विशेषकर कुमारियों में अत्युत्कट काम-भावना इस औषधि में पायी जाती है। सेक्स की चेतना का समय से पहले जाग उठना इसका निर्देशक लक्षण है। जननेन्दिय इतनी संवेदनशील होती है कि चिकित्सक परीक्षा करने के लिये भी उसे छू नहीं सकता, छूते ही उसे ऐंठन पड़ जाती है। ऐसी स्त्रियां मैथुन से बेहोश हो जाती हैं। ऐसी स्त्रियों के बांझपन को प्लैटिनम दूर कर देता है।

काम-प्रवृत्ति के इलाज की मुख्य-मुख्य औषधियां

प्लैटिनम – नवयुवतियां जिनके गुप्तांग तथा काम-वासना समय से पहले जाग उठते हैं, जिन्हें काम-चेष्टाएं आ घेरती हैं, और बुरी आदतों की लत पड़ जाती है उनके लिए यह उपयोगी है। गर्भवती स्त्रियों को संगम की प्रबल इच्छा होने पर यह लाभप्रद है। गुप्तांग इतने नाजुक होते हैं कि चिकित्सक उनको छूकर परीक्षा नहीं कर सकता।

एस्टेरियस – विषय-तृष्णा इतनी जबर्दस्त होती है कि मैथुन से भी दूर नहीं होती। स्त्री तथा पुरुष दोनों के लिये उपयोगी है।

एपिस – विधवाओं की अत्यधिक विषय-भोग की इच्छा।

कॉफ़िया – जननांगों में विषय-भोग की खुजली, जननांगों का नाजुक (Sensitive) होना।

ग्रैटिओला तथा प्लैटिनम – गर्भवती स्त्रियों की विषय-भोग की इच्छा।

हायोसाएमस – रोगी की विषय-भोग की इतनी उत्कट इच्छा होती है कि गुप्तांगों को खोलकर दिखलाता है।

कैलि फॉस – अविवाहिता लड़कियों में प्रत्येक माहवारी के बाद विषय-कामना की उत्तेजना।

लिलियम टिग – डिम्ब-ग्रन्थि की शिकायतों के साथ विषय-वासना का होना।

म्यूरेक्स – विषय-भोग की प्रबल इच्छा की दृष्टि से इसके मुकाबले में दूसरी दवा नहीं है। रोगी अपने को वश में नहीं रख सकता। विषय-भोग की इच्छा उसे पागल-सी कर देती है।

औरिगेनम – विषय-भोग की इच्छा से बाधित होकर रोगी हस्त-मैथुन करने लगता है।

फ़ॉसफ़ोरस – बाधित-संयम के कारण विधवाओं की काम-प्रवृत्ति। रोगी हायोसाएमस की तरह गुप्तांगों को खोलकर दिखलाता है।

(11) शक्ति तथा प्रकृति – 6, 30 (रोगी ठंडी हवा में घूमना पसन्द करता है)

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