विटामिन B1 के स्रोत और फायदे

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इस विटामिन को एन्यूरिन या थायामिन नाम से भी जाना जाता है। इसकी खोज का इतिहास – ‘बेरी-बेरी’ रोग के प्रति है। इस तत्त्व की खोज के बहुत वर्ष पूर्व से ही ‘बेरी-बेरी’ रोग का ज्ञान हो गया था। सन् 1642 ई० में ‘बोनिटियस’ ने और 1952 में ‘टल्प’ ने इसका उल्लेख किया 19वीं शताब्दी में ‘बेरी-बेरी’ रोग के विषय में स्पष्ट हुआ कि जो लोग मशीन से साफ किया हुआ चावल खातें हैं, उनको यह रोग हो जाता है। यह परीक्षण जापान में सन् 1890 में किया गया था । सन् 1911 ई० में ‘फन्क’ ने चावल की भूसी से उस तत्त्व के पृथक करने का प्रयत्न किया जिसकी कमी बेरी-बेरी रोग के लिए उत्तरदायी थी। उसी समय विटामिन ए की खोज हो चुकी थी अतः चावल की भूसी से निकाले गए इस तत्त्व को विटामिन ‘बी’ कहा गया । सन् 1934-36 में इसकी रासायनिक रचना तथा संगठन का पता लगा और 1936 में अन्ततोगत्वा ‘विलियम्स’ और उनके सहयोगियों ने इसका रासायनिक संश्लेषण किया ।

वर्तमान काल में विटामिन B1 ने आयु बढ़ाने, स्वस्थ रहने और विभिन्न रोग दूर करने में विशेष महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है। इसको थियामीन हाइड्रोक्लोराइड (Thiamine Hydrochloride) या एन्यूरिन (Aneurine) भी कहा जाता है अथवा ‘एन्टी बेरी-बेरी विटामिन’ के नाम से भी जाना जाता है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है। यदि भोजन में यह उपस्थित न हो अथवा न्यून अर्थात् कम हो तो कार्बोहाइड्रेट का पूरा चूषण नहीं होता और इससे एक विषैली चीज पाइरूविक एसिड (Pyruvic Acid) निर्मित होकर रक्त में जमा हो जाती हैं जिससे मस्तिष्क और तान्त्रिक संस्थान में क्षोभ उत्पन्न हो जाता है। अतएव कार्बोहाइड्रेट्स के सम्यक चूषण के लिए भोजन में विटामिन B1 का होना अनिवार्य है क्योंकि मस्तिष्क एवं तान्त्रिक संस्थान के सूत्रों को स्वस्थ शक्तिशाली बनाये रखना इसी विटामिन का कार्य है ।

यह विटामिन निशास्ता वाले भोजनों को पचाता है, भूख बढ़ाता है । शरीर में इसकी कमी से भूख घट जाती है, वजन कम होने लग जाता है । हृदय और मस्तिष्क में कमजोरी और दोष उत्पन्न होने लग जाते हैं । मस्तिष्क में स्नायु की दुर्बलता, आँखों से अन्धेरा आ जाना, कमजोरी, कमर दर्द, पुट्ठों में दर्द और ऐंठन, हृदय अधिक धड़कना, साँस लेने में कष्ट, नींद न आना, मितली, कै, चर्म खुरदुरी, हृदय की कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, पेट फूल जाना, हाथों की हथेलियों में जलन, बेरी-बेरी रोग, हृदय फैल जाना, चर्म रोग, दस्त आना, जीभ पक जाना, इत्यादि लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ।

दूध पीते बच्चों में कै (उल्टी) आना, पेट में दर्द के कारण रोना, दस्त आना, पेट फूल जाना, गर्दन अकड़ जाना, आक्षेप आदि कष्ट हो जाते हैं। पचानांगों को भारी हानि पहुँचती है। यह विटामिन छिलके वाले अनाजों, दालों, तिल, यीस्ट, बादाम, अखरोट, मूंगफली, दूध, कलेजी, मछली और सब्जियों में पाया जाता है ।

विटामिन B1 अनाज के अन्तस्थ मूलांकुरों में, हाथ छांटी चावल (घर पर ओखली-मूसल से कूटे गये चावलों में) के बाह्य आवरणों में (जो मशीन से कुटे चावलों में पालिश के रूप में छील दिया जाता है।) आलू, दूध, हरे शाकों इत्यादि निरामिष भोज्य पदार्थों तथा अण्डा, यकृत तथा बकरे की अण्डग्रन्थि आदि आमिष भोज्य पदार्थों में एवं विशेषकर आसव-अरिष्ट के किण्व (Yeast) में पाया जाता है । यह रक्त प्लाविका (Plasma) मानव रक्त के तरल भाग में प्रोटीन को यथोचित मात्रा में सन्तुलित रखता है। जब B1 घट जाता है तो रक्त कोशिकाओं (Blood Capillaries) से रक्त में तरल भाग रिसकर बाहर जाने लगता है । इसी कारण से शरीर में शोथ (सूजन) उत्पन्न हो जाती है । विटामिन बी-1 अन्तड़ियों की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करता है और अन्तड़ियों की श्लैष्मिक कला को मजबूत और शक्तिशाली बनाता है, इसी के परिणामस्वरूप विभिन्न रोग के जीवाणु-कीटाणु अन्तड़ियों में प्रवृष्टि नहीं पा सकते। यह विटामिन हृदय, वृक्क, यकृत और पाचन संस्थान को शक्तिशाली और तन्दुरुस्त बनाये रखता है। इसकी कमी से बेरी–बेरी नामक रोग हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क तथा तान्त्रिक तन्तुएँ क्षोभयुक्त हो जाती हैं । हृदय बहुत ही दुर्बल, बढ़ी हुई धड़कन वाला हो जाता है और समस्त शरीर शिथिल पड़ जाता है। श्वसन क्रिया बढ़ी हुई सी प्रतीत होती है तथा शरीर में आद्र-शोथ के लक्षण प्रकट हो जाते हैं ।

विटामिन B1 के अभाव से रोगी को समस्त शरीर में थकावट प्रतीत होती है, अजीर्ण रहता है, श्वासगति तेज होने लग जाती है तथा मांसपेशियों को स्पर्श करने से दर्द अनुभूत होता है ।

नोट – बेरी-बेरी रोग उन व्यक्तियों को होता है जो मशीन से साफ और पालिश किये हुए चावल या महीनों तक सूखे अन्न खाते हैं। हरी शाक-सब्जी और विटामिन बी1 तत्त्व वाले भोज्य पदार्थ नहीं खाते हैं। बेरी-बेरी रोग दो प्रकार का होता है।

(1) आर्द्र बेरी-बेरी । (2) शुष्क बेरी-बेरी ।

आर्द्र बेरी-बेरी के लक्षण

सर्वप्रथम समस्त शरीर की माँसपेशियों में कहीं भी स्पर्श करने से दर्द फिर थोड़ी देर बाद उसी स्थान पर स्पर्श-शून्यता मालूम पड़ती है। रोगी शक्तिहीनता अनुभव करता है । यदि रोगी बैठ जाये तो उठने का साहस नहीं करता है, बैठकर उठना उसे कठिन प्रतीत होता है । नाड़ी की गति तेज और हृदय कमजोर हो जाता है । इतना ही नहीं वरन् फुफ्फुसों की झिल्ली में हृदयावरण और अण्डकोषावरणों में जल भर जाता है और पतले दस्त, उल्टी और मितली इत्यादि लक्षण प्रकट हो जाते हैं ।

शुष्क बेरी-बेरी के लक्षण

इस प्रकार के रोग से ग्रसित रोगी दिन प्रतिदिन नित्य कर्म करने में असमर्थ, क्षीण एवं दुर्बल हो जाते हैं। उनमें उठने-बैठने और चलने-फिरने की शक्ति नहीं रहती है। हृदय और श्वसन की गति तेज होकर बढ़ जाती है। कै, मितली और पतले दस्त इत्यादि लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ।

स्वस्थ वयस्क शरीर के लिए दिनभर में 900 यूनिट्स (लगभग 1 मिलीग्राम) की आवश्यकता होती है । इससे कम पर हीनताजनित लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं । यह मात्रा 1 हजार माइक्रोग्राम अथवा 333 यूनिट होती है ।

गर्भवती स्त्री को और धात्री माता को पुरुष की आवश्यकता से 5 गुना अधिक विटामिन बी 1 की आवश्यकता होती है। बच्चों को युवा पुरुष की अपेक्षा अपने भार के अनुपात से अधिक विटामिन बी 1 की आवश्यकता होती है । कुछ रोगावस्थाओं में भी इसकी आवश्यकता बढ़ जाती है । उग्र ज्वरादि, विषाक्त दशाओं, थायरायड ग्रन्थि की क्रियाशीलता, पाचन संस्थान के रोग, बहुमूत्र की दशाओं तथा मूत्रल औषधियों के दीर्घ कालिक प्रयोग में इसकी आवश्यकता अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है

विभिन्न खाद्य चीजों में विटामिन B1 की मात्रा

निम्नलिखित प्रत्येक 100 ग्राम द्रव्य में विटामिन B1 की मात्रा यूनिट्स में अंकित है जिसकी तालिका नीचे है –

द्रव्यों के नाम यूनिट्स में मात्रा का उल्लेख
सूखे किण्व में 9000 यूनिट्स
ताजे किण्व में 6000 यूनिट्स
गेहूँ के अंकुरों में 4000 यूनिट्स
गेहूँ के दोनों में 900 यूनिट्स
गेहूँ की रोटी में 360 यूनिट्स
मटर में 100 यूनिट्स
हरे शाक में 30 से 210 यूनिट्स
आलू में 90 से 120 यूनिट्स
दूध में 70 यूनिट्स
अण्डे की जर्दी में 400 यूनिट्स
जिगर में 450 यूनिट्स
गुर्दे में 470 यूनिट्स

 

(शाक सब्जियों में) कच्ची गोभी, बैंगन, सलाद, पालक, मैंथी, करमकल्ला, चुकन्दर, गाजर, अरबी, प्याज, मूली और शलजम में यह विटामिन होता है । आजकल इस विटामिन की पूर्णहीनता के बजाय आंशिक हीनता के चिकित्सकों के अधिक केस मिलते हैं । ऐसे केसों में प्राय: निम्नलिखित लक्षण होते हैं :-

भूख में कमी, कब्ज, अफारा, दस्त, सिर में दर्द, हाथ-पाँवों में दर्द, कमर और शरीर के अन्य भागों में दर्द, कानों में भनभनाहट, आँखों के सामने अन्धेरा सा छा जाना और चिन्गारियाँ सी छूटना, चक्कर आना, स्मरण-शक्ति की कमी, चिन्ता और भय घेरे रहते हैं । धड़कन तथा शक्तिक्षीणता मिलती है । आंशिक लक्षणों से इसकी पहचान और निदान कठिन होता है किन्तु इस विटामिन की पूर्णहीनता से बेरी-बेरी रोग उत्पन्न हो जाता है। विटामिन बी 1 की उपर्युक्त आंशिक हीनताजनित लक्षणों में तथा बेरी-बेरी रोग में संक्रमणजनित तन्त्रिका प्रदाह की विभिन्न दशाओं-हरपीज जोस्टर, पोलियोमा, इलाईटिस, डिफ्थीरिया जनति तन्त्रिका प्रदाह, आमवात जनित तन्त्रिका प्रदाह, में इसका प्रयोग किया जाता है। दुष्पोषण जनित तन्त्रिका प्रदाह की दशाओं में – रक्ताल्पता जनित, पेलाग्रा अतिसार से सम्बन्धित मद्यपान जनित गर्भावस्था से सम्बन्धित पाचन संस्थान के विकारों से सम्बन्धित-डायबिटीज से उत्पन्न लक्षणों में, विषाक्त पदार्थों के द्वारा उत्पन्न तन्त्रिका प्रदाह में इसका प्रयोग किया जाता है। स्कन्ध प्रदेश, नितम्ब प्रदेश, वक्ष, अग्रबाहु आदि की स्थानिक तन्त्रिका प्रदाह में इससे लाभ होता है ।

 

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