सैबाइना – Sabina ( Sabina 200 )

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सैबाइना का होम्योपैथिक उपयोग

( Sabina Homeopathic Medicine In Hindi )

(1) रक्त-स्राव की औषधि (Hemorrhagic remedy); रक्त स्राव के साथ दर्द कमर से चल कर योनि के ऊपर उठी हुई हड्डी या जरायु तक जाता है – यह रक्त-स्राव की प्रमुख औषधि है। किसी प्रकार का भी रक्त-स्राव हो, गुर्दे से, मूत्राशय से, मल-द्वार से, बवासीर के मस्सों से, जरायु से। अगर कहीं से रक्त-साव हो रहा है, तो रक्त-साव की औषधियों की तरफ ध्यान देते हुए इस औषधि को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। इस औषधि का विशेष उपयोग जरायु से होने वाले रक्त-स्राव पर होता है। जरायु से रक्त-साव का मुख्य लक्षण है -‘रक्त-स्राव के समय कमर में दर्द’। यह दर्द कमर से उठता है, और सीधा योनि के ऊपर उठी हुई हड्डी या जरायु तक जाता है। असहनीय पीड़ा होती है। इस लक्षण के रक्त-स्राव को यह रोकती है।

रक्त-स्राव के साथ कमर से उठ कर योनि के ऊपर उठी हुई हड्डी तक जाने वाला दर्द सैबाइना तथा वाइबर्नम में पाया जाता है, परन्तु इन दोनों में भेद यह है कि दर्द उठता तो दोनों में कमर से ही है, किन्तु सैबाइना में सीधा योनि के ऊपर की हड्डी या जरायु तक जाता है, वाइबर्नम में सीधा न जाकर कमर के चारों ओर से होता हुआ योनि के ऊपर की हड्डी या जरायु तक पहुंचता है। रक्त-स्राव के साथ इस प्रकार का दर्द तीन अवस्थाओं में पाया जाता है – जब ‘अत्यधिक रक्त-म्राव’ (Menorrhagia) हो, जब ‘एक माहवारी तथा दूसरी माहवारी के बीच के दिनों में रक्त-स्राव’ (Metrorrhagia) होता रहे तथा जब ‘गर्भपात की आशंका’ (Threatened abortion) हो।

(2) रक्त-स्राव अधिक; चमकीला लाल या काला; थक्के-थक्के; और फव्वारे-सा फुटता है (Flow is copious, dark, clotted and comes in gushes) – रक्त-स्राव कहीं का भी क्यों न हो, सैबाइना का रक्त अधिक परिणाम में बहता है, चमकीला लाल या काला होता है, इसमें रक्त के थक्के मिले होते हैं, और बीच-बीच में फव्वारे-सा फूटता है। हम क्योंकि इस औषधि के जरायु पर विशेष-प्रभाव की चर्चा कंर रहे हैं, इसलिये यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि रजोधर्म में चाहे ‘अतिरज’ (Menorrhagia) हो, चाहे एक माहवारी से दूसरी माहवारी की बीच रज-स्राव (Metrorrhagia) हो, चाहे गर्भपात की आशंका (Threatened abortion) के रज:स्राव हो, रक्त-स्राव की प्रकृति यही रहेगी, अर्थात् रक्त-साव दर्द के साथ होगा, अधिक परिमाण में होगा, काला-काला थक्केवाला होगा, और बीच-बीच में फव्वारे का-सा फूटेगा। दर्द का वही लक्षण होगा जिसका हम ऊपर वर्णन कर आये हैं।

(3) हर तीसरे महीने गर्भपात या गर्भपात की आशंका – अभी तीन प्रकार के जरायु-संबंधी रक्त-स्राव का हमने वर्णन किया। इन तीनों रक्त-स्रावों में से गर्भपात की आशंका पर इस औषधि का विशेष प्रयोग होता है। जिन स्त्रियों को हर तीसरे महीने रक्त-स्राव के साथ गर्भपात ही जाता है, या तीसरे महीने रक्त-स्राव से गर्भपात की आशंका हो जाये, तो इस औषधि से लाभ होता है। तीसरे महीने होने वाले गर्भपात को यह औषधि रोक देती है। तीसरे महीने गर्भपात को रोकने के लिये मुख्य तौर पर दो औषधियां हैं – बेलाडोना तथा सैबाइना

(i) तीसरे महीने गर्भपात को रोकने का बेलाडोना का लक्षण – ‘संवेदनशीलता’ – अगर रोगिणी अत्यंत-संवेदनशील हो, स्पर्श, शब्द आदि को न सह सकती हो, नर्स जब बिस्तर बनाती हो तब चादर की जरा-सी भी फड़कन न सह सके, जरायु से जो रुधिर जा रहा हो उसका बहना रोगिणी को अनुभव होता हो, उज्वल रक्त-वर्ण का रुधिर हो और इतना गर्म हो कि रोगिणी उसकी गर्मी अनुभव करती रहे, यह महसूस होता रहे कि रुधिर गर्म है, दर्द यकायक आये और यकायक चला जाये – इन लक्षणों के होने पर तीसरे महीने के गर्भपात को रोकने के लिये बेलाडोना औषधि होगी।

(ii) तीसरे महीने गर्भपात को रोकने का सैबाइना का लक्षण – रक्त-स्राव के साथ दर्द कमर से चलकर योनि के ऊपर उठी हुई हड्डी (Pubes) या जरायु तक जाता है – अगर तीसरे महीने गर्भपात हो जाता हो, या तीसरे महीने गर्भपात के लक्षण दिखलाई देने लगें, दर्द के साथ रक्त-स्राव होने लगे, और यह दर्द कमर से चलकर योनि के ऊपरी उठी हुई हड्डी जहां बाल उगते हैं वहां या जरायु तक चला जाय, तो इन लक्षणों के होने पर तीसरे महीने के गर्भपात को रोकने के लिए सैबाइना मुख्य-औषधि है। सैबाइना की रोगिणी गर्मी सहन नहीं कर सकती, ठंडक पसन्द करती है। सिकेल कौर में भी तीसरे महीने में होने वाले गर्भपात को रोकने का लक्षण है।

गर्भपात को रोकने की अन्य मुख्य-मुख्य होम्योपैथिक औषधियां

(i) पहले महीने गर्भपात – वाइबर्नम
(ii) दूसरे महीने गर्भपात – एपिस, कैलि कार्ब
(iii) तीसरे महीने गर्भपात – सैबाइना, सिकल कौर, बेलाडोना, सीपिया, थूजा
(iv).तीसरे, पांचवे, सातवे महीने गर्भपात – सीपिया

(4) लटकते रहने वाले रक्त-स्राव (Lingering hemorrhages) में सल्फर या सोरिनम – रक्त स्राव के कई रोगियों को रक्त-स्राव का जीर्ण रोग हो जाता है, पुराना-रोग। औषधि के सेवन से रक्त-स्राव एक बार रुक जाता है, परन्तु फिर किसी कारण से शुरू हो जाता है। प्राय: उन स्त्रियों को जिन्हें गर्भपात हो चुका होता है, ऐसी शिकायत हो जाया करती है। जरायु के अतिरिक्त अन्य किसी प्रकार का भी रक्त-स्राव ठीक हो-होकर फिर होने लगता है, फव्वारे सा फूटता है। ऐसी दशा में सैबाइना लाभ तो करेगा, परन्तु इस से चिर-स्थायी लाभ नहीं होगा। ऐसी हालत में एन्टी-सोरिक दवा देनी होगी। सल्फर से लाभ होगा, सल्फर भी लाभ न करे तो सोरिनम से स्थिर लाभ होगा। सल्फर और सोरिनम दोनों एन्टी-सोरिक है।

(5) रक्त-स्राव तथा गठिये में पर्यायक्रम – जब रक्त-स्राव हो तब गठिया न रहे, जब गठिया, प्रकट हो तब रक्त-स्राव चला जाय, इस प्रकार के पर्याय-क्रम में गठिये को यह दवा ठीक कर देती है। हाथ की कलाई और पैर की अंगुलियों में सूजन वाले वात-रोग में सैबाइना, हाथ की कलाई और पैर की अंगुलियों की सूजन का वात-रोग स्थान परिवर्तन करता रहे, तो कॉलोफाइलम, और बड़ी-बड़ी मांसपेशियों में वात-रोग के दर्द में सिमिसिफ़्यूगा लाभ करता है। स्त्रियों के इन वात-रोगों में जरायु की कुछ-न-कुछ गड़बड़ी होनी चाहिये।

(6) सैबाइना का रोगी संगीत नहीं सह सकता – संगीत इस रोगी को अधीर बना देता है, वह मानो उसकी हड्डियों तक को छेद देता है, संगीत को वह सहन नहीं कर सकता। थूजा का रोगी संगीत सुनकर रोने लगता है। ये दोनों संगीत को सहन नहीं कर सकते।

(7) शक्ति तथा प्रकृति – 3, 30 ( औषधि ‘गर्म’-प्रकृति के लिये है। )

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