होम्योपैथी में करेला

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होम्योपैथिक औषधि मोमोर्डिका कैरण्टिया करेले से बनी है। यदि करेला उपलब्ध नहीं हों तो उसकी जगह यह औषधि काम में लेकर लाभ उठाया जा सकता है। अमेरिकन होम्यों, फार्माकोमिया के अनुसार करेले के पत्तों के रस में समान मात्रा में एल्कोहल (सुरासार) मिलाकर इसका मूलार्क (मदर टिंचर) बनाया जाता है।

लक्षण – होम्योपैथी में रोगी के लक्षण जिस औषधि में मिलते हैं, वही औषधि उसे देने से रोगी ठीक हो जाता है। इसके लक्षण हैं – तत्काल लगी नई सर्दी, उल्टी की इच्छा, शरीर में दर्द आदि।

खसरा, छोटी माता – खसरा, चेचक में यह लाभदायक है। जब माता, खसरा फैल रहा हो तो बचाव के लिए मूलार्क की पाँच बूंद पाँच चम्मच पानी में मिलाकर नित्य एक बार सात दिन तक प्रातः भूखे पेट पिलायें। खसरा, माता निकल आने पर यह 3 शक्ति में पाँच बार दें। चेचक माता के सारे लक्षण जुकाम, बुखार, बदन दर्द, दाने ठीक हो जायेंगे।

कब्ज़ – इसका मूलार्क दस बूंद पाँच चम्मच पानी में मिलाकर नित्य तीन बार कुछ दिन दें।

दस्त – दस्तों में मोमोर्डिका कैरण्टिया 6 शक्ति में पाँच बार दें। दस्तों में इसके लक्षण हैं – मल धड़ाके से निकलना, अकड़न, प्यास, अवसन्नता, मल पीला-सा, हैजे के से लक्षण।

स्तन वृद्धि के लिए मूलार्क दस बूंद, पाँच चम्मच पानी में मिलाकर नित्य तीन बार पियें। इसका एक भाग पाँच भाग नारियल के तेल में मिलाकर सोते समय स्तनों पर मालिश करें।

सेवन विधि – होम्योपैथिक दुकान से यह दवा मूलार्क (मदर टिंचर), 6 शक्ति (Potency) आधा औंस तरल लेकर यहाँ बतायेनुसार लें। 6 की तीन बूंदें, मदर टिंचर 5 बूंदें, पाँच चम्मच पानी में मिलाकर हर दो घंटे के अन्तर से 5 बार पियें।

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