Abies Canadensis (Pinus Canadensis) Uses In Hindi – जरायु का स्थान से हटना होम्योपैथिक दवा

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एबिस कैनेडैसिस ( पाइनस कैनाडैसिस) दवा का उपयोग

इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं- (1) भूख की अधिकता के साथ यकृत की मंद क्रिया (2) जरायु का अपने स्थान से हटना (3) गाजर, शलजम व आचार खाने की इच्छा (4) बेहद कमजोरी, रोगी हर समय लेटे रहना चाहता है (5) नसों में बर्फ की तरह ठण्डे रक्त का बहते हुए अनुभव होना (6) दायें कन्धों के व्लेड (scapula) में दर्द होना।

1. भूख की अधिकता के साथ यकृत की मंद क्रिया – पेट में खरोचने जैसी भूख लगती है। इस खुरचन के कारण रोगी भूख से ज्यादा खा जाता है, रोगी इतना खा जाता है कि उसे पता नहीं लगता कि कितना खा गया है। जिसके कारण पेट फूल उठता है और दबाव से हृदय की गति तेज होने लगती है। हृदय स्पंदन (Palpitation) होने लगता है। डा० क्लार्क का कथन है कि पाचन क्रिया पर इस औषधि का विशेष प्रभाव हैं।

2. जरायु का अपने स्थान से हटना – जरायु में अग्रभाग में हल्का-हल्का सा दर्द महसूस होता है जो चलने से या दबने के कारण दबाव पड़ने से कम हो जाता है। गर्भाश्य कोमल तथा कमजोर अनुभव होता है। जरायु के अपने स्थान से हटने पर इसका प्रयोग लाभकारी है।

3. गाजर, शलजम व आचार खाने की इच्छा – रोगी को शलजम, गाजर, आचार व मोटा अन्न खाने की प्रबल इच्छा होती है। अगर किसी रोग में रोगी को ठण्ड लगे, बेहद प्रबल इच्छा हो, तो इस औषधि से विशेष लाभ होगा।

4. बेहद कमजोरी, रोगी हर समय लेटे रहना चाहता है – रोगी अपने सारे शरीर में बेहद कमजोरी महसूस करता है, हर समय लेटे रहने को जी चाहता है, जिसके कारण रोगी बहुत सुस्त रहने लगता है। यह सुस्ती जेलसेमियम में भी पायी जाती है, परन्तु इन दोंनों की सुस्ती तथा कमजोरी में भेद है। रोगिणी खान पान के कुपोषण के कारण जरायु के स्थानच्युति के कारण कमजोरी महसूस करती है, परन्तु जेलसेमियम की क्रिया मस्तिष्क और अनुभवशक्ति पर होती है।

5. नसों में बर्फ की तरह ठण्डे रक्त का बहते हुए अनुभव होना – रोगी सर्दी से कांपता है। हाथ तथा त्वचा ठंडी हो जाती है। ज्वर में रोगी ऐसा अनुभव करता है मानो नाडियों में बर्फ की तरह ठंडा रुधिर बह रहा है। पीठ में ऊपर से नीचे की तरफ ठंड चलती है।

6. दायें कन्धे के ब्लेड (scapula) में दर्द होना – दांये कन्धे के ब्लेड में दर्द होता है इस औषधि का यह एक प्रमुख लक्षण है। चैलिडोनियम में भी दाये कन्धे के ब्लेड में दर्द होता है। इस प्रकार का दर्द बाएं कन्धे की फलास्थि में हो, तो औग्जेलिक एसिड पर ध्यान देना चाहिए, अगर दाये कन्धे की ब्लेड के नीचे के बिन्दू में पुराना दर्द हो, तो लाइकोपोडियम से लाभ होगा।

मात्रा – 30 व 200 शक्ति।

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