गुस्सा, क्रोध आने का होम्योपैथिक इलाज | Adhik Gussa Aane ka Homeopathic Dawa

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Adhik Gussa Aane ka Homeopathic Dawa: होम्योपैथी में मानसिक लक्षणों का विशेष महत्व है। अगर किसी रोग में शारीरिक लक्षणों के साथ प्रबल मानसिक-लक्षण जुड़ा हुआ हो तो शारीरिक-लक्षण की अपेक्षा भी मानसिक-लक्षण को आधार बनाकर औषधि का चुनाव किया जाता है, क्योंकि होम्योपैथी का यह सिद्धांत है कि रोग की जड़ मन में है, शरीर में तो उस जड़ से उगे वृक्ष का रूप ही प्रकट होता है। अगर जड़ कट गई तो वृक्ष अपने-आप सुख जाता है। इसी विचार को आधार में रखकर हम यहाँ कुछ प्रबल मानसिक-विकारों की
औषधियाँ दे रहे हैं जो मन के विकारों को दूर कर मानसिक-रोगों को तो दूर करती ही हैं, साथ ही मानसिक-विकार को दूर कर शारीरिक-रोग को भी दूर कर देती हैं।

ऐसे में इस लेख में हम अत्यधिक गुस्सा, क्रोध आने की समस्या का होम्योपैथिक दवा को जानेंगे, तो आइये समझते हैं :-

कैमोमिला – यह बच्चों के गुस्से की मुख्य दवा है। बच्चा हर चीज को लेने के लिये चिल्लाता है, परन्तु जब उसे वह चीज दी जाती है तो परे फेंक देता है; बच्चा चिल्लाता-चिल्लाता तभी शान्त होता है जब उसे गोद में ले लिया जाता है, जब तक गोद में रहता है तभी तक शान्त रहता है। क्रोध से उसे दस्त आ सकता है, खाँसी आ सकती है, ऐंठन पड़ सकती है। जो बच्चा मानसिक-दष्टि से शान्त-प्रकृति का हो, उसके लिये यह औषधि किसी काम की नहीं। क्रोधी, चिड़चिड़े बच्चे को इस औषधि की 1000 शक्ति की एक मात्रा 15-20 दिन में एक बार देने से वह शान्त रहता है।

स्टैफिसैग्रिया – दूसरे लोग उसके विषय में क्या कहते हैं इसकी अत्यन्त पर्वाह करना; अचानक अत्यधिक गुस्सा हो जाना; गुस्से में आगे-पीछे फिरना। बच्चा हर चीज को लेने के लिये चिल्लाता है, परन्तु जब उसे वह चीज दे दी जाती है तो क्रोध से दूर फेंक देता है, बिल्कुल कैमोमिला की तरह; क्रोध तथा अपमान के कारण अगर कोई रोग उत्पन्न हो जाये, जैसे सिर दर्द या दस्त तो उसे यह दवा ठीक कर देती है। क्रोध तथा अपमान के दुष्परिणामों के लिये यह औषधि विशेष उपयोगी है।

नक्स वोमिका – रोगी विरोध को सहन नहीं कर सकता, बदला लेने को तत्पर हो जाता है, बड़ा चिड़चिड़ा होता है। अपने सामने किसी रुकावट को बर्दाश्त नहीं कर सकता। आदमी की रुकावट तो क्या, अगर उसके मार्ग में कुर्सी आ जाती है, तो उसे आराम से हटाने के बजाय झुंझलाहट में लात मार कर दूर फेंक देता है। कैमोमिला तथा स्टैफिसैग्रिया में भी झुंझलाहट और गुस्सा है, परन्तु नक्स के सामने ये दोनों फीके पड़ जाते हैं।

लाइकोपोडियम – मानसिक-लक्षणों में नक्स तथा लाइको बहुत-कुछ एक-जैसे हैं, दोनों पतले-दुबले, जरा-से में पारा चढ़ जाता है, परन्तु क्रोध के सम्बन्ध में इनमें भेद यह है कि नक्स का गुस्सा तब जाहिर होती है जब कोई दूसरा उसके नजदीक झगड़ने आये, लाइको तो खुद लोगों से झगड़ा मोल लिया करता है। लाइको के मरीज़ की तुलना उस व्यक्ति से की गई है जो डंडा लिये फिरता है कि किस व्यक्ति पर प्रहार करे।

आयोडियम – एकदम क्रोध का आवेग उमड़ आता है कि उठे और अपने विरोधी की हत्या कर दे या जो-कोई भी सामने आये उसी को स्वर्ग पहुँचा दे। उसे वर्तमान-काल की परेशानी से मतलब होता है, भविष्य से उसका कोई सम्बन्ध नहीं होता। भविष्य में क्या होगा, क्या नहीं इससे कोई मतलब नहीं, वह वर्तमान में जीता है।

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