निमोनिया का एलोपैथिक चिकित्सा [ Allopathic Medicine For Pneumonia In Hindi ]

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यह एक विशेष प्रकार का ज्वर है, जिसमें फेफड़े शोथयुक्त हो जाते हैं और रोगी की छाती में दर्द होता है। कष्टदायक खाँसी के साथ गाढ़ा, चिपचिपा झागयुक्त बलगम निकलता है । साँस कठिनाई से तथा जल्दी-जल्दी आती है । साँस लेते समय नाक के नथुने फूलते हैं । बार-बार प्यास लगती है। जिस ओर का फेफड़ा सूजा होता है, उस ओर का गाल अधिक गुलाबी हो जाता है। यह रोग न्यूमोकोक्कस (न्यूमोनिया के कीटाणु) के कारण हो जाता है, जो स्वस्थ मनुष्य के नाक में या मुँह में पाये जाते हैं। ज्वर 104 डिग्री फारेनहाइट तक चढ़ जाता है और कई बार इसी तापमान पर ज्वर 5 से 9 दिन तक रहता है, परन्तु सायं समय की अपेक्षा प्रात: समय ज्वर कुछ कम हो जाता है, फिर नवें दिन ज्वर उतर कर नाड़ी का तापमान और साँस सामान्य हो जाते हैं (कई बार ज्वर धीरे-धीरे उतरता है) । छाती में पीप पैदा हो जाने पर रोग पुराना होकर हर समय रोगी को मामूली ज्वर बना रहता है। याद रखें कि-शराबी, कमजोर तथा बूढ़े रोगियों और जिन लोगों को हृदय या वृक्क का रोग हो, उनके लिए यह रोग घातक सिद्ध हो सकता है ।

निमोनिया का एलोपैथिक दवा

यह एक भयानक रोग है जिसमें मृत्यु तक का भय रहता है, इसलिए रोगी की तुरन्त ही उचित चिकित्सा कराना आवश्यक है। बच्चों को होने वाले अनेक प्रकार के संक्रमण रोगों के साथ अथवा संक्रामक रोगों के बाद भी यह रोग हो जाया करता है। बच्चों को न्यूमोनिया की प्राथमिक अवस्था में धीमी तथा सूखी खाँसी की भी शिकायत होती है तथा साथ ही पतला गोंद की भाँति चिपचिपा श्लैष्मा (कफ) भी निकलता है। रोगी को हवादार कमरे में रखें, परन्तु ठण्डी हवा के झोकों से बचायें ।

• फोर्टीफाइड पेनिसिलीन 4 लाख यूनिट 2 मि.ली. दिन में दो बार माँस में वयस्कों को इन्जेक्शन लगायें, इसके बाद 24 घण्टों में एक ही इन्जेक्शन लगाते रहें । इसके साथ ही टेट्रासायक्लिनं हाइड्रोक्लोराइड जैसे – पेटेण्ट नाम (रेस्टेक्लिन कैप्सूल निर्माताः साराभाई) 250 मि.ग्रा. का एक कैपसूल सोडा-बाई-कार्ब मिले जल से प्रत्येक 6-6 घण्टे पर खिलाते रहना लाभकारी है । (बच्चों को इसी दवा का शर्बत पिलायें) ।

• कैम्पीसिलीन (कैडिला कम्पनी) – यह पेटेण्ट दवा एम्पीसिलीन एनहाइड्रस पदार्थ से निर्मित है तथा मुख से प्रयोग के लिए इसके 250 व 500 मि.ग्रा. के कैप्सूल, ड्राई सीरप तथा रोग की तीव्रावस्था में माँस में लगाने के लिए 100, 250, 500 मि.ग्रा. के इन्जेक्शन मिलते हैं, जिनमें यथोचित मात्रा में वाटर फॉर इन्जेक्शन भली-भांति घोलकर माँस में लगाया जाता है ।

नोट – पेनिसिलीन के अतिसुग्राही रोगियों में इसका प्रयोग कदापि न करें ।

• बैक्ट्रिम (निर्माता : रोश) – न्यूमोनिया और कीटाणुओं से उत्पन्न दूसरे रोगों को यह दवा दूर कर देती है । एक टिकिया खिलाते ही रोग कम होने लगता है । दूसरी टिकिया 12 घण्टे बाद खिलायें । बच्चों को उनकी आयु के अनुसार चौथाई से आधी छोटी टिकिया पीसकर मधु या शर्बत में मिलाकर खिलायें । इस दवा के प्रयोग से प्रत्येक प्रकार का न्यूमोनिया रोग दूर हो जाता है। (इन्जेक्शन लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है) । ज्वर अधिक बढ़ जाने पर सिर पर बर्फ की थैली रखें, खाँसी के कष्ट होने पर ‘पिरिटान एक्स पेक्टोरेण्ट’ (ग्लैक्सो) आधी-आधी चम्मच चटाते रहें । यदि रोगी की छाती में दर्द हो तो डोलोपार (माइक्रो लैब्स) 1 से 2 टिकिया दिन में 3-4 बार दें । बच्चों के लिए इस औषधि का शर्बत आता है। बच्चों को 2-5 से 5 मि.ली. तथा वयस्कों को 10 मि.ली. दिन में तीन बार सेवन करायें ।

नोट – वृक्क या यकृत की विकृति में बड़ी सतर्कता से इसका प्रयोग करें ।

• रोगी को रात को नीद न आने पर (लार्जेक्टिल निर्माता : मे एण्ड बेकर) प्रयोग करें ।

• छाती पर एण्टीफ्लोजेस्टिन अथवा लिनिमेण्ट टर्पेनटाईन की मालिश करें ।

• जिन बच्चों को बार-बार न्यूमोनिया हो जाता हो उनको शार्क लीवर ऑयल उचित मात्रा में सेवन कराते रहना और इसी तेल की पीठ व छाती पर मालिश करते रहना शत-प्रतिशत लाभकारी है । न्यूमोकोक्कस वैक्सीन आधी से 1 मि.ली. का चर्म के नीचे प्रतिदिन इन्जेक्शन लगाना भी गुणकारी है ।

नोट – अन्य औषधियों में-सल्फाडायजीन टैबलेट (एम. बी.) इन्जेक्शन, पेनिसिलीन जी सोडियम दो लाख यूनिट, टेरामायसिन कैपसूल (फाइजर कंपनी), इन्जेक्शन डाइक्रिस्टीसिन (साराभाई कंपनी) बच्चों को इसी नाम से पेडियाट्रिक इन्जेक्शन आता है । ओरिसूल टिकिया, सुबामायसिन कैपसूल (डेज कंपनी), एक्रोमायसिन कैपसूल (सायनेमिड कंपनी), एमौक्सीसिलीन ड्राई सीरप (एलेम्बिक कंपनी), एम्पीलोक्स कैपसूल व ड्राई सीरप (बायोकैम कंपनी), एम्पीसिन इन्जेक्शन व कैपसूल (सिपला क.), नोवाक्लोक्स कैप्सूल व सीरप, ब्लूसिलीन पी टैबलेट (ब्लूक्नोस कम्पनी) फेक्सिन कैप्सूल व सीरप (ग्लैक्सो क.), सेफ टेबलेट व ड्राई सीरप (लुपिन कम्पनी) सेफामेजिन इन्जेक्शन (रैलीज कम्पनी) सेफाक्सोन कैपसूल (बायोकैम कम्पनी), सेसपोर कैपसूल (बिनमेडिकेयर कम्पनी), सिडोमोक्स कैपसूल (राऊसैल कम्पनी) इसका ड्राई सीरप भी आता है । डानेमोक्स किड टैबलेट (सोल) जेन्टारिल इन्जेक्शन (एलकैम), जेण्टीसिन इन्जेक्शन (निकोलस क.), क्लौक्स कैपसूल (लायका कम्पनी), लामोक्सी बी एक्स कैपसूल (लायका कम्पनी), लिनकोसिन कैपसूल (वालेंस कम्पनी) का भी रोगानुसार एवं आयु के अनुसार मात्रा का निर्धारण कर उपयोग करना लाभकारी है ।

न्यूमोनिया में सल्फोनामाइड और पेनिसिलीन को एक साथ उचित मात्रा में देने से अच्छा लाभ होता है । साथ में मल्टीविटामिन भी प्रयोग कराना चाहिए । आवश्यकता पड़ने पर रोगी को एनिमा दिया जा सकता है । रोगी को साफ-स्वच्छ वातावरण में रखें तथा उसे उत्तेजित होने से बचायें । ठण्ड लग जाने से बच्चों की पसलियाँ चलना खतरनाक होता है । यदि पसलियाँ गर्मी के कारण चलने लगें तो अधिक खतरनाक नहीं होता है, यह ठण्डे उपचार से ठीक हो जाता है । हींग को पानी में घोलकर हल्का गरम करके पसलियों, पेट तथा हाथ-पाँव में मलना अथवा केसर को पानी में घोलकर गरम करके नाक तथा कनपटी पर लगाना परम गुणकारी है । सरसों के तेल में जायफल घिसकर पसलियों पर लेप करने से भी लाभ होता है। अमलतास को आग में भून लें और उसके उपरान्त उसका गूदा 4 माशा की मात्रा में सेंधा नमक मिलाकर घोलकर पिला देने से भी बच्चों की पसलियाँ चलना बन्द हो जाती हैं। सरसों के तेल में अफीम मिलाकर पसलियों पर लेप करना भी लाभकारी है। न्यूमोनिया में आयुर्वेद की पेटेण्ट औषधि ‘कस्तूर मित्रा’ (झण्डु कम्पनी) टैबलेट का प्रयोग तथा ह्वीपेक्स लिक्विड (चरक कम्पनी) का महत्वपूर्ण स्थान है ।

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