ब्लड टेस्ट (सीबीसी) की सम्पूर्ण जानकारी [ Basics of Blood Test in Hindi ]

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रक्त टेस्ट जिसे हम बोल चाल की भाषा में ब्लड टेस्ट भी कहते हैं, एक आम टेस्ट है जो हमारे स्वास्थ्य पर असर डालने वाले कुछ विकारों के लिए खून का टेस्ट करता है। आइए इस बारे में विस्तृत जानकारी लेते हैं।

कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट (Complete Blood Count Test)

कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट (सीबीसी) यह निर्धारित करता है कि हमारे शरीर के रक्त कोशिकाओं में बढ़ोतरी हुई है या नहीं। किसी व्यक्ति की उम्र एवं उसके लिंग के आधार पर सामान्य गिनती में अंतर आ सकता है। सीबीसी के रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह हमें रक्त कोशिकाओं की सामान्य गिनती बताती है।

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सीबीसी कई शारिरिक समस्याओं का हल ढूंढने में मददगार साबित होता है, जैसे – एनीमिया, कैंसर इत्यादि।

व्यक्ति के शरीर में रक्त कोशिकाओं के स्तर में परिवर्तन को मापने के लिए चिकित्सक व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं उसके विकारों का पता लगा सकता है। आपको बता दें कि यह टेस्ट मुख्य तीन प्रकार की रक्त कोशिकाओं को मापता है :-

लाल रक्त कोशिकाएं

लाल रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाती है और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालती है। सीबीसी व्यक्ति के लाल रक्त कोशिकाओं के दो घटकों को मापता है।

  • हीमोग्लोबिन – शरीर में ऑक्सीजन ले जाने वाले प्रोटीन
  • हेमाटोक्रिट – रक्त में लाल रंग के रक्त कोशिकाओं का प्रतिशत

आपको बता दें कि शरीर में हीमोग्लोबिन और हेमाटोक्रिट का कम होना एनीमिया का लक्षण होता है। एनीमिया खून में आयरन की कमी से होता है।

सफेद रक्त कोशिकाएं

सफेद रक्त कोशिकाओं का कार्य होता है व्यक्ति के शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करना। सीबीसी व्यक्ति के शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं एवं उनके प्रकारों को मापता है। आपको यह भी जानना जरुरी है कि यदि शरीर से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है या घटती है तो यह कैंसर का संकेत भी हो सकता है।

ब्लड प्लेटलेट्स – प्लेटलेट्स शरीर के खून के थक्के और ब्लीडिंग को नियंत्रित करता है। आपको बता दें कि जब किसी घाव से खून का निकलना बंद हो जाता है, तो इसका मतलब है कि प्लेटलेट्स अपना कार्य सुचारू ढंग से कर रहे हैं। प्लेटलेट्स में आने वाली किसी भी बदलाव से खून बहने का ख़तरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में गंभीर चिकित्सा करवाना पड़ सकता है।

ब्लड टेस्ट क्यों किया जाता है ?

चिकित्सक नियमित जांच के लिए सीबीसी टेस्ट कराने के लिए कहते हैं। यदि व्यक्ति को ऐसे लक्षण हैं जिसका पता सामान्य जांच से संभव नहीं है तो भी सीबीसी टेस्ट करवाने के लिए कहा जाएगा। जैसे – किसी अंग से खून निकलना, या चोट का कारण पता न चलना।

सीबीसी टेस्ट कैसे मददगार साबित होती है ?

  • सम्पूर्ण स्वास्थ्य की जांच – व्यक्ति के स्वास्थ्य की जांच के लिए सीबीसी उपयोगी होता है। यह डॉक्टर को व्यक्ति के स्वास्थ्य की एक अच्छी तस्वीर देता है। इसके मदद से डॉक्टर कुछ बीमारियों के होने के जोख़िम का अंदाज़ा भी आसानी से लगा पाते हैं।
  • किसी चल रही बीमारी पर नज़र रखना – यदि व्यक्ति को कोई स्वास्थ्य समस्या है तो उसपर नियमित रूप से नज़र रखने के लिए डॉक्टर सीबीसी टेस्ट कराने के लिए कहते हैं। यह ख़ास तौर पर तब होता है जब व्यक्ति को एक ऐसी समस्या हो जो रक्त कोशिकाओं की संख्या को प्रभावित करता है।
  • किसी बीमारी का निदान – किसी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या का निदान करने के लिए भी डॉक्टर सीबीसी टेस्ट करवाने के लिए कहते हैं। इसके अलावा व्यक्ति को कोई ऐसा लक्षण है जो पता नहीं चल पा रहा हो तो ज्यादा जानकारी के लिए भी सीबीसी उपयोगी होता है। जैसे – थकान, बुख़ार, लालिमा, सूजन, चोट या रक्तस्राव इत्यादि।

खून जांच से पहले

जब आप खून की जांच करवाने जाएं तो हाफ बाजू के कपड़े पहनकर जाएं, या फिर ऐसे बाजू के कपड़े जिसे आप आसानी से फोल्ड कर सकें।

आमतौर पर कोई व्यक्ति सीबीसी के टेस्ट से पहले सामान्य तौर पर खा और पी सकता है। हालांकि व्यक्ति के स्थिति के अनुसार जांच के कुछ समय पहले डॉक्टर उसे कुछ न खाने या पीने को बोल सकते हैं। अगर व्यक्ति के ब्लड सैम्पल का उपयोग कुछ अन्य टेस्ट करने के लिए होना है तो यह सामान्य बात होती है।

रक्त परीक्षण के दौरान

सीबीसी यानि रक्त परीक्षण के दौरान Lab Technician हाथ या बाजू की नश से खून का सैम्पल निकालता है। इस पूरी प्रक्रिया में चंद मिनट ही लगते हैं। इस दौरान Lab Technician का मुख्य काम होता है:-

  • व्यक्ति की त्वचा को एंटीसेप्टिक पट्टी से साफ करना।
  • व्यक्ति की ऊपरी बांह के आस पास एक बैंड बांधना। ऐसा इसलिए की जिस नस से खून का सैम्पल लेना है, वो नस आसानी से फूलकर सूझ जाए और उभरा हुआ दिखने लगे। ताकि सैम्पल लेने में कोई कठिनाई न हो।
  • इसके बाद Lab Technician व्यक्ति की नस में सुई को डालकर सैम्पल लेगा और उसे एक या एक से अधिक कंटेनर में स्टोर करेगा।
  • इसके बाद बैंड को हटा दिया जाएगा।
  • यदि बैंड निकाल देने पर भी खून बंद नहीं होता है तो उसे रोकने के लिए पट्टी या बैंड-एड लगाया जाता है।
  • इसके बाद सैम्पल की शीशी पर नाम लिखकर उसे प्रयोगशाला में भेज दिया जाता है।
  • अधिकांश सीबीसी के परिणाम, टेस्ट के कुछ ही घंटों के भीतर आ जाते हैं।

*ब्लड टेस्ट के क्या-क्या जोखिम होते हैं*

आपको बता दें कि ब्लड टेस्ट के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं, लेकिन कुछ परेशानियां हो सकती हैं। जैसे –

  • जिस जगह सुई लगाई जाती है उस जगह एक छोटा घाव हो सकता है, लेकिन वो जल्दी ठीक हो जाता है।
  • टेस्ट के दौरान खून देखने पर कुछ लोगों को चक्कर आ जाता है, या कभी कभी सिर में भारीपन भी महसूस होता है।
  • यह परीक्षण थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है। टेस्ट के दोरान सुई व्यक्ति की त्वचा में जाती है तो एक चुभन महसूस हो सकती है।

ब्लड टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है ?

व्यक्ति की रक्त कोशिकाओं के गणना के आधार पर टेस्ट के परिणाम अलग अलग हो सकते हैं। उदहारण के लिए:-

  • लाल रक्त कोशिका – (महिलाओं में- 39.0 – 50.3 लाख कोशिकाएं/एमसीएल) (पुरुषों में – 43.2 – 57.2 लाख कोशिकाएं/ एमसीएल)
  • हीमोग्लोबिन – (महिलाओं में- 120 – 155 ग्राम/ली) (पुरुषों में – 135 – 175 ग्राम/ली)
  • हिमेटोक्रिट – (महिलाओं में – 34.9 – 44.5 प्रतिशत) (पुरुषों में – 38.8 – 50.0 प्रतिशत)
  • सफेद रक्त कोशिकाओं की गणना – 35000 – 10,500 कोशिकाएं/ एमसीएल
  • प्लेटलेट्स की गणना – 150,000 से 450,000/ एमसीएल

ऐसा मुश्किल होता है कि सीबीसी के परिणाम के आधार पर हमेशा ही कुछ निश्चित कहा जा सके। रक्त कोशिकाओं में मौजूद अधिक या कम गिनती कई बार, कई तरह की बीमारियों के भी संकेत देते हैं। समस्या की पुष्टि करने के लिए कुछ विशेष तरह की परीक्षणों की जरुरत होती है। कुछ समस्यओं के उदहारण इस प्रकार हैं :-

  • दिल की बीमारी
  • बोन मैरो की समस्या
  • कैंसर
  • संक्रमण या सूजन
  • दवा का साइड इफेक्ट्स
  • ब्लीडिंग डिसऑर्डर
  • आयरन या अन्य विटामिन या खनिज की कमी
  • प्रतिरक्षा विकार

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नोट – यदि व्यक्ति का सीबीसी असामान्य स्तर दिखता है तो व्यक्ति को डॉक्टर के द्वारा एक और रक्त परीक्षण कराने को कहा जा सकता है। इस स्थिति का निदान, या निदान की पुष्टि करने में सहायता लेने के लिए कुछ अन्य परीक्षण कराने को भी कहा जा सकता है।

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