Caesalpinia Bonducella Uses, Benefits, Side effects In Hindi

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इसका अंग्रेजी नाम – Caesalpinia Bonducella है। हिंदी नाम – कटकरंज है। इसके पेड़ में काले रंग का काँटा रहता है। यह दो प्रकार का होता है – छोटा व बड़ा। साधारणत: बड़े कटकरंज का पेड़ ही औषध स्वरूप उपयोग होता है। क्विनाइन का प्रचलन होने के पहले बंगाल में ज्वरघ्न औषघ के रुप में उपयोग होता था। कलकत्ता के मेडिकल कॉलेज के एक विख्यात डॉ ० आर ० सी० चन्द्र अपने वार्ड में उक्त कटकरंज का बीज ज्वरघ्न औषध के रूप में दिया करते थे, उसका नाम था – ब्लैकपिल। आसाम के गौरीपुर के डॉ ० कालीकुमार भट्टाचार्य महाशय ने स्वस्थ शरीर में इसकी परीक्षा कर व इसका नाम ‘क्विनिया इण्डिका‘ कह होमियोपैथिक की एक मासिक पत्रिका में विवरण प्रकाशित किया था। परीक्षा के बाद सभी लक्षण प्रकाशित हुए और वे ही इसके चरित्रगत लक्षण हैं।

(1) ज्वर – ज्वर के समय की कोई स्थिरता नहीं है, कभी दोपहर के पहले शीत व कम्प देकर ज्वर आता है, किसी दिन शाम में मामूली शीत लगकर ज्वर होता है ( 102-103 डिग्री चढ़ता है), कभी या तो रात के अन्त में ज्वर आता है। ज्वर – परिवर्त्तनशील, ज्वर प्राय: शीत व कम्प देकर आता है। उष्णावस्था में – प्यास, पसीनेवाली दशा – थोड़ी देर तक स्थायी होती है, मुँह, छाती, कान, गला, गर्दन पर बूँद-बूँद पसीना होता है। एक घंटा से अधिक ज्वर नहीं रहता। सवेरे 8 से 10 व दोपहर में 2 से 4 के अन्दर ज्वर आता है। दोपहर काल के ज्वर में प्यास नहीं रहती। जो ज्वर मैलेरिया की तरह होता है फिर भी क्रमानुसार 2-3 दिनों तक 100 डिग्री से नीचे नहीं उतरता, उसमें और ज्वर के घटे रहने की हालत में अथवा समान रूप से ज्वर रहने की दशा में – क्विनिया 3x के प्रयोग से फायदा होता है। इसमें ज्वर छूटने के बाद दुर्बलता, सदैव सोये रहने की इच्छा, आँखें बन्द कर पड़े रहना इत्यादि लक्षण सब रहते हैं।

(2) यकृत का नीचे की ओर बढ़ना; ज्वर आने के पहले किसी-किसी दिन यकृत में अशान्ति व दर्द का अनुभव होना, प्लीहा कड़ी व बढ़ी, कभी-कभी दर्दमय

(3) उदर व निम्नोदर गड़गड़ाना, कमी-कमी लसदार आँव मिला पतला मल।

(4) आँख – ज्वर आने के पहले से और पहले के ज्वर भोगकाल में आँख मानो जली जा रही है इस प्रकार का जलन होना, ठण्डा जल देने पर अच्छा लगता है, आँखें रक्तशून्य व बैठी-बैठी।

(5) मस्तक – सिर के दोनों तरह ज्वर काल में भयानक दर्द, दबाने पर आराम मालूम होना।

(6) जीभ – जीभ के ऊपर मामूली सफ़ेद लेप, जीभ भींगी, किन्तु प्यास रहती है।

क्रम – Q, 3x शक्ति।

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