कोलीन (Choline) का प्रयोग और लाभ

670

यह विटामिन भी बी-कॉम्प्लेक्स समूह का सदस्य है । यकृत में वसा (चर्बी) एकत्र होने के कार्य पर इसका एक विशिष्ट प्रभाव पड़ता है और शरीर को उत्तम लाभ पहुँचाता है । यही कारण है कि यकृत रोगों में इनोसिटोल (inositol) के साथ इसका प्रयोग गुणकारी होता है ।

आहार में कोलीन का महत्त्व सर्वप्रथम ‘बैस्ट’ ने 1932 में प्रस्ताविक किया। उसने प्रयोगों के द्वारा यह दिखलाया कि अधिक वसायुक्त आहार के साथ यदि कोलीन भी दी जाये तो चूहों के यकृत में वसा अधिक मात्रा में एकत्रित नहीं हो पाती है। इसी आधार पर ‘कोलीन’ को लाइपो-ट्रॉपिक फैक्टर (lipotropic factor ) कहा गया । आहार पदार्थों में कोलीन मुख्यत: अण्डों, माँस, दालों और अन्न तथा दुग्धवर्ग में पाया जाता है। कोलीन की उपस्थिति यकृत कोषों में वसा का संचय नहीं होने देती है। आहार में कोलीन की कमी होने पर यकृत कोषों में वसा का अधिक मात्रा में संचय होने लगता है । यह स्थिति दीर्घकालीन होने पर यकृत में फाइब्रोसिस और सिरोसिस के परिवर्तन होने लगते हैं । कोलीन का उपयोग विषाक्त दशाओं में यकृत की रक्षा के निमित्त किया जा सकता है। यकृत रोगों में विटामिन ‘इ’ व बी कॉम्प्लेक्स (विशेषकर बी-12) के साथ इसका प्रयोग अधिक लाभकारी सिद्ध होता है ।

Ask A Doctor

किसी भी रोग को ठीक करने के लिए आप हमारे सुयोग्य होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। डॉक्टर का consultancy fee 200 रूपए है। Fee के भुगतान करने के बाद आपसे रोग और उसके लक्षण के बारे में पुछा जायेगा और उसके आधार पर आपको दवा का नाम और दवा लेने की विधि बताई जाएगी। पेमेंट आप Paytm या डेबिट कार्ड से कर सकते हैं। इसके लिए आप इस व्हाट्सएप्प नंबर पे सम्पर्क करें - +919006242658 सम्पूर्ण जानकारी के लिए लिंक पे क्लिक करें।

Loading...

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Open chat
1
💬 Need help?
Hello 👋
Can we help you?