दाद को जड़ से साफ करने का 51 घरेलू उपाय – दाद की चिकित्सा

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दाद का कारण – दाद रोग एक प्रकार की फफूँदी के कारण उत्पन्न होता है। इस रोग के कीटाणु बालों की जड़ों पर आक्रमण करते हैं तथा शरीर और कपाल – दोनों के चर्म को प्रभावित कर सकते हैं। यह रोग वस्त्रों और अन्य वस्तुओं के स्पर्श द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचता है। यह संक्रमण रोग शरीर, कपाल, पैरों या जाँघ व दाढ़ी में होता है।

दाद का लक्षण – प्रारम्भ में 2-3 सेण्टीमीटर परिधि का एक लाल चकत्ता त्वचा पर पड़ जाता है। यह पास की त्वचा से कुछ उभरा हुआ गुलाबी रंग का होता है जो कि किनारों से फैलता जाता है।

दाद का इलाज घरेलू/आयुर्वेदिक/जड़ी-बूटियों द्वारा

(1) नीला थोथा तथा फिटकरी को आग में भून कर पीस लें। उसमें नींबू का रस मिलाकर दाद पर लेप करने से पुराना दाद भी मिट जाएगा।

(2) नौसादर को पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाकर दाद पर कुछ दिन लगाने से दाद मिट जायेगा।

(3) अमलतास के पत्तों का रस दाद पर लेप करने से दाद मिट जाता है।

(4) तीस ग्राम बेल की पत्तियाँ तथा पाँच ग्राम कपूर को पीसकर, उसमें दाद धोने से लाभ होता है।

(5) दाद पर सुहागा, जायफल, गंधक को नींबू के रस में रगड़कर लगाने से लाभ होगा।

(6) ढाक के बीजों को पीसकर कुछ दिन दाद पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

(7) सहिजन की जड़ की छाल को पीसकर सरसों के तेल में पका लें, इस तेल को दाद पर लगाएँ लाभ होगा।

(8) बबूल के फूलों को पीसकर सिरके में मिलाकर दाद पर लगाने से दाद जड़ से चला जाता है।

(9) दाद पर गुलाब के अर्क में नींबू का रस मिलाकर लेप करें।

(10) पुराने दाद पर अनार के पत्तों को पीसकर लेप करें।

(11) फिटकरी आँवला सार-गन्धक, कत्था, कच्चा सुहागा, मिश्री-सभी 10-10 ग्राम लें। सबका चूर्ण लेकर उसको एक कप नींबू के रस में खरल कर लें। महीन होने पर बड़े चने के बराबर गोलियाँ बना लें। दाद जैसे कठिन चर्मरोग को खुजला कर सूखा करें और गोली पानी में घिसकर लगा दें।

(12) लहसुन के रस को दाद के स्थान पर मलने से आशातीत लाभ होता है।

(13) शरीर के जिन अंगों पर दाद हो, वहां बडी हरड़ को सिरके में घिसकर लगाएं। तुरंत लाभ होगा।

(14) काले चने को पानी से पीसकर उसमें शहद मिलाकर लगाएं कुछ दिनों में दाद साफ हो जाएगा।

(15) पुदीने का रस दाद पर बार-बार लगाने से दाद साफ हो जाता है।

(16) नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उससे दाद को रगड़ कर धोएं। इससे दाद दूर हो जाता है।

(17) 5 ग्राम कपूर और 1 ग्राम गंधक को थोड़े से मिट्टी के तेल में खरल करके मलहम बना लें। इसे सुबह-शाम दाद पर लगाएं।

(18) एलोवेरा के बीज को छाछ में पीसकर लगाने से भी आराम मिलता है।

(19) इमली के बीज को नींबू के रस में पीसकर लगाने से कुछ ही दिनों में दाद ठीक हो जाते हैं।

(20) ग्वार के पत्तों का रस लहसुन के रस के साथ मिलाकर लगाने से दाद से छुटकारा मिलता है।

(21) दही के अन्दर पन्चार के बीज को सड़ा दें और उसे बारीक पीसकर 6-7 दिन तक लगायें। इससे दाद जाती रहेगी।

(22) नींबू के रस में ढाक का बीज पीसकर पतला लेप करें। इससे कष्ट जरूर होगा, किन्तु दाद जड़ से समाप्त हो जायेगा।

(23) दाद के ऊपर तीन-चार दिन तक दुधी का दूध लगाएं इससे दाद खत्म हो जायेगा।

(24) लोहे के बर्तन में सुहागे को भूनकर, पीसकर घी में मिलाकर दाद के ऊपर हल्का लेप करें ताकि फफोले पड़े इससे दाद जल जायेगा।

(25) आक का दूध लगाने से दाद बहुत जल्द साफ हो जाता है।

(26) माजूफल गुलाब में घिसकर दाद पर लगायें।

(27) माजूफल, फिटकरी, सुहागा, बारबार लें। कूट कर जल की भावना से गोलियाँ बना लें। गोलियों को पानी में घिसकर दाद पर लगाएं।

(28) नींबू, तुलसी, लहसुन इनमें से किसी का भी रस दाद पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

(29) आंकड़े का दूध दाद पर लगायें।

(30) नारियल के खोपरे को जलाकर राख को तेल के साथ मिलाकर दाद पर लगायें।

(31) 10 चम्मच सरसों के तेल में 1 ग्राम सुहागा तथा 10 चम्मच चूने का पानी मिलाकर दाद पर लगाना चाहिये। यह शतशो बार अनुभूत है।

(32) माजूफल, एक दाना, गंधक, सुहागा, सफेद राल, प्रत्येक 2-2 ग्राम सबको पीसकर गोलियाँ बनायें। फिर पानी में धिस कर दाद पर लगायें।

(33) नीबू के रस में राल, सुहागा, गन्धक, तीन-तीन ग्राम चार पहर तक कड़ाही में घोटें। फिर बेर के बराबर गोलियाँ बना लें। इसे तीन दिन तक बराबर लगायें।

(34) सर्जिक्षार 2 ग्राम, चूना 1 ग्राम, पानी में पीसकर लगायें।

(35) नौसादर 10 ग्राम, सुहागा 10 ग्राम, पारा 10 ग्राम मिलाकर गाय के घी में लगायें।

(36) सनाय 2 ग्राम, सिरका 6 ग्राम पीसकर लगायें। तीन दिन नमक, मिर्च का सेवन न करें।

(37) गाय का दूध 125 ग्राम, घी 101 बार पानी में धोवें। उसमें आँवला सार, गंधक 60 ग्राम मिलावें। उसे कागज पर लपेट लें। एक बर्तन में सुराख कर कागज को पीपाड़ी बनाकर रख दें। फिर कोयला भर कर तेल निकालें, उस तेल को दाद पर लगायें।

(38) तीन वर्ष पुराने सिंघाड़े को घिसकर दाद पर लगायें फिर ऊपर से नीबू का रस लगायें।

(39) लाल चन्दन, सुहागा, अफीम, आँवला सार गन्धक 2-2 ग्राम लें। फिर बेर के बराबर गोलियाँ बनाकर नीबू के रस में मिलाकर लगावें।

(40) दाद पर घी को मलें फिर चूने का पानी लगायें।

(41) हरसिंगार के फूलों को पीसकर उसकी लुगदी दाद पर लगायें।

(42) अमलतास की पत्तियों की लुगदी बनाकर दाद पर लगायें।

(43) पंवाड़ के बीज दही में सड़ाकर दाद पर लगायें।

(44) कुचला सिरके में घिसकर लेप करें।

(45) अनार का दूध दाद पर मलें।

(46) पारद को सिरके में घोटकर लेप करें।

(47) मेहन्दी की पत्तियों को सिरके में पीसकर लगायें।

(48) 10 ग्राम कपूर, तारपीन का तेल में घोटकर लगावें।

(49) गर्म पानी में कपड़े को भिगोकर दाद पर रगड़े फिर राई का लेप लगायें।

(50) माजूफल, सिरका में पीसकर लेप करें।

(51) सेम के पत्ते दाद की जगह पर मलें।

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