Curd Benefits In Hindi – दही के फायदे – दही खाने के लाभ

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प्रकृति – (तासीर) गर्म। दही दूध से ज्यादा गुणकारी होता है। दही में दूध से 18 गुणा कैल्शियम (चूना) अधिक पाया जाता है। जिन्हें दूध नहीं पचता, दही उनको भी पच जाता है। 80% दही खाने के बाद ही शक्ति में बदल जाता है।

दही में प्रोटीन की गुणवत्ता श्रेष्ठ होती है। दही जमने की प्रक्रिया में बी-विटामिनों, विशेषकर थायोमिन, रिबोफ्लाविन और निकोटेमाइड की मात्रा दुगुनी हो जाती है। दूध की अपेक्षा दही सरलता से पचता है। दूध के समान दही में भी खूब प्रोटीन और कैल्शियम होता है। जो दूध नहीं पचा पाते, उनके लिए भी दही सुपाच्य है।

हानिकारक – दमा, श्वास, खाँसी, कफ, शोथ, रक्तपित्त, ज्वर में दही न खायें। दही रात को नहीं खाना चाहिए।

अपच – दही में सेंककर पीसा हुआ जीरा, नमक और कालीमिर्च डालकर नित्य खाने से अपच ठीक हो जाता है। भोजन शीघ्र पच जाता है।

दस्त – 100 ग्राम बर्फी और 150 ग्राम दही, दोनों मिलाकर, सुबह-शाम खायें। दस्त बन्द हो जायेंगे। एक सेवा-भावी व्यक्ति ने अनेक बार लोगों को बताकर सफलता देखकर यह अपना अनुभूत नुस्खा बताया है। बच्चे व खाने वाले की क्षमतानुसार मात्रा घट-बढ़ा सकते हैं।

अम्लपित्त – अम्लपित्त में दही मीठा ही खायें। दही ज्यादा खट्टा नहीं होना चाहिए। ज्यादा खट्टा दही अम्ल या एसीडिटी बढ़ाता है तथा लेक्टिक अम्ल की अधिक मात्रा के कारण शरीर में सुस्ती व कमजोरी लाता है। दही, चावल और मिश्री मिलाकर सूर्योदय से पहले खाने से सूर्योदय के साथ बढ़नेवाला सिरदर्द ठीक हो जाता है। इसे कम-से-कम छ: दिन लें।

अर्श (रक्तस्रावी) – जब तक बवासीर में रक्त आता रहे तब तक केवल दही ही खाते रहें, अन्य कोई चीज न खायें। रक्तस्राव बन्द हो जायेगा।

शिशुओं का भोजन – दही, माँ के दूध के पश्चात् बालक का सर्वश्रेष्ठ आहार है। बुल्गारिया में जिन बच्चों को माँ का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता है, उन्हें दही दिया जाता है।

अाँतों की सूजन दूर करने के लिए दही का अधिकाधिक सेवन दिन में कई बार करें। रोटी कम-से-कम खायें। जब भूख लगे तब दही खायें।

पेचिश – दो चम्मच ईसबगोल की भूसी दही में मिलाकर नित्य तीन बार खायें। पहली खुराक सवेरे भूखे पेट खायें। पेचिश होने पर दही खाना लाभदायक है।

रोग-निरोधक – जो लोग नियमित रूप से दही का सेवन करते हैं उन्हें कई तरह के रोग नहीं होते। दही खाने से न तो हृदय-रोग दबोचने का साहस करता है और न तनाव सम्बन्धी रोग ही नजदीक आ पाते हैं।

दही खाने की विधि – दही खाने का सर्वश्रेष्ठ और लाभदायक तरीका यह है कि ताजा और मधुर स्वाद के दही में शक्कर और थोड़ा-सा पानी मिलाकर प्रात: कालीन भोजन के साथ प्रयोग किया जाए। दही में थोड़ा-सा जल अवश्य मिलाना चाहिए ताकि दही विकारमुक्त हो जाए। दही में शक्कर या शहद डालकर, मीठा करके खाने से इसके गुणों में वृद्धि हो जाती है।

दही का खट्टापन – दही खट्टा हो जाये तो उसे कपड़े में बाँधकर लटका दें। पानी टपक कर खट्टापन दूर हो जायेगा।

खुश्की – दही में शक्कर मिलाकर खाने से शरीर की खुश्की दूर होती है।

पित्त और धूप से होनी वाली शिथिलता – गर्मी के मौसम की बेचैनी दूर करने के लिए दही की लस्सी में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर पियें। इससे ताजगी और स्फूर्ति आयेगी।

मर्दाना शक्तिवर्धक – ताजा मीठा दही नित्य खाते रहें। बुढ़ापे तक मर्दाना शक्ति बनी रहेगी। उपदंश या आतशक भी ठीक हो जायेगा।

रक्तक्षीणता – दही की लस्सी नित्य पीते रहने से दुर्बलता दूर होती है। विचार सात्विक होते हैं। शरीर यौवन से परिपूर्ण रहता है। मस्तिष्क में चिड़चिड़ापन, क्रोध नहीं आता। मानसिक शान्ति रहती है। बेचैनी नहीं रहती।

हृदय-रोग, उच्च रक्तदाब, मोटापा तथा गुर्दे की बीमारियों में भी दही अत्यधिक लाभप्रद बताया गया है। हृदय तेज धड़कता हो, उच्च रक्तचाप हो, दिल डूबा-डूबा जाता हो, तो नित्य दही की लस्सी का एक गिलास पीने से लाभ होता है।

हृदय-रोगनाशक – दही हृदय-रोग की रोकथाम के लिए उत्तम वस्तु है। यह रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रॉल नामक घातक पदार्थ को मिटाने की क्षमता रखता है। कोलेस्ट्रॉल रक्तशिराओं में जमकर रक्तप्रवाह रोकता है जिससे ओटोरओस क्लीरोसिस नामक हृदय-रोग होता है। चिकने पदार्थ खाने वाले इसी रोग के शिकार होते हैं। अत: दही का प्रयोग उत्तम है।

सिरदर्द (आधे सिर में) – जो सिरदर्द सूर्य के साथ बढ़ता और घटता है इस तरह के सिरदर्द को ‘आधासीसी’ कहते हैं। ‘आधासीसी’ का दर्द दही के साथ चावल खाने से ठीक हो जाता है। प्रात: सूर्योदय के समय सिरदर्द आरम्भ होने से पहले नित्य दही में चावल मिलाकर खायें।

बाल गिरने के कारण – आवश्यकता से अधिक भावनात्मक दबाव से बाल गिरने लगते हैं। औरतों में एस्ट्रोजन हारमोन की कमी से बाल अधिक गिरते हैं। भोजन में लौह तत्व, विटामिन ‘बी’ तथा आयोडीन की कमी से भी बाल असमय में ही अधिक गिरते हैं। बालों को गिरने से रोकने के लिए दही से सिर धोना चाहिए। दही में वे सभी तत्व होते हैं, जिनकी स्वस्थ बालों को आवश्यकता रहती है। दही को बालों की जड़ों में लगाइए और बीस मिनट बाद सिर धोइए। ऐसा करने से लाभ मिलेगा।

काले बाल – आधा कप दही में एक नीबू निचोड़कर मिला लें। इसे बालों पर मलें और 20 मिनट रहने दें फिर सिर धोएँ तो इससे बाल मुलायम एवं काले हो जायेंगे।

बाल – दही से सिर धोने से बाल मुलायम और सुन्दर होते हैं। एक कप दही में पिसी हुई 10 कालीमिर्च मिलाकर सिर धोने से सफाई अच्छी होती है। बाल मुलायम एवं काले रहते हैं तथा बाल गिरना बंद हो जाते हैं। सप्ताह में एक बार कम-से-कम इसी तरह बाल धोएं।

फरास – (1) फरास, सिर में सफेद भूसे जैसे तिनके भरना, जिसमें प्राय: खुजली होती है, कंघा करते समय भूसा नीचे गिरता है। बाल सूखे-सूखे लगते हैं। फरास धीरे-धीरे फैलती-फैलती सारे शरीर को प्रभावित कर सकती है। एक कप दही और तीन चम्मच शक्कर मिलायें। दही और शक्कर मिलने से ऐसा रसायन बनता है जो फरास को दूर कर देता है। इसे सिर पर बालों की जड़ों तक लेप करें। बीस मिनट बाद बालों को धोयें। इससे फरास दूर हो जाती है। (2) एक कप दही में नमक मिलाकर बिलो लें, फेंट लें। इससे बालों को मलकर धोयें। फरास दूर हो जायेगी। (3) दही चार चम्मच + नारियल का तेल एक चम्मच + सुहागा जलाया हुआ फूला एक चम्मच सबको मिलाकर बालों की जड़ों में लगाकर सिर धोयें।

झुर्रियाँ – सुहागा गर्म तवे पर फुलाकर पीसकर आधा चम्मच, नारियल का तेल दो चम्मच तथा दही को कपड़े में बाँधकर, लटकाकर, पानी निकालकर पाँच चम्मच में सबको अच्छी तरह मिलाकर चेहरे पर लेप करके आधा घण्टे बाद धोयें। इस प्रकार नित्य करने से चेहरे की झुर्रियाँ मिट जायेंगी और काले धब्बे-निशान भी दूर हो जायेंगे।

त्वचा की सफाई – एक बड़ा चम्मच दही में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर रुई भिगोकर चेहरे पर रगड़ने से चेहरा साफ हो जाता है, त्वचा कोमल हो जाती है।

खुजली – बदन पर दही की मालिश करके नहायें। खुजली, खुश्की, हाथ-पैरों पर खुरदरापन, सब ठीक हो जायेंगे। दही की लस्सी भी पियें। यह गर्मी के मौसम में लाभदायक है।

धब्बे, मुँहासे – जब त्वचा रूखी, काली हो जाए, जगह-जगह दाग, धब्बे पड़ जायें, मुँहासों से चेहरा कुरूप हो जाये तो चेहरे और शरीर पर उबटन की तरह दही से मालिश करें फिर पाँच मिनट बाद स्नान करें। दही में बेसन मिलाकर मलें। त्वचा कोमल हो जायेगी।

फोड़े में सूजन, दर्द, जलन हो तो पानी निकाला हुआ दही बाँधे। एक कपड़े में दही डालकर पोटली बाँधकर लटका दें। इससे दही का पानी टपक जायेगा। फिर इसे फोड़े पर लगाकर पट्टी बाँध दें। दिन में तीन बार पट्टी बदलें।

अनिद्रा – दही में पिसी हुई कालीमिर्च, सौंफ तथा चीनी मिलाकर खाने से नींद आ जायेगी। दही का प्रयोग अनिद्रा में किया जाता है। प्राय: ऐसा देखा गया है कि दही के सेवन के बाद नींद आसानी से आती है।

भाँग का नशा – ताजा दही खिलाते रहने से भाँग का नशा उतर जाता है।

अाँखों में जलन – पलकों पर दही की मलाई या मक्खन मलें। इससे अाँखों की जलन ठीक होगी।

पथरी – दही की लस्सी पीने से पथरी निकल जाती है।

शरीर से दुर्गन्ध आने पर दही और बेसन मिलाकर शरीर पर मलें।

कैंसर की दवा – राष्ट्रीय डेयरी संस्थान के वैज्ञानिकों ने काफी परिश्रम के बाद अपना यह मत व्यक्त किया है कि दही कई प्रकार के कैंसर की सम्भावना को समाप्त कर देता है। दही का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है। हालाँकि दही दूध को जमाने से बनता है परन्तु दूध दही के रूप में बदलने पर अपने गुणों में वृद्धि कर लेता है। दही में कैंसर जैसे भयानक रोग से संघर्ष करने की शक्ति विद्यमान है। कैंसर की पहचान है, गाँठ (टयूमर) होना।

लिंकन-स्थित नेब्रास्का विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान के प्रोफेसर का कथन है कि दही टयूमर-निरोधी है। प्रोफेसर ने टयूमर से ग्रस्त चूहों पर अपना प्रयोग किया। एक दल के चूहों को पानी दिया गया और दूसरे दल को दही युक्त पानी। जिनको दही युक्त पानी दिया गया था, उनमें टयूमर का विकास 28 प्रतिशत कम रहा, और दूसरे में ट्यूमर तेजी से बढ़ा। शोधकर्ताओं का कहना है कि दही का बैक्टीरिया त्वचा के कैंसर में भी लाभकारी है।

दही में कैंसर-निरोधी क्षमता तो है ही, उसके साथ ही यह प्राकृतिक ‘एंटीबायोटिक’ है। उसकी यह क्षमता रोग को रोकने में सहायक हो सकती है। नित्य दही खाने से कैंसर नहीं होता।

दही का दूसरा बैक्टीरिया ऐसिडोफिलस अाँतों के कैंसर में भी हितकारी हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार दही खाने के एक घण्टा बाद ही उसके 81 प्रतिशत अंश को शरीर आत्मसात् कर लेता है, जबकि दूध सेवन के एक घण्टे के बाद केवल 32 प्रतिशत अंश ही शरीर आत्मसात् कर पाता है। दही से शरीर की फालतू चर्बी कम होती है। इसलिए मोटापा कम करने के लिए दही या मट्ठे का सेवन बहुत उपयोगी है।

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