Dil Ke Bimari Ka homeopathic ilaj – दिल की बीमारी का इलाज

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यह एलोपैथ चिकित्सकों को असंगत और विचित्र लग सकता है और यहां तक कि वे इस विचार पर हंस सकते हैं कि हृदयरोगों की चिकित्सा में होम्योपैथी का उपयोग किया जा सकता है।

मैं निम्नलिखित रोगों में एक तुलनात्मक चिकित्सा (एलोपैथी बनाम होम्योपैथी) का सुझाव प्रस्तुत करूंगा। अब यह संपूर्ण विश्व में स्वीकार किया जा रहा है कि अस्वस्थ संवेगों, जैसे मानसिक तनाव, भय, मानसिक बेचैनी या चिन्ताएं निम्नलिखित हृदय रोगों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

1. हृद्भूल (एन्जाइना)
2. हृदय की गति का असामान्य रूप से तेज हो जाना । (टैकीकार्डिया)
3. हृदय के धड़कन की अनियमितता (अरिदमिया)
4. यदि मानसिक बेचैनी बहुत अधिक और लंबे समय तक हो तो दिल का दौरा।

एलोपैथी :

1. प्रशांतक औषधियां (ट्रैक्वीलाइजर्स): कंपोज, एटिवान, अल्जोलाम, अलप्राक्स, लारपोज।

मैंने देखा है कि इन प्रशांतक औषधियों के दीर्घकालिक इस्तेमाल से इनकी आदत पड़ जाती है, पार्किसन रोग और यहां तक कि अवसाद (डिप्रेशन) भी हो जाता है।

2. एटेनोलाल और अन्य बी-ब्लाकर्सः यह अक्सर हृदय गति को कम करने के लिए दिया जाता है, किंतु इस औषध से मैंने ऐसी स्थिति भी देखी है जब हृदयगति काफी कम हो जाती है और यहां तक कि निम्नरक्तचाप भी हो जाता है। कुछ केसेज़ में तो इस औषध से तीव्र श्वास दमा भी उत्पन्न हो गया है।

3. इसोप्टीन : यह उच्च रक्तचाप और तेज हृदयगति के लिए विशेषरूप से बहुत जनप्रिय औषध हुआ करती थी। परंतु मैंने इसका बहुत तीव्र साइड-इफेक्ट्स’ एक केस में देखा है जिसमें रोगी, जो कि एक सुप्रसिद्ध हृदयरोग विशेषज्ञ के पिता थे, प्रचंड मलावरोध और प्रेरक तंत्रिकाघात (मोटर न्युरोन पैरालिसिस) से पीड़ित हो गए थे।

केस

मैंने इसोप्टीन की जटिलताओं का एक बहुत ही खराब केस देखा है। रोगी, यू.एस.ए. में कार्यरत तीन डॉक्टर पुत्रों के पिता, जिनमें से एक हृदयरोग विशेषज्ञ थे, इस औषध के कुप्रभावों के शिकार हो गए। इसोप्टीन की 800 एम.जी. की मात्रा प्रतिदिन दिए जाने के बावजूद उनकी नाड़ी और हृदयगति 150 से 160/ मि. थी। उनके हृदयरोग विशेषज्ञ पुत्र हृदय गति के चालक शिरानाल आलिंद पर्व (साइनो आट्रियल नोड या एस.ए.नोड) को काटकर अलग कर देने की बात सोच रहे थे जो कि पुनः खतरे से खाली नहीं था।

रोगी अनेक प्रकार की जटिलताओं, जैसे वाहिका तंत्र में सूजन (एजिओ न्यूरोटिक ओडेमा), निम्नरक्तचाप और उससे उत्पन्न पक्षाघात, तीव्र कब्ज और गर्मी के दौरों से पीड़ित थे। यह सब कुछ इसोप्टीन के कारण ही था। अब स्थिति में (हृदय की गति असामान्यरूप से तेज, संपूर्ण शरीर में सूजन, ब्लडप्रेशर 100/65 एवं सभी अंगों में पक्षाघात) उन लोगों ने मुझसे संपर्क किया। मेरी निम्नलिखित होम्योपैथिक चिकित्सा ने बड़ा ही चमत्कारिक सुधार किया।

होम्योपैथी : मैंने दो सप्ताह में धीरे-धीरे इसोप्टीन बंद कर दिया। ‘गोल्ड ड्राप्स‘ (पानी में 10 बूंद) दिन में 4 से 6 बार तक दिया गया। गोल्ड ड्राप्स में क्रेटेगस Q+ कैक्टस Q+ वेलेरियाना होता है। इसके अलावा कैली फास 8x और एबीज निग्रा 30 पर्यायक्रम से दिया गया।

संवेगजनित तनाव के कारण भोजन के बाद रोगी की हृदयगति बढ़ जाती थी। अधिक कष्ट में मैंने एकोनाइट 200 की सलाह दी। एक महीने में रोगी का उच्च रक्तचाप और पल्स सामान्य और स्थिर हो गया। सूजन, तमतमाहट और कब्ज अदृश्य हो गया क्योंकि इसोप्टीन बंद कर दिया गया था।

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