फंगल इन्फेक्शन या रिंगवर्म का होम्योपैथिक इलाज और दवा | Fungal Infection Ki Homeopathic Medicine In Hindi

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कई लोगों को त्वचा पर दाद अर्थात रिंगवर्म की समस्या हो जाती है। इसमें आपके स्किन के इन्फेक्टेड जगह पर रिंग, गोल दाने जैसे बन जायेगा, गोल-गोल और उसी गोलाई के अंदर दाने जैसे रहेंगे, स्किन सूजी रहेगी, लाल रहेगी, खुजली हुआ करेगी। इसे विज्ञान की भाषा में डर्माटोफायोटोसिस या टिनिया भी कहते हैं। दाद का संक्रमण किसी कीड़ा से नहीं बल्कि कवक (Fungus) से होता है। इसलिए इसे आम तौर पर fungal infection भी कहते हैं।

रिंगवर्म अर्थात दाद में रोगग्रस्त भाग पर छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं। ऐसा भी होता है कि पहले एक दाना या फुंसी जैसा निकलता है, उसमे खुजली होती है, आप खुजलाते हैं और खुजलाते खुजलाते वो बढ़ जाता है और गोलाई का रूप ले लेता है। वह स्थान लाल या काला पड़ सकता है, वहां जलन होती है और भयंकर खुजली मचती है जिस कारण उस भाग को बार-बार खुजलाना पड़ता है। ध्यान दीजियेगा कि दाद अधिकांशतः वृत्ताकार या गोलाकार में ही होता है और यह एक बार में शरीर के एक स्थान पर या एक बार में अनेक स्थानों पर भी हो सकता है।

यह रोग मुख्यतः शरीर को धूप-हवा न मिल पाने, नमी वाले या गन्दी स्थानों पर रहने, मीठे पदार्थ ज्यादा खाने, शरीर का रक्त दूषित हो जाने या फिर अगर किसी को दाद रोग है, और आप उनकी चीजें जैसे कि तौलिया, कपड़े, कंघी इत्यादि का उपयोग करते है या उनके संपर्क में आते हैं तो आपको दाद का इंफेक्शन होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

अब कारण, लक्षण पर ज्यादा चर्चा न करते हुए होम्योपैथिक दवा की चर्चा करूँगा कि किस दवा से आपकी यह समस्या जड़ से ठीक हो जाएगी।

Bacillinum 200 – डॉ बर्नेट का कथन था कि दाद उन्हीं लोगों को होता है जिनके वंश में क्षय रोग का लक्षण मौजूद रहा हो। अतः दाद के रोगियों को बीच-बीच में इस दवा का सेवन अवश्य करना चाहिए। कैसे करें तो Bacillinum 200 की 2 बून्द हफ्ते में 1 बार जीभ पर ले लें। अधिकांशतः मामलों में इसी से रोग जड़ से ठीक हो जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि लक्षण मिले या न मिले इसे तो आपको हर हफ्ते लेना ही है।

Tellurium 30 CH – कैसा भी दाद या ringworm हो आपको इस दवा का सेवन भी करना ही है। दाद, चेहरे का दाद, शरीर के निम्नांग का दाद, इसके सिवा शरीर के सभी स्थानों में दाद होने पर और खुजली में – टेल्यूरियम फायदा करती है । दाद या दाद की प्रकृति की किसी तरह का चर्म-रोग रहे और उसमें बहुत खुजलाहट हो तो पहले इसका प्रयोग करना चाहिये । कान की बीमारी और दाद के लिये-कुछ अधिक दिनों तक रोज़ 2-3 बार इसके सेवन करने की जरूरत होती है, क्योंकि इसकी क्रिया कुछ देर से होती है । फायदा होते ही दवा सेवन करना बन्द कर देना चाहिये। पहले 15 दिन 6 CH की 2 बून्द दिन में 3 बार जीभ पर लें। फिर इसके बाद 30 शक्ति की 2 बून्द दिन में 3 बार जीभ पर लें। जैसे लाभ मिले ऐसा लगे की 50 percent अच्छा हो गया दवा को बंद कर दें, यह दवा पूरी तरह ठीक कर देगा।

Bacillinum और Tellurium से ही 100 में से 90 लोगों का यह रोग जड़ से ठीक हो जाता है। जो 10 लोग बच गए उनके लिए कुछ लक्षण पर दवा बताता हूँ :-

Psorinum 200 – अगर सिर या scalp पर दाद हुआ हो तो यह दवा लाभ करेगा। Psorinum के विषय में एक बात समझ लें कि इसका रोगी इतनी ठंड महसूस करता है कि गर्म-मौसम में भी गर्म कपड़े पहने रहता है। आसमान में बादलों के आते ही मकान में घुस जाता है, बाहर की ठंडी हवा बर्दाश्त नहीं कर सकता। यद्यपि उसने पहले ही गर्म कपड़े पहने होते हैं, वह उनसे भी ज्यादा गर्म कपड़े ओढ़ लेता है। यह रोगी एक तरह का बैरोमीटर होता है। मौसम का उतराव चढ़ाव उसमें दिखाई पड़ता है। परन्तु शीत-प्रकृति का होते हुए भी दाद पर ठंडी हवा चाहता है। ये एक अपवाद है। ठण्ड बर्दास्त नहीं करेगा पर दाद पर ठण्ड चाहेगा, अगर ऐसा लक्षण मिले तो सिर पर क्या कहीं का भी दाद जड़ से समाप्त कर देगा। लक्षण मिलने पर हफ्ते में 2 बून्द लें।

Sulphur 200 – इसके दाद में जलन, खुजली विशेष है। इसके रोगी को खुजली और जलन ज्यादा ही होगा और साथ में पाचन क्रिया भी गड़बड़ बनी रहेगी ऐसे में हफ्ते में 2 बून्द ले लें से दाद, पाचन की सब गड़बड़ी ठीक हो जाती है।

Sepia 200 – त्वचा के रोग में सीपिया और सल्फर में समानता है। दोनों सोरा-दोष नाशक हैं, और दोनों को एक-दूसरे के पीछे सफलापूर्वक दी जा सकती है, एक-दूसरे की पूरक हैं। Sepia की खुजली मुंह, हाथ, पांव, पीठ, पेट किसी जगह भी हो सकती है। त्वचा पर भूरे रंग के दाग पड़ जाते हैं। पहले त्वचा पर दाद-जैसा एक खुश्क दाना निकलता है, खुजलाने से वह बड़ा गोलाकार हो जाता है। इस प्रकार के गोलाई लिये हुए चकत्ते अगर झुंड-के-झुंड भी हों, तो 1000 शक्ति की सीपिया से ये ठीक हो जाते हैं। सिर में दाद होने पर भी Sepia से लाभ होता है।

Croton Tiglium 30 – अण्डकोष में दाद होने पर यह दवा लाभप्रद है। इसकी 2 बून्द दिन में 3 बार लें।

Sanicula Aqua 30 – जीभ में दाद होने पर यह दवा लाभप्रद है। इसकी 2 बून्द दिन में 3 बार लें।

Calcerea carb 200 – मोटे-थुलथुले व्यक्ति को दाद हो जाने पर इसे दें। ऐसे व्यक्तियों के हाथ-पैर ठण्डे बने रहते हैं तो as a Constitutional दवा के रूप में Calcerea carb 200 की 2 बून्द हफ्ते में 1 बार दे दिया करें।

 

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