कैसे पुराने पेट दर्द की समस्या को होम्योपैथिक इलाज से ठीक किया गया

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आज इस लेख में हम देखेंगे कि पुराने पेट दर्द की समस्या को होमियोपैथी से कैसे ठीक किया गया, पोस्ट को पूरा अवश्य पढ़ें, ताकि आप पूरी तरह समझ सकें।

एक पेशेंट करीब आयु 28 वर्ष, इलाज के लिए मेरे पास आये। उन्हें 3 साल से पेट में दर्द होता था और पेट फूला रहता था। यह कष्ट खास तौर पर 6 बजे प्रातः काल या 4 बजे शाम में बढ़ जाता था। उसे ऐसा प्रतीत होता था कि पेट के भीतर बुलबुला-सा है। ऐसे में वह हमेशा सोडा लेना पसंद करते थे। सोडा पीने से थोड़ी राहत मिलती थी। खाने के बाद कुछ देर के लिए पेट का फूलना रुक जाता था। गैस पास हो जाने पर राहत मिलती थी। गर्म पदार्थ पीने से भी कष्ट कम हो जाता था। नींद ठीक आती थी, परन्तु प्रातः 6 बजे पेट के दर्द से फिर सो नहीं सकता था, नींद खुल जाती थी।

भूख ठीक थी; किसी खास वस्तु की इच्छा या अनिच्छा का कोई लक्षण नहीं था। कभी-कभी पेट से डकार उठने पर गले तक जलन होती थी। Rheumatic pain प्रायः रहता था। Modality अर्थात सर्दी-गर्मी का कोई विशेष लक्षण नहीं था, न ही मौसम का उसके लक्षणों पर कोई प्रभाव था।

मानसिक-लक्षणों में जब गुस्सा आता था तो वह परेशानी बढ़ जाती थी। कोई चिंता नहीं थी। गुस्से का स्वभाव था परन्तु अपने को काबू में रखता था। ध्यान केंद्रित नहीं रख सकता था।

पहला उपचार : इस रोगी के लक्षण कुछ विशेष स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए शाम 4 बजे पेट के रोग में वृद्धि के लक्षण पर उसे लाइकोपोडियम 1M की 4 बून्द दिया गया।

करीब 10 दिनों के बाद उन्होंने कहा कि उसे कुछ लाभ नहीं हुआ। अब की बार उसके लक्षण दुबारा लिए गए। उन्हीने कहा कि प्रात:काल 6 बजे पेट का दर्द ऐसे उठता है मानो दर्द की लहरें उठ रही हों। दर्द के समय घुटनों को पेट के साथ सटाकर लेट जाता है, दर्द के मारे इधर-उधर करवटें बदलता है। अगर गुस्सा आए तो रोग बढ़ जाता है, गर्म कॉफ़ी पीने से उसे आराम मिलता है। फिर इस रोगी के लक्षणों को रिपर्टरी द्वारा देखा गया :-

(a) दर्द प्रातः 6 बजे बढ़ता है : कोलोसिंथ (2); औग्जैलिक एसिड।
(b) दर्द सायंकाल 4 बजे बढ़ता है : कॉस्टिकम; कोलोसिंथ; बेलाडोना; लाइकोपोडियम (3); मैग्नेशिया म्यूर; फाइसोस्टिग्मा।
(c) क्रोध से लक्षणों में वृद्धि : कैमोमिला (2); कौक्युलस; कोलोसिंथ (2); नक्स वोमिका (2); स्टैफ़िसेग्रिया (2); सल्फर (2)।
(d) कॉफी पीने से रोग घटता है : कोलोसिंथ (3)।

क्योंकि उक्त लक्षणों में कोलोसिंथ प्रायः सभी लक्षणों में पाया गया है, इसलिए इस बार कोलोसिंथ 1M की 4 बून्द उसे दिया गया। कुछ दिनों में रोगी आया और कहने लगा कि अब वह बिल्कुल ठीक है। उसने आकर कहा कि अब प्रातः 6 बजे उठने से दर्द नहीं होता न ही शाम 4 बजे, नींद ठीक आती है, वात का दर्द भी चला गया है, परन्तु थोड़ी बहुत गैस की शिकायत बनी हुई है।

अब उसे कोलोसिंथ 10 M की 4 बून्द लेने की सलाह दी गई। इस पोटेंसी को लेने से पहले तो उसकी तबीयत कुछ बिगड़ी, परन्तु अब वह बिल्कुल ठीक है, कोई शिकायत नहीं रही।

इस केस में मानसिक तथा व्यापक-लक्षण नहीं थे, केवल कुछ विशेष लक्षण के आधार पर उसे दवा दी गई थी। ये विशेष लक्षण भी पहली बार में पकड़ में नहीं आए थे, दूसरी बार में पकड़े गए। क्योंकि ये बिल्कुल स्पष्ट थे इसलिए इनके आधार पर दवा दी गई जिससे लाभ हुआ। लाइकोपोडियम में 4 बजे रोग वृद्धि, क्रोध से रोग वृद्धि तथा गैस पास होने से राहत मिलना पाया जाता है, परन्तु उससे लाभ नहीं हुआ। इस रोगी में लाइकोपोडियम और कोलोसिंथ के लक्षण मिले जुले थे।

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