कैसे नींद नहीं आने की समस्या होम्योपैथिक दवा से ठीक हुई ?

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आज इस लेख में हम देखेंगे कि नींद नहीं आने की समस्या को होमियोपैथी से कैसे ठीक किया गया, लेख को पूरा अवश्य देखें, ताकि आप पूरी तरह समझ सकें।

एक महिला 35 वर्ष कि कहती है कि 20 वर्ष से उसे ठीक-से नींद नहीं आई। गान-विद्या का इतना शौक था कि रात को गाने की धुन लगातार ध्यान करती थी। मस्तिष्क हर समय गाने की धुन में ही व्यस्त रहता था। रात में बिस्तर पर लेटने के बाद मुश्किल से वह 3 घंटे सो पाती थी। जरा-सी रोशनी हो तो झट जाग जाती थी। अगर नींद आ भी रही हो, तो बिस्तर पर लेटते ही नींद उड़ जाती थी। जो-कुछ थोड़ा सोती थी उसमें स्वप्न आते रहते थे, कभी-कभी भयावह स्वप्न। उसने नींद की गोली कभी नहीं ली। सामान्य स्वास्थ्य अच्छा था। गला बैठा रहता था, परन्तु गले में दर्द नहीं था। जब भी ठंड लगती थी तो सबसे पहला असर गला पर ही होता था। पेट ठीक था, भूख ठीक थी, दूध तथा चर्बी की चीजों से अनिच्छा थी। बर्फ़ तथा ठंडी चीजों की चाह रहती थी। सोने के लिए बिस्तर में लेटते ही पेट खाली-खाली लगता था, परन्तु भोजन करने की इच्छा का न होना ऐसा लक्षण था। शायद इसी कारण नींद भी नहीं आती थी। खाना खाने से रोग बढ़ जाता था। प्रात: काल 11 बजे पेट खाली-खाली लगता था। मासिक-धर्म ठीक था उसमें कोई गड़बड़ी नहीं थी।

ज्यादातर इस स्त्री के मानसिक-लक्षण ही प्रधान थे। संगीत के प्रति उत्तेजित हो जाना उसका स्वभाव था। बड़ी चिड़चिड़ी, जल्दबाज तथा किसी बात से उसे संतोष नहीं होता था। भीड़ में जाने से डरती थी; जी घबराता था; आग से डर लगता था। दूसरों तथा विशेषकर रिश्तेदारों के प्रति उपेक्षा थी। जरा-सी बात से गुस्सा हो जाती थी, मन गिर जाता था। सर्दी तथा आँधी-तूफ़ान-गड़गड़ाहट से तबीयत बिगड़ जाती थी।

अब इस स्त्री के लक्षणों पर होम्योपैथिक दृष्टि से विचार करते हैं :-

यह रोगिणी शीत-प्रधान है इसलिए ऊष्णता-प्रधान औषधियों को लिस्ट में से निकाल दिया जाएगा। जिन औषधियों को हम ध्यान में रखेंगे वे शीत-प्रधान ही होनी चाहिए क्योंकि होम्योपैथी के सिद्धांत के अनुसार – शीत-प्रकृति के रोगी को शीत-प्रकृति की औषधि ही ठीक करती है।

मानसिक-लक्षण : रोगिणी के मानसिक-लक्षणों में रिश्तेदारों के प्रति उपेक्षा तथा भीड़ में घुटन अनुभव करना मुख्य हैं। तो इनके लक्षणो की दवा इस प्रकार हैं :-

(a) कुटुम्बियों के प्रति उपेक्षा-वृत्ति : हेलिबोरस; हिपर; नैट्रम कार्ब; फ़ॉसफ़ोरस (3); सीपिया (3)

(b) भीड़ में परेशानी अनुभव करना : आर्सनिक; ऑरम (2); बैराइटा कार्ब; कैलकेरिया कार्ब; कार्बो ऐनीमेलिस; कॉस्टिकम; कोनियम; फ़ेरम आर्स; ग्रेफ़ाइटिस; हिपर; कैलि आर्स (2); कैली बाई; कैली कार्ब; कैलि फ़ॉस; नैट्रम आर्स; नैट्रम कार्ब; नक्स वोमिका (2); फ़ॉसफ़ोरस; प्लम्बम; रस टॉक्स; स्टैनम।

(c) दम घुटने लगना : कार्बो ऐनीमेलिस; फ़ॉसफ़ोरस (2); स्ट्रेमोनियम (2)।

(d) आग से डरना : क्यूप्रम।

अन्य सामान्य तथा इच्छा-अनिच्छा आदि के व्यापक-लक्षण : मानसिक-लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण जिनका ऋतु से, खाने-पीने से तथा अन्य बातों से संबंध है, उनका विवरण हम दे रहे हैं

(a) आँधी-अंधड़-तूफ़ान से रोग-वृद्धि : ऐगेरिकस (2); ऑरम; कॉस्टिकम; कैलि बाइक्रोम (2); नैट्रम कार्ब (2); नाइट्रिक ऐसिड; पेट्रोलियम; फॉसफोरस (2); सोरिनम (3); रोडोडेन्ड्रोन (3); रस टॉक्स (2); सीपिया (2); साइलीशिया।

(b) चर्बीयुक्त भोजन से अरुचि : आर्सनिक (2); बेलाडोना, कैलकेरिया कार्ब; कार्बो ऐनीमेलिस (2); चायना (3); चिनिनम आर्स; कोलचिकम (2); साइक्लेमन (2); हेलीबोरस; हिपर (2); नेट्रम कार्ब; पेट्रोलियम (3); फ़ॉसफ़ोरस: रिउम; रस टॉक्स; सीपिया (2)

(c) दूध के प्रति अरुचि : अमोनिया कार्ब; बेलाडोना; कैलकेरिया कार्ब (2); इग्नेशिया (2); लैक डिफ़्लोरेटम (3); मैगनेशिया कार्ब; नैट्रम कार्ब (3); नक्स वोमिका; फ़ॉसफ़ोरस (2); रिउम; सीपिया (2); साइलीशिया (2)।

(d) ठंडे खाने के प्रति इच्छा : अमोनिया कार्ब; फ़ॉसफ़ोरस (3); साइलीशिया (2); जिंकम।

(e) बर्फ खाने की इच्छा : कैलकेरिया कार्ब (2); फ़ॉसफ़ोरस (3)।

(f) 11 बजे पेट में खालीपन: एलूमेन; नैट्रम कार्ब (2); फ़ॉसफ़ोरस (2); सीपिया; जिंकम (2)।

(g) पेट में खालीपन पर भूख न होना : ऐगेरिकस (2); ऐलम (2); आर्सनिक; बैराइटा कार्ब (2); चायना; कौक्युलस; डलकामारा; हेलिबोरस; म्युरियेटिक ‘ ऐसिड (2); फ़ॉसफ़ोरस; रस टॉक्स (2); साइलीशिया (2); सल्फ्यूरिक ऐसिड (2)।

(h) बिस्तर में लेटने के बाद नींद न आना : बोरैक्स; मैगनेशिया कार्ब; फ़ॉसफ़ोरस (2); फ़ॉसफ़ोरिक ऐसिड (2)।

(i) कोई विचार दिमाग में दोहराया जाता रहे, जैसे इस स्त्री के मस्तिष्क में गाने की धुन चलती रहती थी : बैराइटा कार्ब; कैलकेरिया कार्ब (2); कॉफ़िया (2); ग्रेफ़ाइटिस (2); पेट्रोलियम।

(j) गला बैठना पर दर्द नहीं : कैलकेरिया कार्ब (3); कॉस्टिकम (2); फ़ॉसफ़ोरस (2)।

निष्कर्ष : रोगिणी के शीत-प्रधान होने के कारण हमने शीत-प्रधान औषधियों को ही चुना। इस प्रकार हमारा चुनाव सीमित हो गया। कुल 14 लक्षणों के संबंध में हमने यह जानने का प्रयत्न किया कि किस औषधि में इन 14 में से कितने लक्षण आते हैं। हमने देखा कि कैलकेरिया कार्ब में 6 लक्षण आते हैं; नैट्रम कार्ड में भी 6 लक्षण आते हैं; फ़ॉसफ़ोरस में 12 लक्षण आते हैं; सीपिया में 5 लक्षण आते हैं।

निष्कर्ष यह निकला कि फ़ॉसफ़ोरस में सबसे अधिक लक्षण मौजूद हैं। इसके अलावा फ़ॉसफ़ोरस में एक विलक्षण लक्षण मौजूद है – रिश्तेदारों के प्रति उपेक्षा। ठंडे पानी तथा बर्फ के लिए इच्छा भी फ़ॉसफ़ोरस में मौजूद है।

इस निष्कर्ष पर पहुँच कर उस स्त्री को फ़ॉसफ़ोरस 10 M दिया गया ।

कुछ दिनों बाद उसने बताया कि उसे बड़े आनंद की नींद आती है, और रात को चित्त बड़ा शांत रहता है जैसा पहले कभी नहीं रहा था। वह कहती है कि अब थकान भी नहीं रहती, 11 बजे पेट में जो बेचैनी होती थी वह भी नहीं रही। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है।

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