खांसी का होम्योपैथिक इलाज – Khansi Medicine In Hindi

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खांसी की मुख्य-मुख्य औषधियां

खांसी को समझने के लिये यह समझना आवश्यक है कि मुख से फेफड़ों तक जो श्वास-प्रणाली है उसके भिन्न-भिन्न स्थानों की शोथ से खांसी होती है, और प्रत्येक स्थान पर प्रभाव करने वाली भिन्न-भिन्न औषधियां हैं। मुख में तालु का हिस्सा ‘फैरिंग्स’ (Pharynx) -‘गल-कोष’ कहलाता है; उसके बाद श्वास-प्रणालिका शुरू होती है जो फेफड़े की तरफ जाती है। उसका उपर वाला हिस्सा ‘लेरिंग्स’ (Larynx) -‘स्वर-यंत्र’ कहलाता है जो गले के रूप में बाहर दीखता है; इसके बाद श्वास-प्रणालिका का जो हिस्सा आता है वह ‘ट्रैकिया’ (Trachea) ‘श्वासनली’ कहलाता है। ‘श्वास-नली’ आगे चल कर दो शाखाओं में विभक्त हो जाती है जिन्हें ‘ब्रोंकाई’ (Bronchi) – ‘वायु-नली’ कहते हैं। इनमें से एक ‘वायु-नली’ दायें फेफड़े में और दूसरी बायें फेफड़े में चली जाती है। फेफड़ों में जाकर ये दोनों वायु-नलियां ‘श्वसोपनलियों’ (Bronchial tubes) में विभक्त हो जाती हैं जो फेफड़ों में फैल जाती हैं। इस प्रकार गले और श्वास-प्रणालिका का क्रम यों चलता है: फैरिंग्स, लेरिंग्स, ट्रैकिया, ब्रोंकाई, ब्रोंकाइल-ट्यूब्स। जब तालु का शोथ होता है तब फैरिंजाइटिस (तालु-शोथ), जब लेरिंग्स तथा ट्रैकिया का शोथ होता है तब लेरिंजाइटिस (स्वर-यंत्र-शोथ), जब ब्रोंकाई का शोथ होता है तब ब्रोंकाइटिस (वायु-नली-शोथ) और जब ब्रौंकाइल-ट्यूब्स या फेफड़े का शोथ होता है तब निमोनिया कहलाता है।

खुश्क खांसी का होम्योपैथिक दवा

एकोनाइट – इसमें श्वास-प्रणालिका (Wind-pipe) में शेाथ होती है। जिसमें लेरिंग्स तथा ट्रैकिया दोनों शामिल हैं। यह खुश्क खांसी होती है, गला रुंधता-सा प्रतीत होता है। बच्चा खांसते हुए गले को पकड़ता है। क्रूप-खांसी, जिसमें लेरिंग्स और ट्रैकिया का शोथ होता है, एकोनाइट के प्रभाव के अन्तर्गत है। शुरू-शुरू में सर्दी लगने पर खुश्क खांसी, थोड़ी-थोड़ी खेंच के साथ – (Short, dry, irritating, Spasmodic, coming by fits and starts).

सल्फ़र – ऊपर कहे गये एकोनाइट के लक्षणों में जब खांसी पुरानी हो जाय, या जब ज्यादा कफ़ आने लगे तब भी उपयोगी है।

बेलाडोना – गले में खुश्क खांसी, गला दुखने लगे, खांसते-खासंते चेहरा लाल और गर्म हो जाय, शाम को बिस्तर में लेटने से बढ़ जाय।

फ़ॉसफ़ोरस – दिन रात लगातार खुश्क खांसी, थूक बहुत कम, गला और छाती पक जाने का सा दर्द, गहरा सांस लेने से खांसी उठ खड़ी हो।

इग्नेशिया – खुश्क खांसी में रोगी जितना खांसे उतना ही खांसी छिड़े।

ब्रायोनिया – खुश्क खांसी, जरा भी बोलने से खांसी छिड़ जाय, ठंडे से गर्म या गर्म से ठंडे कमरे में आने से खांसी छिड़ जाय, खांसने से छाती तथा सिर में दर्द हो, रात को बिस्तर में लेटा न जा सके, रोगी उठ बैठे।

हायोसाइमस – खुश्क खांसी, गले में लगातार खुरखुरी (Irriation) बनी रहने से खांसी आती रहे, बहुत थोड़ा खून निकले, लेटने पर बढ़ जाय, बैठने से आराम पड़े। ‘गल-जिव्हा’ (Uvula) के तालु में स्पर्श से खांसी उठे। ‘श्वास-यंत्र’ (Larynx) में एक ‘सूखे-से केन्द्र’ (Dry spot) से खांसी उठती है।

कैलकेरिया कार्ब – खों-खों वाली खुश्क खांसी (Hacking cough) मानो गले में धूल-सी (Dust) अटकी हो; खाने के बाद खांसी आने लगे।

आर्निका – थोड़ी देर की खुसखुसी खुश्क खांसी।

कैमोमिला – बच्चों की दांत निकलते समय की सूखी खांसी। गले में खुजलाहट (Titillation) की खांसी जिसमें कैमोमिला तथा मर्क उपयोगी हैं।

एलूमिना – ‘स्वर-यंत्र’ (Larynx) की खुजलाहट से खुश्क, खों-खों की खांसी।

ऐमोनिया म्यूर – इसकी खांसी ‘स्वर-यंत्र’ से उठती है। ‘स्वर-यंत्र में लगातार खुरखुराहट होती है, सफेद कफ़ निकलता है। सारे गले में (लैरिंग्स) तथा ट्रैकिया में खांसी का प्रकोप एकोनाइट में पाया जाता है। सिर्फ ‘स्वर यंत्र’ (लेरिंग्स) में खांसी का प्रकोप एमोनिया म्यूर में पाया जाता है। दोनों औषधियों में खांसी मुख्यत: खुश्क ही होती है। जिंकम में भी एमोनिया म्यूर जैसी खांसी है।

कफ खांसी का होम्योपैथिक दवा

ऐन्टिम टार्ट – दमे में या गले में गाढ़े कफ के भरे होने से घड़घड़ शब्द होने पर लाभदायक है।

ऐमोनिया कार्ब – दमे की प्रकृति के वृद्ध-व्यक्तियों की खांसी में बहुत कफ़ आना।

इपिकाक – पुरानी खांसी जिसमें छाती में कफ़ भरा हो, कठिनाई से निकले।

हिपर सल्फ – पुरानी खांसी, दमे की प्रकृति, खांसते-खांसते गला रुंध जाना, कफ निकलने में कठिनाई होना।

कैलि बाईक्रोम – खांसने में कठिनाई से डोरे जैसा तारदार कफ़ का निकलना।

स्टैनम – छाती में कफ भर जाय, जो आसानी से निकले।

नैट्रम म्यूर – साफ पानी की तरह, या झागदार कफ, ‘स्वर-यंत्र’ का एक सूखा-सा केन्द्र जहां से खांसी छिड़ती है।

कैलि सल्फ तथा पल्स – पीले रंग का ढीला कफ निकलता है।

ड्रॉसरा – खांसते-खासते कय हो जाना, कुत्ता-खांसी।

मर्क तथा नक्स – गले को बार-बार साफ करना पडे (Scraping in the throat).

रस टॉक्स – गले से खांसी उठती है। भींग जाने से होती है। तर होती है।

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