गर्भावस्था के दिनों में पांवों तथा पेट में ऐंठन होने का होम्योपैथिक इलाज

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गर्भावस्था के दिनों में पांवों तथा पेट में ऐंठन होने पर लक्षणानुसार निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग करना चाहिए :-

कोलोसिन्थ 6, 30 – पांवों में ऐंठन तथा तीव्र दर्द – जो आराम करते समय बढ़ जाता हो, टांगों में भारीपन तथा पेट में दर्द – जिसमें आगे झुकने अथवा दोहरा हो जाने से राहत मिलती हो ये दवा लाभ करती है।

कैल्केरिया-कार्ब 30 – टांगों, विशेष कर पिण्डलियों में ऐंठन, अत्यधिक-दर्द और भारीपन, पेट में दर्द, ऐंठन, नाभि के समीप अधिक दर्द, अत्यधिक कमजोरी, शरीर का ठण्डा पड़ जाना, सिर पर पसीना आना, पतनावस्था के लक्षणों में प्रयोग करें।

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आर्निका 30 – टांगों में ऐंठन तथा चोट लगने जैसा दर्द ।

विरेट्रम-ऐल्बम 30 – पांव तथा पिण्डलियों में तीव्र दर्द, ऐंठन, बैठे-बैठे टांगों का सो हो जाना तथा कूल्हे, घुटने एवं पांव के जोड़ों के स्थान-च्युत हो जाने जैसी अनुभूति में प्रयोग करें।

बेलाड़ोना 30 – नाभि के समीप सिकोड़ने वाला दर्द होने पर दें ।

कैमोमिला 30 – टांग में ऐंठन, जो रात में बढ़ जाती हो, घुटनों में ऐंठन तथा चलने-फिरने पर घुटने कड़कने लगें ।

हायोसाएमस 30 – जांघों तथा पिण्डलियों में ऐंठन, टांगों का सिकुड़ना, घुटनों के जोड़ों में अकड़न, पेट में ऐंठन के साथ दर्द, जिसमें दबाने से आराम मिलता हो, पेट का फूल जाना तथा उल्टी आना आदि लक्षणों में दें।

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क्युप्रम 6 अथवा जेल्सीमियम 3 – पांव के तलवों में अचानक ऐंठन, मरोड़ अथवा खींचन जैसा दर्द होने पर ।

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