नाइट्रि स्पिरिटस डलसिस [ Nitri Spiritus Dulcis Homeopathy In Hindi ]

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होमियोपैथी की अपेक्षा एलोपैथी में यह दवा अधिक उपयोग होती है। शायद होमियो-चिकित्सा-शिरोमणि डॉ महेन्द्रलाल सरकार ने ही अपनी “हैजा चिकित्सा” नामक अंगरेजी पुस्तक में सबसे पहले इसका उल्लेख किया है कि जब मूत्र विकार के लिए होमियोपैथी दवा से फायदा न हो तब इसकी 5 बून्द की मात्रा, 10-15 मिनट के अन्तर से, गुनगुने पानी के साथ देने से विशेष लाभ हो सकता है। किसी प्रकार के ज्वर में ( in low fever ) अथवा किसी अन्य बीमारी में जब रोगी की चेतना नष्ट ( sensorial apathy ) हो जाती है और बड़ी मुश्किल से उसे जरा सा जगाया जा सकता है, उस समय – एक बड़े गिलास भर पानी में कई बून्द नाइट्रि स्पिरिट मिलाकर, 1-2 चाय-चम्मच की मात्रा में 2-3 घण्टे के अंतर से प्रयोग करना चाहिए। ओपियम, एसिड फॉस, हेलिबोरस आदि कई दवाओं के साथ इसका प्रभेद जान लेना आवश्यक है, इसका ध्यान रखें। श्वासयंत्र की बीमारी में कुछ कदम चलते ही साँस तेज हो जाए तो – इससे फायदा होता है। स्टर्नम के नीचे तकलीफ देनेवाला संकोचन जैसा दर्द होना। इसके द्वारा डिजिटेलिस की क्रिया बढ़ती है।

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