ओलियम जेकोरिस [ Oleum Jecoris Homeopathy In Hindi ]

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[ कॉड नामक मछली के यकृत से यह दवा तैयार होती है और इसमें ‘आयोडीन’ भी मिली रहती है ] – करीब एक लीटर oleum jecoris में 0.4 ग्राम आयोडीन रहती है। चूँकि इसमें आयोडीन निश्चित रूप से है, इसलिए जो बीमारियां आयोडीन से आरोग्य होती है जैसे – गाँठ, सर्दी-खाँसी, पोषण-क्रिया की कमी, यकृत, आंत, पाचन यन्त्र का विकार, रक्त के लाल कणो का घट जाना बीमारियों में इससे लाभ होता है। इसके अलावा जो बीमारियां आयोडीन से आराम में नहीं आती वे भी इससे ठीक हो जाती है, क्योंकि इसमें कॉडलिवर तेल की भी एक अलग गुण मौजूद है। कण्ठमाला, दुबलापन, बच्चों का सूखा रोग, कमजोरी के साथ माथा और हाथ गरम हो जाना, रात में हरकत, बेचैनी, यकृत में दर्द, बच्चों का दूध न पीना,शरीर का पीला पड़ जाना, हथेली में जलन, खांसी, हड्डी की बीमारी, पुराना अतिसार, घुटने और कोहनी में ऐंठन, पेशियों के कड़ापन इत्यादि में इससे लाभ होता है।

गांठों की बीमारी – कण्ठमाला धातुग्रस्त व्यक्तियों के अक्सर गर्दन, गाल, गला, कान और जाँघ की गिल्टी आदि की गांठें (ग्लैण्ड) फूल जाती है, इसमें ओलियम जेकोरिस फायदा करती है।

हड्डी का घाव और सूजन – बड़ी हड्डियों का घाव तथा गांठों के चारों ओर फोड़ा और नासूर होने पर इससे फायदा होता है। हड्डी की सूजन, हाड़ नरम हो जाना, हड्डी के पास के फोड़े, क्षय ज्वर इत्यादि में भी यह फायदा करती है। इससे स्वास्थ्य की बहुत उन्नति होती है। मगर हड्डी में सड़न, और रीढ़ की हड्डी के फोड़ों में इससे कुछ भी लाभ नहीं होता।

सर्दी-खांसी – जरा से ठण्ड लगते ही जिन्हे जुकाम या सर्दी हो जाती है, प्रायः ही नई सर्दी होती रहती है, नाक से हमेशा पानी गिरा करता है, किसी तरह भी सर्दी पीछा नहीं छोड़ती, उन्हें इसकी 2x शक्ति कुछ अधिक दिनों तक देनी चाहिए। इससे उनकी धातु परिवर्तित होने से वे बिल्कुल आरोग्य हो जायेंगे।

अतिसार – नए की अपेक्षा पुराने अतिसार में यह दवा ज्यादा फायदा करती है। इसमें भी 2x से 6 शक्ति तक का प्रयोग करना चाहिए।

वक्षःस्थल की बीमारी – गला फंस जाना, रात में सूखी आक्षेपिक खाँसी, छाती में गड़ने जैसा दर्द, कलेजा धड़कना इत्यादि लक्षणों में इसका उपयोग होता है।

ज्वर – हेक्टिक फीवर यानी क्षय-ज्वर, रात में पसीना आना, थाइसिस के रोगी को सन्ध्या के समय लगातार जाड़ा-सा मालूम होना।

दाद – दाद पर इसका बाह्य प्रयोग होता है। जो बच्चे बहुत दुबले-पतले होते हैं, बढ़ते नहीं, बौने रहते हैं, उनके शरीर में मूल कॉडलिवर दो घंटे तक रोज मालिश करने से जल्द ही उसका स्वास्थ्य अच्छा हो जाता है [ सूखा रोग में शुद्ध सरसों का तेल या कॉडलिवर आयल उक्त प्रकार से मालिश करना चाहिए और बच्चे को आधा घण्टे तक धूप में रखना चाहिए।

अनचाहे बाल – अगर फेस में या शरीर के किसी अंग में अनचाहे बाल निकल गए हों तो इसकी 3x शक्ति तक का प्रयोग करना चाहिए।

ओलियम जेकोरिस मेडिसिन का किसी भी तरह का कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है।

क्रम – 2x से 3 शक्ति।

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