पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक दवा – पेट के कीड़े का उपचार

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पेट में कीड़े होने के कारण

पेट में विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े कृमि या कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं, तो शरीर का रंग पीला या काला पड़ जाता है। हलका बुखार भी रहने लगता है। पेट में कीड़े पड़ने का मुख्य कारण व्यक्तिगत सफाई की कमी है। मक्खियों द्वारा दूषित आहार, जल, दूध आदि के द्वारा यह रोग फैलता है। रोगी की आंतों में कीड़ों के अंडे मल के साथ बाहर आते हैं। ये अंडे लार्वा तथा कीड़े बनकर रेंगते हुए आस-पास की घास या अन्य स्थानों में चिपक जाते हैं। फिर ये भोजन आदि के द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। बच्चों में कृमि का रोग अधिक होता है।

पेट में कीड़े होने के लक्षण

इस रोग में पाचन संबंधी विकार जैसे भूख न लगना, जी मिचलाना, उलटी आना, कमजोरी, पेट में दर्द, पीली त्वचा, पेट में दर्द, लार्वे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं, तो दमा का रोग भी हो जाता है। जीभ सफेद, आंखें लाल, होंठ सफेद, नाखून सफेद, गालों पर धब्बे, शरीर में सूजन आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। गुदाद्वार तथा उसके आस-पास की त्वचा पर खुजली होती है।

पेट के कीड़े मारने के घरेलू उपाय

  • आधा चम्मच हल्दी लेकर तवे पर सूखी भून लें। फिर इसे रात को सोते समय पानी से लें।
  • छाछ में नमक तथा काली मिर्च का चूर्ण डालकर चार दिन तक पिएं। यह पेट के कीड़ों को नष्ट करने वाला उत्तम नुस्खा है।
  • लहसुन की चटनी बनाकर उसमें जरा-सा सेंधा नमक डालकर सुबह-शाम चाटें।
  • 50 ग्राम अनार की जड़ की छाल लेकर इसे 250 ग्राम पानी में उबालें। जब पानी लगभग 100 ग्राम रह जाए, तो इसे पी लें। तीन-चार दिन तक इस काढ़े का प्रयोग करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • एक चम्मच अजवाइन में दो चुटकी काला नमक मिलाकर रात को सोते समय गर्म पानी से लें।
  • नीम की कोंपलों को कुचलकर इसका एक चम्मच रस निकाल लें। इसमें शहद मिलाकर चाटें। इससे पेट के कीड़े मर कर मल के साथ बाहर निकल जाएंगे। यह दवा चार दिन तक सेवन करें।
  • आधा चम्मच बायबिडंग को पीसकर शहद या पानी के साथ रात को सोते समय गर्म पानी से लें।
  • करेले का रस एक चम्मच, नीम का रस आधा चम्मच, बायबिडंग का चूर्ण दो चुटकी। तीनों को मिलाकर पी लें, पेट के कीड़े नष्ट हो जाएंगे।
  • 10 काली मिर्च के दानें और 25 ग्राम पुदीना। दोनों को पीसकर एक गिलास पानी में घोल कर चार दिन तक इसे नित्य पिएं।
  • तुलसी की दस पत्तियां, बायबिडंग का चूर्ण 2 ग्राम और एक चुटकी काला नमक। तीनों को पानी के साथ पीसकर चने के बराबर की गोलियां बना लें। इसमें से दो-दो गोली रात को सोते समय पानी के साथ लें।
  • दही में असली शहद मिलाकर तीन-चार दिन तक सुबह-शाम खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • लगभग 3 ग्राम अनार के छिलकों का चूर्ण दही या छाछ के साथ खाएं।
  • राई को पीसकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण 100 ग्राम गो-मूत्र के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
  • एक चम्मच करेले का रस लेकर गर्म पानी में मिलाकर पिएं।
  • आम की गुठली के भीतर की गिरी निकालकर सुखा लें। फिर इसे पीसकर दो-दो चुटकी लेकर पानी के साथ सेवन करें।
  • प्रतिदिन सुबह के समय कच्चे, किंतु लाल टमाटरों की चटनी में काली मिर्च तथा सेंधा नमक डालकर सेवन करें।
  • कच्चे केलों की सब्जी प्रतिदिन सात-आठ दिन तक खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • गन्ने के सिरके में 25 ग्राम कच्चे चने रात को भिगो दें। सुबह के समय सिरके में से छानकर खाएं।
  • सेंधा नमक एक चुटकी, चार काली मिर्चे और एक चम्मच अजवाइन। तीनों का चूर्ण पानी के साथ सेवन करें।
  • अजवाइन के सत्व की चार-पांच बूंदें पानी में डालकर सेवन करें।
  • पेठे की मिठाई तथा सब्जी खाने से पेट के कृमि खत्म हो जाते हैं।
  • परवल को उबालकर उसका दो चम्मच रस तथा पुदीने का एक चम्मच रस लेकर पिएं।
  • बथुए को उबालकर उसका आधा कप रस लेकर पी जाएं।
  • निराहार मुंह 100 ग्राम शहतूत खाने से पेट के कृमि मर जाते हैं।
  • एक कप गाजर का रस लगभग 15 दिन तक पीने से कृमि रोग में काफी लाभ होता है।
  • बच्चों को आधा चम्मच प्याज का रस, दो-तीन दिन तक पिलाने से काफी लाभ होता है।
  • आधा चम्मच आंवले का रस कुछ दिनों तक नित्य सेवन करें।
  • 10-15 पपीते के बीज लेकर पानी में पीस लें। फिर एक कप पानी में मिलाकर पिएं।
  • नीबू के चार-पांच बीज पानी में पीसकर पी लें।
  • दो कली लहसुन, चार मुनक्के तथा एक चम्मच शहद। तीनों की चटनी एक सप्ताह तक खाएं।
  • पलास के बीजों का दो चुटकी चूर्ण पानी के साथ लें।
  • अनन्नास का सेवन खाली पेट करें।
  • हरसिंगार के फूलों का स्वरस निकाल कर आधा चम्मच की मात्रा में कुछ दिनों तक सेवन करें।
  • दो माशे खुरासानी अजवाइन, 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर सेवन करें।
  • नीम की पत्तियों को सुखाकर पीस लें। दो चुटकी चूर्ण शहद के साथ सेवन करें।

पेट के कीड़े मारने की आयुर्वेदिक दवा

  • दो चुटकी सत्यानाशी की जड़ का चूर्ण पानी के साथ लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • बायबिडंग एक चम्मच तथा सहजन 3 ग्राम। दोनों का काढ़ा बनाकर शहद के साथ सेवन करें।
  • बायबिडंग, सेंधा नमक, हरड़, निशोथ, पीपल, सेचर नमक और भुनी हुई हींग। इन सातों चीजों को बराबर-बराबर की मात्रा में लेकर, पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में से दो चुटकी बड़ों के लिए तथा एक चुटकी छोटे बच्चों को, सुबह-शाम गर्म पानी से 10 दिन तक दें।
  • 10 ग्राम गुड़ तथा एक माशा खुरासानी अजवाइन, ठंडे पानी से सेवन करें।
  • एक गिलास बासी पानी (शुद्ध), 6 माशे खुरासानी अजवाइन, 10 ग्राम पुराना गुड़। तीनों एक साथ सेवन करें।
  • बायविडंग का चूर्ण 5 माशे, 1 तोला शहद में मिलाकर चाटें।
  • इन्द्रायण की जड़ को पानी में चंदन की तरह घिसकर गुदा के बाहर तथा भीतर लगाएं।
  • छिला हुआ कमीला 3 माशे की मात्रा में दही के साथ सेवन करें।
  • तेजपात तथा जैतून, दोनों का तेल मिलाकर गुदा में लगाने से कीड़े मर जाते हैं।
  • कृमिमुदगर रस 1-1 गोली सुबह शाम 10-14 दिन तक लें।
  • कृमिकालानल रस की भी 1-1 गोली तीन बार 7 दिन तक लें। इससे सभी प्रकार के कृमि मर जाते हैं।

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