फेलाण्ड्रीयम [ Phellandrium Aquaticum In Hindi ]

695

[ सूखे फल से मूल-अर्क तैयार होता है ] – श्वास-यंत्र पर ही इसकी प्रधान क्रिया होती है। थाइसिस, ब्रोंकाइटिस, फेफड़े की वायु-स्फीति ( emphysema ) आदि बीमारियों में जब अत्यन्त सड़ी बदबू-शुदा बलगम निकलता है और थाइसिस में – फेफड़े के बिचले भाग ( middle lobes ) पर बीमारी का दौरा होता है, तब इससे बहुत कुछ लाभ होता है। क्षय-ज्वर और उसके साथ ही कमजोरी लानेवाला पसीना और शरीर को क्षय करने वाला अतिसार ( संग्रहणी-रोग ) – इन बीमारियों की भी एक उत्तम दवा है। इसमें रोगी के मुंह का स्वाद मीठा रहता है।

स्तन की बीमारी – स्तन पिलाने के समय स्तन की दुग्धवाही-नली में ( milk ducts ) बहुत दर्द होना और उसका सारे शरीर में फ़ैल जाना और स्तन की घुण्डी में बहुत दर्द रहना। ‘फेलाण्ड्रीयम‘ का एक लक्षण यह भी है कि बच्चे को स्तन पिलाने के समय स्तन से बहुत अधिक दूध निकल जाता है। लैक-कैनाइनम में स्तन में इतना ज्यादा दूध भरा रहता है कि उससे प्रसूता को तकलीफ होती है और स्तन ऊपर की ओर उठाकर बाँध कर रखना चाहती है, किन्तु दर्द के कारण वह कर नहीं सकती।

आँख की बीमारी – आँख से बहुत अधिक पानी गिरना, रोशनी सहन नहीं होना, सिर में दर्द होना, आँख की स्नायु में भी दर्द होना।

फेफड़े की बीमारी – छाती की बीच की हड्डी के पास दाहिनी ओर सुई गड़ने जैसा दर्द, दर्द कंधे के पास और पीठ तक चला जाना, लगातार खाँसी, सवेरे खाँसी बहुत बढ़ जाना, सड़ा बदबूदार बलगम निकलने के साथ खाँसी, सो नहीं सकना, बैठा रहना जैसे लक्षण में फेलाण्ड्रीयम से फायदा होता है।

थाइसिस में – 6 और निम्न शक्ति का उपयोग करें।

क्रम – Q से 6 शक्ति।

Ask A Doctor

किसी भी रोग को ठीक करने के लिए आप हमारे सुयोग्य होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। डॉक्टर का consultancy fee 200 रूपए है। Fee के भुगतान करने के बाद आपसे रोग और उसके लक्षण के बारे में पुछा जायेगा और उसके आधार पर आपको दवा का नाम और दवा लेने की विधि बताई जाएगी। पेमेंट आप Paytm या डेबिट कार्ड से कर सकते हैं। इसके लिए आप इस व्हाट्सएप्प नंबर पे सम्पर्क करें - +919006242658 सम्पूर्ण जानकारी के लिए लिंक पे क्लिक करें।

Loading...

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Open chat
1
💬 Need help?
Hello 👋
Can we help you?