Pichi ( Fabiana Imbricata ) Homeopathy In Hindi

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सिस्टाइटिस ( मूत्राशय का प्रदाह ), गोनोरिया, प्रोस्टेटाइटिस, पेशाब में कष्ट, पेशाब में पीब या श्लेष्मा, पेशाब में कूथन व पेशाब के बाद जलन, पेशाब में पथरी निकलना, मूत्राशय का बढ़ना जैसे लक्षण में इस औषधि का उपयोग होता है।

यह एक बलवर्धक एवं पित्त निस्सारक औषधि है, नाक के नजले, कामला तथा मंदाग्नि ( dyspepsia ) की चिकित्सा तथा पित्तस्राव को बढ़ाने के लिए इस औषधि का प्रयोग किया जाता है। यह भी टेरीबिन्थ की तरह ही मूत्रल औषधि है। Uric acid diathesis, मूत्राशयशोथ ( cystitis ), मूत्रकृच्छ ( dysuria ), prostatitis के साथ होने वाली पुरुष-ग्रन्थि की सपूय अवस्थाओं में इसका उपयोग किया जाता है, पित्तपथरी एवं यकृत सम्बन्धी रोग।

मात्रा – Q की 10 से 15 बून्द आधे कप पानी के साथ।

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