Polio Treatment In Homeopathy – पोलियो का इलाज़

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इस रोग में विभिन्न कारणों से बच्चे की एक या दोनों टाँगों पर पक्षाघातसा हो जाता है अर्थात् बच्चे की एक या दोनों टाँगें क्रियाशून्य तथा टेढ़ीमेढ़ी हो जाती हैं जिससे बच्चा विकलांग हो जाता है । एक बार पोलियों हो जाने पर उसका निदान अत्यन्त कठिन है । अतः इसके लक्षण प्रकट होते ही तुरन्त उपचार कराना चाहिये । वैसे भारत-सरकार द्वारा छोटे वच्चों को पोलियो से बचने की दवा (प्रतिषेधक दवा) मुफ्त पिलाई जाती है ।

लैथाइरस 30- फ्लू आदि क्षीण कर देने वाली बीमारियों के बाद अंग कमजोर हो जायें, नींद अधिक आये तथा थकान रहे, टाँगों में कड़ापन हो, चलते समय घुटने आपस में टकरायें, अँगुलियों के पोर सुन्न हो जायें तब यह दवा लाभप्रद है ।

सिकेलि कॉर 30- मेरुदण्ड की उत्तेजना के कारण टाँगों में झनझनाहट एवं सुन्नता रहे, शरीर में गर्मी होने के कारण कपड़े न पहन पायें तो दें।

इथूजा 30- दूध पीने के बाद उसकी उल्टी हो जाये, पेट व आँतें काम करना छोड़ दें, खड़े होने पर सिर को भी सँभाले रखने की शक्ति न रहे, पीठ चिपटी और जकड़ी हुई सी लगे तो लाभकर है ।

पाइनस सिल्वेस्ट्रिस 3 – नीचे के अंग दुर्बल हो जायें, घुटने कमजोर हो जायें, संधिवातू और खुजली के लक्षण रहें तो लाभप्रद है ।

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