पॉलीसिथिमिया के कारण, लक्षण और इलाज [ Polycythemia Treatment In Hindi ]

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पॉलीसिथिमिया एक बीमारी है। जिसका शाब्दिक अर्थ है – ‘रक्त में कई कोशिकाएं’। अर्थात रक्त कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि के कारण एक विकार दिखाई देता है, इसे ही पॉलीसिथिमिया कहते है। यह एक काफी गम्भीर बीमारी है। जिसके खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है।

  • पॉलीसिथिमिया वेरा
  • माध्यमिक पॉलीसिथिमिया

पॉलीसिथिमिया वेरा क्या है?

पॉलीसिथिमिया वेरा को प्राइमरी पॉलीसिथिमिया भी कहा जाता है। यह एक प्रकार का रक्त कैंसर होता है। यह अस्थि मज्जा के साथ समस्याओं से उत्पन्न होता है। अस्थि मज्जा अधिकतर हड्डियों के केंद्र में पाया जाता है और आम तौर पर सभी रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स और अधिकांश सफेद रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता है। यह महिलाओं में पुरुष की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। यह 40 साल से कम उम्र के लोगों में ज्यादा देखने को नही मिलता। पॉलीसिथिमिया आम तौर पर पुरुषों को प्रभावित करने वाली दुर्लभ स्तिथि है। यह बीमारी केवल यूवा और वृद्ध व्यक्ति में ही नही बल्कि यह बीमारी विशेष तैर पर बच्चों को भी प्रभावित करती है। पॉलीसिथिमिया का अब तक सटीक कारण अज्ञात है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इस स्तिथि में लगभग सभी लोगों के साथ एक विशिष्ट जीन उत्परिवर्तन जुड़ा हुआ है।

माध्यमिक पॉलीसिथिमिया क्या है?

पॉलीसिथिमिया वेरा की ही तरह माध्यमिक पॉलीसिथिमिया में शरीर में लाल रक्त का उत्पादन हद से ज्यादा बढ़ जाता है, जो बहुत की हानिकारक और जानलेवा साबित हो सकता है। इस बीमारी के चलते मरीज का खून धीरे-धीरे मोटा होता चला जाता है और फिर ये खून शरीर की छोटी वाहिकाओं तक पहुंच नही पाता और उनमें बाधाएं पैदा होती है। पॉलीसिथिमिया वेरा और माध्यमिक पॉलीसिथिमिया में केवल इतना अंतर है कि माध्यमिक पॉलीसिथिमिया अंतर्निहित बीमारी प्रक्रिया जैसे सीओपीडी से जुड़ा हुआ है जबकि पॉलीसिथिमिया पी.वी में ऐसा नही है।

पॉलीसिथिमिया के लक्षण

बहुत से लोग जो पॉलीसिथिमिया जैसी खतरनाक बीमारियों का शिकार हैं, उनमें से ज्यादातर को इस बीमारी के संकेत और लक्षण नही नजर आते । परंतु कुछ लोगों में निम्नलिखित लक्षण पाए जाते हैं जो इस प्रकार हैं :-

  • सिर दर्द की शिकायत होना

इस बीमारी का मुख्य लक्षण सिर दर्द होना है। पॉलीसिथिमिया रोग के कारण मस्तिष्क में जो रक्त प्रवाह जारी है उसमे कमी आ जाती है और भारी सिर दर्द होना एक दिनचर्या बन जाता है। अगर इस बीमारी का समय पर सही इलाज नही किया गया तो ये मामूली सा दिखने वाला सिर दर्द काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

  • जोड़ों में दर्द और शरीर में थकावट महसूस होना:

इस स्तिथि में जोड़ों और बाहों में काफी दर्द महसूस होता है। ऐसे में गर्म पानी से स्नान करना कुछ हद तक लाभदायक साबित हो सकता है। इसी के साथ शरीर में बिना श्रम किये ही अधिक थकावट का एहसास होता है।

  • आंखों के आगे धुंधलापन छाना
  • ज़्यादा पसीना आना
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • पेट दर्द होना
  • खुजली होना विशेष कर स्नान के बाद
  • हाथ, पैर और तलवे में कमजोरी का एहसास होना।

पॉलीसिथिमिया की जटिलताएं

पॉलीसिथिमिया के शिकार व्यक्ति को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ता है :

शरीर में खून के थक्के/टुकड़ों का बन जाना

पॉलीसिथिमिया बीमारी में खून के मोटा होने के कारण शरीर में खून के छोटे छोटे थक्के या टुकड़े बन जाते हैं। खून के ये थक्के शरीर के भिन्न भागों में हो सकते है। यह पैरों के अंदर की गहरी नसों में पाया जाता है। कभी कभी खून के ये थक्के ढीले पर जाते है जिसके कारण ये तैर कर फेफड़ों तक पहुच जाते हैं और वहां जाकर फंस जाते हैं, जोकि एक बहुत ही गंभीर समस्या है। जिसके चलते उसे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

दिल का दौरा पड़ना

करीब 30% लोग जो पॉलीसिथिमिया का शिकार हैं उनकी नसों में खून के थक्के पैदा हो जाते हैं जो दिल का दौरा या फिर स्ट्रोक का मुख्य कारण बन सकते है। इसी के कारण जिस व्यक्ति को पॉलीसिथिमिया की शिकायत है वह अपने चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।

खुजली और अन्य त्वचा की समस्याएं

पॉलीसिथिमिया में मरीज को खुजली और बहुत सी त्वचा की समस्याओं का शिकार होना भी पड़ सकता है। मरीज को अधिक खुजली का एहसास स्नान करने के बाद होता है।

पॉलीसिथिमिया बीमारी के व्यक्ति को खून के अन्य विकारों का भी सामना करना पड़ सकता है जिनमे Myelofibrosis, Myelodysplasia Syndrome और Acute Myeloid Leukemia जैसे विकार शामिल हैं।

पॉलीसिथिमिया बीमारी का इलाज

पॉलीसिथिमिया बीमारी का पता लगाने के लिए चिकित्सक सबसे पहले उससे उसकी चिकित्सा का इतिहास जानता है। जैसे कि उसे कहीं धूम्रपान का सेवन करने की आदत तो नही या फिर वह शराब का सेवन तो नहीं करता है। चिकित्सक मरीज की सावधानी पूर्वक शारीरिक परीक्षा भी ले सकता है जैसे कि ऑक्सीजन की कमी, अत्याधिक मोटापा या पेट के शोर इत्यादि।

इसी के साथ चिकित्सक खून के थक्के बनने से रोकने के लिए कम खुराक वाली एसिटिल सैलिसिलिक जैसी दवाईयां मरीज को प्रदान कर सकता है।

अगर खून में श्वेत रक्त कोशिका की मात्रा अधिक पाई जाती है तो चिकित्सक द्वारा ऐसा इलाज भी बताया जाता है जिससे अस्थि मज्जा द्वारा, रक्त कोशिका उत्पादन में कटौती होती है। परंतु इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते है जोकि इतने आम नहीं है और कई 100 में से केवल एक को होते हैं।

साथ ही चिकित्सक द्वारा कुछ सरल दवाएं भी प्रदान की जाती है जो बहुत ही हल्की दवाईयां होती है जिनका सेवन रोज किया जा सकता है। जिसके सेवन से श्वेत रक्त कोशिका की गिनती और प्लेटलेट्स की गिनती दोनों को कम करने में सहायता मिलती है।

पॉलीसिथिमिया के घरेलू उपचार

  • अधिक से अधिक व्यायाम करें। व्यायाम रक्त प्रवाह में सुधार कर सकता है और खून में थक्के के खतरे को कम करता है।
  • धूम्रपान के सेवन से बचें।
  • चरम तापमान से बचें। जितना हो सके घर से कम बाहर निकलें।
  • अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाएँ।
  • खाने में अधिक से अधिक लहसुन का प्रयोग करें। लहसुन में अनेकों प्रकार के गुण होते है जो एक जड़ी-बूटी के तौर पर काम करते हैं। लहसुन खून को पतला करने में सहायक है।
  • लाल मिर्च को भी अपने खाने में शामिल करें। ये रक्त प्रवाह तेज करने में मदद करती है।

पॉलीसिथिमिया की दवा

पॉलीसिथिमिया के लिए बहुत सी दवाईयां बताई गयी हैं लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की दवाईयों का सेवन न करें।

दवा का नाम : Jakavi 5mg tablet

दवा की कीमत : 24999 रूपए।

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