सर्दी जुकाम की अंग्रेजी दवा [ Sardi Jukam Ki Dawa In Hindi ]

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सर्दी, जुकाम और नजला हो जाने से नाक से तरल बहता है। नाक की श्लैष्मिक कला में शोथ हो जाता है। यही तरल धीरे-धीरे गाढ़ा बलगम सा बन जाता है। नाक बन्द रहती है। आमतौर पर यह रोग ठण्ड लगने अथवा मौसम बदलने पर हुआ करता है। अन्य कारणों से नाक के छिद्रों में धूलकण प्रविष्ट होने, धुएँ से युक्त वातावरण में उठने-बैठने, बच्चों के अधिक चीखने-रोने और चिल्लाने, रात्रि में जागरण करने से, तकिया पर सिर ऊँचा रखने से भी सर्दी-जुकाम (प्रतिश्याय) की शिकायत उत्पन्न हो जाती है। इस रोग में सफेद या पीला कफ नाक से बहने लगता है। (कभी-कभी यह स्राव गरम-गरम और मटमैला होता है) रोगी को खाँसी आती है, नाक में खुजली होती है, छींकें बहुत आती हैं। नाक बन्द हो जाती है। नाक के आगे के भाग में प्रदाह, लाली एवं पीप पैदा हो जाती है। स्वर विकृत हो जाता है। सूंघने की शक्ति घट जाती है। रोगी ज्वर एवं कफ से व्याकुल रहता है ।

इस पोस्ट में हम सर्दी-जुकाम से छुटकारा पाने के लिए अंग्रेजी दवा के बारे में जानेंगे :-

रिडाक्सोन इंजेक्शन (रोश कंपनी) – 2 से 5 मि.ली. तक मांस, चर्म या शिरा मार्ग से दें । ग्लैक्सो कंपनी यही दवा विटामिन सी सेलिन के नाम से तैयार करती है ।

एविल (हैक्स्ट कंपनी) – 1-2 मि.ली. का इंजेक्शन 1-2 बार मांस में लगायें ।

टेरामायसिन (फाईजर कंपनी) – 10-20 मि.ग्रा. प्रति कि.ग्रा. शारीरिक भार के अनुपात से बच्चों को लगायें। वयस्कों को 250 मि.ग्रा. सुबह-शाम (12 घण्टे के अन्तराल से) लगायें ।

कम्बायोटिक (फाईजर कंपनी) – डिस्टिल्स वाटर में घोलकर नित्य 1 सुई मांस में लगायें।

टेरामायसिन कैपसूल (फाईजर कम्पनी या रेस्टेक्लिन कैपसूल (साराभाई कम्पनी) अथवा अन्य टेट्रासायक्लिन कैपसूलों को 1-2 कैपसूल की मात्रा में 4-6 घण्टे पर सेवन करायें।

अन्य पेटेण्ट औषधियाँ – कोसाविल (हैक्स्ट कंपनी), पावरिन (जी. मैनर्स कंपनी), कोड्रल (वरोज वैल्कम कंपनी), विक्स एक्सन 500, एक्सन 500 (निकोलस कंपनी), अल्ट्राजिन (जी. मैनर्स), एस्पाल्जिन, डिस्ट्रान (ज्योफ्रेमैनर्स कंपनी), क्रोसिन (डूफार कंपनी) इत्यादि का तथा पेय (सीरप के रूप में) ट्रायमिनिक (वारनर कंपनी), कोडिलेक्स (ए. एफ. डी. कंपनी), ओसिमेल विद कोडीन (यू. डी. एच. कम्पनी), कौस्कोपिन प्लस (बी. इवान्स), ग्रीलिंक्टस (ग्राफिन लैब.), फेन्सेडील (मे एण्ड बेकर कंपनी) का प्रयोग करें । बाह्य प्रयोग हेतु ऐन्ड्रीन नैजल ड्राप्स (जोहन वाइथ कंपनी), नैरेसोल नैजल ड्राप्स (ऐलेम्बिक) तथा ओट्रीबिन (सीबा कंपनी) इत्यादि का प्रयोग गुणकारी है।

बच्चों को-डिस्प्रिन (रेकिट्स कम्पनी) – आधी से एक टिकिया प्रत्येक 4 घण्टे के अन्तराल से या डोलोपार (माइक्रो लैब) सीरप शारीरिक भार के अनुसार 1.25 से 5 मि.ली. दिन में तीन बार दें । (नोट – यकृत वृक्क विकृति में डोलोपार का सेवन न करायें) माइक्रोपायरिन (निकोलस) 3 से 6 वर्ष के बच्चों को आधी टिकिया तथा 6 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को 1 टिकिया भोजनोपरान्त दिन में तीन बार खिलायें, अथवा नियोजीन (ए एफ. डी. कम्पनी) भोजनोपरान्त चौथाई से आधी टिकिया दिन में 2-3 बार खिलायें ।

वृक्क एवं यकृत की विकृति में ‘नियोजीन’ का प्रयोग सावधानी से करें। बच्चों के कण्ठ, छाती, पंजर और पीठ पर विक्स वेपोरव मलहम (आइण्टमेण्ट) की मालिश करायें तथा नाक से ‘विक्स इन्हेलर‘ को सुंघवायें ।

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