Shighrapatan Ka Biochemic Upchar – शीघ्रपतन का बायोकैमिक चिकित्सा

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बायोकैमी में शीघ्रपतन नामक कोई रोग नहीं है, अतः इसकी चिकित्सा प्रमेह तथा नपुन्सकता की ही भाँति लक्षणों के आधार पर की जाती है । निम्नलिखित बायोकैमी औषधियों का लक्षणानुसार प्रयोग लाभकारी सिद्ध होता है –

कैल्केरिया फॉस 6x, 12x – हस्त-क्रिया के कारण शुक्रमेह तथा शीघ्रपतन, एलवोमिन के समान वीर्य निकलना, गुर्दे अथवा मूत्राशय में पथरी आदि के लक्षणों में ।

नेट्मम्यूर 3 – अधिक सम्भोग के कारण दुर्बलता, विषयेच्छा में अधिक कमी, प्रियतमा का ध्यान आने पर भी उत्तेजना अधिक न होना, वीर्य स्खलित हो जाना ।

कालीफॉस 6x – विषय की इच्छा अत्यधिक, परन्तु मैथुन के समय इन्द्रिय का ढीला पड़ जाना, हस्त-क्रिया, शुक्रमेह अथवा सूजाक के कारण शीघ्रपतन एवं वीर्य-विकार, रात्रि में स्वप्नदोष होना, आँखों के सामने अँधेरा छाना आदि लक्षणों में ।

नेट्रमफॉस 12x – सम्भोग की अत्यधिक इच्छा, वीर्य-स्खलन के बाद इन्द्रिय का ढीला तथा ठण्डा पड़ जाना, लगातार कई दिनों तक स्वप्नदोष होना, वीर्य का पानी जैसा पतला हो जाना तथा अशलील विचार आते ही वीर्य-स्खलन हो जाना आदि लक्षणों में इस औषध का सेवन कराना चाहिए ।

साइलीशिया 30x – मूत्र में लाल रेत अथवा वीर्य जाना, विषय – इच्छा में कमी अथवा उसका समाप्त हो जाना, दुर्गन्ध युक्त स्वेद, अण्डकोषों में खुजली, हर समय स्त्री का ध्यान बना रहना तथा स्त्री की याद आते ही वीर्य-स्खलित हो जाना आदि लक्षणों में ।

फेरमफॉस 30x – बिना इच्छा के ही वीर्यपात, अण्डकोषों पर सूजन, हाथ-पाँवों में गर्मी आदि लक्षणों में ।

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