ट्रिटिकम रिपेन्स [ Triticum Repens Homeopathy In Hindi ]

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[ ताजी जड़ से टिंचर तैयार होता है ] – पेशाब की कई बीमारियाँ, मूत्र-नली में बहुत अधिक उपदाह, मूत्रपिंड का प्रदाह, सिस्टाइसिस और प्रमेह-रोग में इसका व्यवहार होता है।

जहाँ ऐसा दिखाई दे – रोगी बड़े कष्ट से पेशाब करता है, पेशाब का जल्दी-जल्दी वेग होता है, वेग बिल्कुल ही रोक नहीं सकता। श्लेष्मा या पीब की तरह स्राव ( पैरिरा ब्रावा ), पेशाब गाढ़ा ( पतला इयुरिया ), इसके साथ ही मूत्रयंत्र की श्लैष्मिक-झिल्ली का उपदाह ( इरिटेशन ), मूत्रकृच्छ, मूत्राशय-मुखशायी ग्रन्थि, बढ़ने के निमित्त पेशाब में कष्ट, वहां ट्रिटिकम रिपेन्स को स्मरण करें। दवा दिन में 3-4 बार सेवन करना चाहिए। Trades canten – कष्टदायक पेशाब, प्रमेह की तरह स्राव निकलना, अण्डकोष में प्रदाह में ट्रिटिकम रिपेन्स लाभ करता है।

क्रम – Q, 2x शक्ति।

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