Yellow Fever Treatment In Homeopathy – पीला ज्वर

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2006 James Gathany This 2006 photograph depicted a female Aedes aegypti mosquito as she was in the process inserting her fascicle through the skin surface of her host. She then proceeded to obtain a "blood meal", which normally would be from an unsuspecting host, but in this case, the CDC's biomedical photographer, James Gathany, had volunteered his own hand in order to entice the insect to lite, and feed. As it would fill with blood, the abdomen would become distended, thereby, stretching the exterior exoskeletal surface, thereby, causing it to become transparent, and allowing the collecting blood to become visible as an enlarging red mass. See PHIL # #8923, for this mosquito's appearance in its abdominally-distended state. As the primary vector responsible for the transmission of the Flavivirus Dengue (DF), and Dengue hemorrhagic fever (DHF), the day-biting Aedes aegypti mosquito prefers to feed on its human hosts. Ae. aegypti also plays a major role as a vector for another Flavivirus, "Yellow fever". Frequently found in its tropical environs, the white banded markings on the tarsal segments of its jointed legs, though distinguishing it as Ae. aegypti, are similar to some other mosquito species. Also note the lyre-shaped, silvery-white markings on its thoracic region as well, which is also a determining morphologic identifying characteristic.

नमी वाले स्थानों, पानी के जहाजों, नावों आदि में एक विशेष प्रकार का मच्छर पाया जाता है जिसके काटने से ज्वर आ जाता है, इसे ही पीला ज्वर कहते हैं । यही कारण है कि यह ज्वर नाविकों को ही बहुतायत से होता है । इस ज्वर में- कॅपकॅपी आना, नाड़ी तेज चलना, ठण्ड लगना, घबराहट होना, भूख न लगना इत्यादि लक्षण प्रकट होते हैं ।

कैम्फर 30– कॅपकॅपी के साथ बुखार आना, नाड़ी तेज चलना, ठण्ड लगना, बेचैनी, पूरे शरीर में दर्द होना, शरीर से दुर्गन्ध आना, मूत्र कम हो जाना- इन लक्षणों में प्रयोग करनी चाहिये ।

एकोनाइट 30– ज्वर का आक्रमण एकदम तीव्र हो, नाड़ी और श्वास की गति तेज हो, घबराहट हो तो इस दवा का प्रयोग करें ।

जेल्सीमियम 30- एकोनाइट से लाभ न होने पर प्रयोग करें |

आर्सेनिक एल्ब 30– अन्य लक्षणों के साथ सुस्ती भी हो तो इसका प्रयोग करना चाहिये |

समयानुसार ज्वर आने पर दी जाने वाली औषधियाँ

  • प्रातः 7 बजे से आने वाला बुखार — यूपेटोरियम पर्फ, नक्सवोमिका पोडोफाइमल
  • प्रातः 7 बजे से 9 बजे तक या 9 बजे से 11 बजे तक आने वाला बुखार जो ठण्ड लगकर आये — नैट्रम मयूर
  • प्रातः 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक आने वाला बुखार जो ठण्ड लगकर आये — चिनिनम सल्फ
  • दोपहर 1 बजे या दोपहर 2 बजे तक आने वाला बुखार या रात 12 बजे बुखार जिसमें अत्यन्त प्यास — आर्सेनिक एल्ब
  • दोपहर 1 बजे के बाद आने वाला बुखार — पल्सेटिला
  • दोपहर बाद 3 बजे आने वाला बुखार — एन्टिम टार्ट, एपिस मेल, लाइकोपोडियम, पल्सेटिला
  • शाम 4 बजे या 5 बजे आने वाला बुखार — लाइकोपोडियम, पल्सेटिला
  • शाम 5 बजे आने वाला बुखार — काली कार्ब, थूजा
  • शाम 6 बजे आने वाला बुखार — हिपर सल्फर, काली कार्ब
  • शाम 7 बजे आने वाला बुखार — हिपर सल्फर, लाइकोपोडियम, रस्टक्स
  • रात 12 बजे आने वाला बुखार — आर्सेनिक सल्फ
  • रात 3 बजे आने वाला बुखार — थूजा
  • प्रातः 11 बजे से रात्रि 11 बजे तक आने वाला बुखार जिसमें छाती पर बोझ लगता हो — कैक्टस ग्रांडीफोलोरा
  • दोपहर बाद 3 बजे से रात्रि 3 बजे तक रहने वाला बुखार जो मध्य रात्रि में अधिक बढ़े — बेलाडोना
  • शाम 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक रहने वाला बुखार — लाइकोपोडियम
  • रात्रि को बुखार बढ़ने पर — कैम्फर
  • निश्चित समय पर ही बुखार आना — सैबाडिला, सिड्रॉन
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