एट्रोपिया [ Atropia Homeopathy In Hindi ]

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[ बेलाडोना का उग्रवीर्य पदार्थ ] – स्नायुमण्डल पर इसकी प्रधान क्रिया होती है। पाकस्थली की पुरानी बीमारी – पाकस्थली में तेज दर्द, खाई हुई चीज कै हो जाना, खाने के बाद पेट में दर्द होने लगना, पाकस्थली में बहुत अधिक अम्ल इकट्ठा होना, रह-रहकर तेज और तकलीफ देने वाला अम्लशूल का दर्द होना, दृष्टि शक्ति की गड़बड़ी, जैसे – भ्रमपूर्ण देखना, दूना देखना, सब चीजें बड़ी दिखाई देना, आँख आने के बाद नाना प्रकार की बीमारियाँ और प्रसूति का आक्षेप ( puerperal convulsion ), पेरिटोनाइटिस इत्यादि कई बिमारियों में इसका उपयोग करने से विशेष फायदा होता है।

एलोपैथिक में – एट्रोपियन सल्फ ; आँख की पुतली को फैला देने और आँख में पीड़ा उत्पन्न करने वाले संचित पदार्थों को पक्षाघात के समान सुन्न कर देने के लिए इसका बाहरी उपयोग होता है। आयराइटिस आदि रोगों में एलोपैथ चिकित्सक इसका उपयोग पेटेण्ट दवा की तरह करते हैं।

एट्रोपिन सल्फ – मॉर्फिया, ओपियम, प्रुसिक एसिड और फाइजस्टिग्मा की क्रिया की विरोधी दवा है। 120 ग्रेन एट्रोपिया से 1 ग्रेन मॉर्फिया की विष क्रिया नष्ट होती है ; इसका भीतरी सेवन या हाइपोडर्मिक इंजेक्शन दोनों ही रूप में उपयोग होता है। local anaesthesia अर्थात शरीर का कोई भी छोटा सा स्थान सुन्न और उसकी चेतना शक्ति गायब करने के लिए इसका बाहरी प्रयोग होता है ; इसके द्वारा आक्षेप बंद किया जा सकता है और शरीर के कितने ही स्वाभाविक स्राव, जैसे स्तन का दूध आदि सूखा डालना भी किया जा सकता है।

मात्रा – एट्रोपिन सल्फ – 1/60 से 1/20 आदि ( बोरिक )

क्रम – 12 से 30 शक्ति।

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