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Lungs Diseases

Homeopathic Remedies For Goitre In Hindi [ गिल्लड़ का होम्योपैथिक दवा ]

गले की थाइराइड ग्रन्थि के बढ़ जाने पर यह रोग होता है । 'गिल्लड़' सख्त होता है । इस रोग में गले में संकोचन होता है । इस रोग के रोगी का शरीर टी. बी. के रोगी की भाँति क्षीण होता चला…

Homeopathic Remedies For Choked Throat In Hindi [ गला रुंधना ]

गला रुँधने के लक्षणों में निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग हितकर सिद्ध होता है :- ऐसाफिटिडा 3 - रोगी के पेट से गले की ओर एक गोला चढ़ने जैसा अनुभव जिसे नीचे धकेलने के लिए रोगी…

Homeopathic Medicine For Mucus In Throat Problem In Hindi

गले में श्लेष्मा गिरने अथवा होने के लक्षण में निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग हितकर सिद्ध होता है :- ऐलूमिना 6 - गले में गाढ़ा थक्का अटके होने जैसा अनुभव तथा गाढ़े थूक के लक्षणों…

Homeopathic Remedies For Diphtheria In Hindi [ डिप्थीरिया का होम्योपैथिक दवा ]

यह एक प्रकार का 'संक्रामक-रोग' है, जो एक प्रकार के विष तथा जीवाणु के रक्त में प्रविष्ट हो जाने पर उत्पन्न होता है । यह रोग अधिकतर बच्चों को होता है, परन्तु बड़ी आयु के लोगों को भी…

Homeopathic Medicine For Oesophagitis In Hindi [ भोजन नली में जलन ]

गले से पेट तक जाने वाली भोजन-नली, जिसमें होकर भोजन तथा पानी पेट में पहुँचता है, उसे अँग्रेजी में 'गुलेट' (Gullet) अथवा 'ऑइसोफेगस' (Oesophagus) कहा जाता है । इस रोग में…

Homeopathic Remedy For Tracheitis In Hindi [ श्वास-नली का शोथ ]

गलकोष के पश्चात् श्वास-नली अथवा वायु-नली (Windpipe) शुरू होती है । इसी का प्रारम्भिक-भाग 'टेंटुआ' अथवा 'स्वर-यन्त्र' (Larynx) के रूप में दिखायी देता है। यहाँ पर शोथ हो जाने पर गला…

Homeopathic Medicine For Swollen Uvula And Quinsy In Hindi

सर्दी के कारण गले में दर्द, ऊँचे स्वर से बोलना, गाना, चिल्लाना अथवा व्याख्यान देना, स्वर-भंग की हालत में भी चिल्लाना तथा उपदंश का घाव-इन सब कारणों से गल-क्षत तथा उप-जिहवा अर्थात्…

Homeopathic Remedies For Tonsillectomy In Hindi [ टॉन्सिलों के काट देने के बाद के उपसर्ग ]

कभी-कभी शल्य-चिकित्सक टॉन्सिलों को काट कर निकाल देते हैं, उसके फलस्वरूप अनेक प्रकार के उपसर्ग प्रकट हो सकते हैं । उन उपसर्गों की चिकित्सा नीचे लिखे अनुसार करनी चाहिए :- सल्फर…

Homeopathic Remedies For Tonsillitis In Hindi [ टॉन्सिल का होम्योपैथिक दवा ]

तालु के दोनों ओर बादाम जैसी ग्रन्थियाँ होती हैं। इनमें से किसी एक अथवा दोनों ग्रन्थियों के लाल, गर्म तथा फूल जाने को 'तालुमूल-प्रदाह' कहते हैं। यह रोग 'नया' तथा 'पुराना' दो प्रकार…

Homeopathic Remedies For Pharyngitis In Hindi

'तालु' को ही 'गलकोष' अथवा अंग्रेजी में 'फैरिंक्स' (Pharynx) कहा जाता है। यह जीभ के अन्तिम भाग का वह स्थान है, जहाँ श्वास-नली, अन्न-नली आदि का संगम होता है। इस स्थान पर शोथ (सूजन)…

Homeopathic Remedies For Laryngitis In Hindi [ गले का शोथ ]

सर्दी लगना, पानी में भीगना, गले में धुंआ अथवा धूलि के कण चले जाना, जोर से गाना या व्याख्यान देना, सीलन भरी जगह में रहना तथा हवा की गति का अचानक बदल जाना - इन कारणों से…

गले में दर्द, खराश का होम्योपैथिक दवा [ Homeopathic Medicine For Sore Throat In Hindi ]

विभिन्न कारणों से गले में छोटी-बड़ी अनेक प्रकार की बीमारियाँ हो जाया करती हैं। अन्न-नली, श्वास-नली, तालु-मूल, गल-कोष, उप-जिह्वा-ये सभी गले के ही विभिन्न भाग हैं । गले की दुखन में…

खांसी का होम्योपैथिक इलाज – Khansi Medicine In Hindi

खांसी की मुख्य-मुख्य औषधियां खांसी को समझने के लिये यह समझना आवश्यक है कि मुख से फेफड़ों तक जो श्वास-प्रणाली है उसके भिन्न-भिन्न स्थानों की शोथ से खांसी होती है, और प्रत्येक स्थान…

बलगम का इलाज

रोमी की खांसी के लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक है। सूखी एवं बलगम रहित (Nonproductive) खांसी धूल अथवा किसी अन्य बाहरी कण के कारण तो हो ही सकती है, इसके अलावा विषाणुजनित निमोनिया,…

दमा का इलाज

श्वासतंत्र में किसी रुकावट की वजह से सांस फूलने लगती है इसी को दमा कहते हैं। फेफड़ों के कोष्ठों में श्लेष्मायुक्त पदार्थ (म्यूकस) जमने की वजह से, कोष्ठों में सिकुड़ाव एवं सूजन आने…

Goiter Treatment in Hindi – घेंघा का इलाज

यह आम जानकारी की बात है कि हमारे भोजन में कई प्रकार के खनिज एवं तत्त्व जैसे कैल्शियम, लोहा, फॉस्फोरस आदि का होना अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। ऐसा ही एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व…

tonsil ka ilaj in hindi – टॉन्सिल का इलाज

स्ट्रप्टो कोकस हीमोलिटिकस नामक जीवाणु टॉन्सिल के लिए जिम्मेदार है। यह रोग चौदह वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को अधिक होता है। एक बार टॉन्सिल की बीमारी हो जाने के उपरांत रोग बार-बार हो…

Angina Pectoris Treatment – हृदय शूल का इलाज़

इस रोग में हृदय में दर्द होने लगता है जो पिछले हिस्से तक फैलता जाता है । छाती में जलन, जी मिचलाना, कमजोरी, नाड़ी का अनियमित हो जाना, साँस लेने में कठिनाई आदि लक्षण प्रकटते हैं । यह…
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