Dysuria Treatment In Homeopathy

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इस रोग में रोगी को मूत्र रुक-रुककर, बूंद-बूंद के रूप में बहुत ही कष्ट के साथ होता है। चूंकि मूत्र एक बार में ही खुलकर नहीं होता। अतः उसे बार-बार मूत्र-त्याग हेतु जाना पड़ता है ।

स्पिरिट कैम्फर Q- जलन तथा कष्ट के साथ मूत्र-त्याग होने पर यह दवा लाभप्रद है, इससे रोगी को तुरंत आराम मिलने लगता है ।

कैन्थरिस 6,30- बहुत दर्द, कतरने जैसा अनुभव होना, मूत्र में खून के से कतरे आना- इन लक्षणों के साथ मूत्रकृच्छता होने पर लाभप्रद है। विशेषकर पुरुषों के रोग में लाभकर है ।

कोपेवा 3, 30- मूत्र का रुक-रुककर आना, मूत्र-नली में दर्द, जलन, आदि लक्षणों में लाभप्रद हैं । विशेषकर स्त्रियों के रोग में लाभकर है ।

बोरैक्स 30- मूत्राशय-नली में शोथ और दर्द के भय से रोगी मूत्र-त्याग न करना चाहे तो लाभप्रद है । विशेषकर बच्चों के रोग में लाभकर है ।

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