छोटे जोड़ों में दर्द और सूजन की होम्योपैथिक दवा || Homeopathic Medicine For Small Joint Pain In Hindi

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Homeopathic Medicine For Small Joint Pain: होम्योपैथी में Eosinum बहुत ही असरदार और जरुरी दवाई है। यह दवाई कैंसर और Polyarthritis के लिए बहुत ही लाभदायक दवाई है।

शरीर पर Eosinum के पड़ने वाले प्रभाव

  1. Eosinum शरीर की कोशिकाओं में अपना असर करती है, शरीर की जो कोशिकाएं कैंसर कारक रहती है यह दवाई उन कोशिकाओं को ठीक करती है।
  2. यह दवाई शरीर के छोटे-छोटे जोड़ों के लिए लाभदायक होती है, जैसे Finger Joints पर यह असर करती है। यह दवाई इन जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करती है।

वह कौन से लक्षण है जब Eosinum लेनी चाहिए ?

  1. यदि आपको भ्रम की समस्या है, और आपका दिमाग कोई भी भ्रम बना लेता है तो यह दवाई लाभदायक है।
  2. यदि आपके हाथ, पैर के तलवों में तथा उँगलियों के आस-पास और जोड़ों में बहुत जलन होती है तो यह दवाई बहुत असरदार है।
  3. अगर आपकी हथेलियां लाल हो जाये और जीभ भी लाल हो जाये तो यह दवाई फायदेमंद है।
  4. हथेलियों में अगर सुन्नपन हो तो भी यह दवाई ली जा सकती है।
  5. यदि आपके घुटने सूज जाते है और उसमे जलन होती है तो यह दवाई ली जा सकती है, किसी भी बीमारी में अगर शरीर में जलन हो, खासतौर पर अगर कैंसर की समस्या में जलन हो शरीर में तो यह दवाई लेनी चाहिए।
  6. अगर आपको खुजली होती है शरीर के किसी हिस्से पर और उसके बाद दूसरे किसी हिस्से में भी खुजली होने लगे तो यह दवाई असरदार है।

किन किन बीमारियों में Eosinum लेनी चाहिए ?

Eosinum बहुत असरदार दवाई है कैंसर के लिए, कैंसर मरीज को यह दवाई देनी चाहिए, कई बार देखा गया है की 3rd स्टेज के मरीज का कैंसर भी ठीक हो जाता है इस दवाई से जबकि डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए होते हैं। Eosinum की दो-दो बून्द दिन में तीन बार लेनी है अगर आपको कैंसर है तो।

अगर आपको Polyarthritis की समस्या है, अगर आपके जोड़ों में दर्द रहता है, आप अच्छे से चल नहीं पाते या आपकी रीढ़ की हड्डी में दर्द होती है और अगर आपको जलन होती है शरीर के किसी हिस्से या जोड़ों में तो Eosinum बहुत ही फायदेमंद दवाई है। Eosinum की दो-दो बून्द दिन में तीन बार पीनी है। इसका सेवन दो से तीन महीने तक लगातार करने पर यह समस्या जल्दी ठीक हो जाएगी।

यह दवाई खुजली की समस्या में भी लाभदायक है, आपको चाहे फंगल इन्फेक्शन के कारण खुजली हो या किसी भी अन्य कारण से खुजली हो यह दवाई बहुत ही लाभदायक है। इस समस्या में भी Eosinum की दो-दो बून्द दिन में तीन बार लेनी है।

Chote Jodo me Dard ka Homeopathic ilaj

छोटे जोड़ों में दर्द और सूजन के इलाज के लिए होम्योपैथी के उपयोग ने साइड इफेक्ट के जोखिम के बिना राहत प्रदान करने की क्षमता के कारण ध्यान आकर्षित किया है। यह दावा कई नैदानिक ​​परीक्षणों द्वारा समर्थित है, जिन्होंने दिखाया है कि होम्योपैथिक उपचार विभिन्न प्रकार के गठिया में सकारात्मक परिणाम देते हैं। सही होम्योपैथिक दवा का चयन दर्द और जोड़ों की कठोरता को काफी कम कर सकता है, जिससे रोगियों को प्रभावी और स्थायी राहत मिलती है। अन्य उपचारों के विपरीत, होम्योपैथी लम्बे समय में समाधान प्रदान करती है जो न केवल लक्षणों को कम करती है बल्कि स्थिति की प्रगति को भी धीमा कर देती है।

सर्वोत्तम परिणामों के लिए, रोगियों के लिए निर्धारित दवा आहार का पालन करना महत्वपूर्ण है। हालाँकि, यह देखा गया है कि कई मरीज़ कुछ सुधार देखने के बाद अपनी दवा बंद कर देते हैं, जिससे उपचार की प्रभावशीलता में बाधा आ सकती है। छोटे जोड़ों में दर्द और सूजन के लिए उचित रूप से बताई गई होम्योपैथिक दवा स्थिति की गंभीरता को बढ़ाए बिना, दर्द, कठोरता और सूजन जैसे लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार का वादा करता है।

Bryonia: यह तब सर्वोत्तम है जब हिलने-डुलने से दर्द बढ़ जाता है और गर्माहट तथा मध्यम दबाव से राहत मिलती है। यह सूजन, गर्म और सूजन वाले जोड़ों के लिए प्रभावी है।

Ledum Pal : गठिया और बड़े जोड़ों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो निचले हिस्सों में शुरू होता है और चढ़ता है। यह जोड़ों में कैल्सियम जमाव के लिए उपयोगी है और ठंडे चीज से दर्द में आराम आने पर विशेष रूप से दिया जाता है।

Colchicum: गाउट के लिए एक रामबाण दवा है, जिसमें भोजन की गंध के प्रति अरुचि और जोड़ों में सूजन होती है। यह गति से बिगड़ी हुई स्थितियों तथा गर्मी से आराम के लिए प्रभावी है।

Rhus Tox: नम मौसम से बढ़े हुए गठिया के लिए आदर्श दवा है, लगातार चलने पर लक्षणों में सुधार होता है लेकिन आराम करने पर स्थिति बिगड़ जाती है।

Dulcamara: ठंड और गीली स्थितियों से उत्पन्न गठिया के लिए उपयुक्त दवा है, खासकर जब तापमान में उतार-चढ़ाव महत्वपूर्ण हो।

Pulsatilla: यह दवा ऐसे दर्द को संबोधित करता है जो स्थान बदलता है, रात में बढ़ता है, और गति और खुली हवा के साथ सुधार होता है। इसका रोगी अपने सौम्य, शांत प्रभाव के लिए जाना जाता है।

Guaiacum: सिफिलिटिक या ट्यूबरकुलर वाले व्यक्तियों में गठिया का रोग जिसमे गर्मी और गति से दर्द बढ़ जाता है।

Kali Carb : तेज, जलन वाले दर्द से राहत देता है जो ठंडे अनुप्रयोगों से अस्थायी रूप से कम हो जाता है, थोड़ी सी हलचल से लक्षण बिगड़ जाते हैं।

Rhododendron: आमवाती दर्द जो विशेष रूप से तूफानी मौसम से बढ़ जाता है लेकिन गर्मी से कम हो जाता है।

Phytolacca Decandra : पुराने दर्द, हड्डियों और जोड़ों में दर्द को लक्षित करता है, रात में और गर्मी से लक्षण तेज हो जाते हैं, और ठंडे अनुप्रयोगों को प्राथमिकता दी जाती है।

नोट :- यह दवाई आसानी से नहीं मिलती है, किसी बड़ी होम्योपैथी दूकान पर ही यह दवाई मिल सकती है, आप WSI या SBL या Dr. Reckeweg में से किसी की भी दवाई ले सकते है।

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