अंडकोष की नसों में सूजन और दर्द का होम्योपैथिक इलाज और दवा || Homeopathy For Testicular Pain In Hindi

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इस पोस्ट में हम अंडकोष में दर्द, सूजन, लालीपन इत्यादि सभी समस्या को ठीक करने की होम्योपैथिक दवा की चर्चा करेंगे। होमियोपैथी में अंडकोष से सम्बंधित सभी दवा और उसके लक्षण को यहाँ बताया गया है। आप अपने लक्षण का मिलान करने बताया गया दवा का सेवन कर सकते हैं।

  • ठण्ड लगकर रोग होना – रस टक्स, पल्स;
  • चोट जनित – अत्यन्त तनावपूर्ण दर्द के साथ अंडकोष कड़ा – आर्निका;
  • प्रमेहजनित रोग के कारण – हेमैमेलिस, क्लेमैटिस इरेक्टा, पल्स, कैनाबिस, रोडोडेंड्रोन;
  • रोग पुराना होने पर – एसिड फ्लोर, रोडोडेंड्रोन;
  • बहुत तेज दर्द – रोडोडेंड्रोन;
  • अंडकोष का एक शिरा फूल जाना – मर्क, पल्स, रोडोडेंड्रोन, हेमैमेलिस, क्लेमैटिस इरेक्टा;
  • अंडकोष में फोड़ा – बेलाडोना, हिपर, केलि सल्फ़, साइलि;
  • नया प्रदाह, प्रदाहित स्थान लाल रंग का, स्पर्श सहन न होनेवाला दर्द – बेलेडोना;
  • स्पमेट्रिक कार्ड फूला हुआ – आर्निका, पल्स, सर्सापैरिल्ला, आरम मेट;
  • अंडकोष का न्यूरैलिज्या – आरम, बर्बेरिस, कोलोसिंथिस, नैजा, एसिड आक्जै;
  • टेस्टिस का छोटापन – आरम मेट, करबो एनि, स्टैफिसैग्रिया, केलि आयोड;
  • अंडकोष में हर्निया – मैग म्यूर, नक्स वोमिका;
  • हाइड्रोसिल (शिशुओं का) – एपिस, ऑरम मेट, क्लेमैटिस, पल्स, पोडोफाइलम, साइलीसिया;
  • अंडकोष का कर्सिनोमा – आर्सेनिक, आरम, बेलाडोना, कोनियम, फाइटोलक्का, साइलीसिया, सल्फर;
  • वेरीकोसील – एस्कुलस, आर्निका, आरम, एसिड फ्लोर, कैल्के;
  • एपीडीडीमिटिस – एग्नस, ऑरम, हैमामेलिस, फाइटोलक्का, पल्स, रोडोडेंड्रोन, रस टॉक्स ।

ब्रोमियम 30 ch – अंडकोष फूल जाता है, गर्म व कड़ा होता है, दर्द जोकि हिल-डोल से बढ़ जाता है।

कैलेडियम 30 ch – एक्जिमा, अंडकोष का चमड़ा मोटा होता है। लिंग में प्रुराइटिस, खुजलाता है और फूल जाता है ।

कैल्क फ्लोर 30 ch – अंडकोष में जल संचय होता है, फूलता है ।

एनिलिनम 30 ch – लिंग और अंडकोष में दर्द और फूले रहते हैं, मूत्रनली में ट्यूमर में लाभदायक है।

क्लेमैटिस 30 ch – प्रमेह का स्त्राव बंद होकर अथवा ठण्ड लगकर सूजन, दाहिनी तरफ का अंडकोष अधिक आक्रान्त होने के कारण स्पर्मेटिक कोर्ड फूलकर मोटा होना, भयानक दर्द ।

एपिस मेल 30 ch – प्रदाह, खुजली, जलन, दर्द, अंडकोष व मलद्वार फूले, डंक मारने जैसा दर्द ।

हैमामेलिस 30 ch – प्रदाह, आक्रान्त स्थान में खूब तनावपूर्ण दर्द, स्पर्मेटिक कोर्ड में दर्द व सूजन। नये प्रदाह में- हैमोमेलिस; पुराने प्रदाह में- एसिड फ्लोर ।

फाइटोलक्का 30 ch – प्रमेह या सेकेंडरी सिफिलिस जनित एकशिरा। अंडकोष में यन्त्रायुक्त सूजन व कड़ापन, दर्द – लिंग और पेरिनियम तक फैलता है ।

कोनियम 30 ch – चोट लगाकर रोग होने पर अधिक उपयोगी है, अंडकोष फूला व पत्थर की तरह कड़ा ।

मर्क-आयोड-रूब 30 ch – गर्मी रोग जनित बाईं ओर का अंडकोष बढ़ना, दाहिनी तरफ का अंडकोष में स्पर्श सहन न होनेवाला दर्द ।

पल्सेटिला 30 ch – प्रमेह स्त्राव बन्द होकर, ताप से दर्द का बढ़ना, अंडकोष फूलकर मोटे हो जाना, कमर में दर्द, मिचली, इससे रुका हुआ स्त्राव फिर होने लगता है ।

रोडोडेंड्रोन 30 ch – अंडकोष फूला, कड़ा, दर्द जोकि पेट तक फैलती है, प्रमेह के बाद फूलना, कड़ा होना, पुरानी बीमारी – वातजनित प्रदाह (प्रमेह रूक जाने के कारण सूजन – क्लिमे, रोडो, पल्स ) ।

एम्पीलोप्सिस 30 ch – अंडकोष में जल जमने उपयोगी है।

मर्क सॉल 30 ch – गुदा और अन्य स्थानों की ग्रन्थि की सूजन और अंडकोष के रोग ।

ऐसिड फ्लोर 30 ch – बहुत दिनों का पुराना अंडकोष-प्रदाह ।

ऑरम मेट 30 ch – दाहिनी तरफ का अंडकोष फूला हुआ में उपयोगी

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