GERD, Acid Reflux की समस्या का होम्योपैथिक इलाज | Acid Reflux Ka Homeopathic Medicine In Hindi

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इस लेख में हम GERD, सीने में जलन, कड़वा पानी मुँह में आना, खट्टी डकारें आने की समस्या को ठीक करने की मुख्य होम्योपैथिक दवा की चर्चा करेंगे।

GERD का अर्थ है गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज, यह वो अवस्था होती है जिसमें पेट में बनने वाला एसिड एसोफैगस तक आ जाता है। कई लोगों को ऐसी समस्या होती है कि बाहर का कुछ भी खाने पीने से या मसालेदार खाना खाने से एसिड बनना और एसिड का एसोफैगस तक आना, सीने में जलन, कड़वा पानी मुँह में आना, खट्टी डकारें आने की समस्या हो जाती है। जिन लोगों को हफ्ते में दो बार से ज़्यादा एसिड रिफलक्स (acid reflux) का सामना करना पड़ता है उन्हें GERD होने की खतरा होता है।

GERD की समस्या होने पर बहुत सारे लोग H2 ब्लॉकर्स और ऐन्टाएसिड का इस्तेमाल करते हैं जोकि तत्काल राहत देता है, जबतक दवा लेते हैं तबतक ठीक रहता है, दवा नहीं लेने से समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। होमियोपैथी में कई अच्छी-अच्छी दवाएं हैं जो GERD की समस्या को पूरी तरह से ठीक कर देता है।

अधिक समय न लेते हुए GERD की होम्योपैथिक दवाओं की चर्चा करते हैं :-

सबसे पहली दवा Robinia 30 – इस दवा का लक्षण है कि पेट में हमेशा ही भार मालूम होना, मुंह में खट्टा पानी भरना, खट्टी चीजों की कै, डकार या उल्टी जो कुछ होता है, वह बहुत ही खट्टा, यहाँ तक कि उनसे दाँत तक खट्टे हो जाते हैं, सांस में भी खट्टी गंध निकलती है और यही सब इस दवा के प्रधान लक्षण है। पाकस्थली में अम्ल होने की वजह से जो सिर-दर्द होता है, रोबिनिया उसमें भी फायदा करती है, अम्ल की वजह से पेट में जलन होती है, पेट में एक तरह का खोंचा मारने की तरह दर्द होता है, यह दर्द और जलन छाती और दोनों कन्धो के बीच में चले जाते हैं। ऐसे लक्षणों में Robinia 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लेना है।

दूसरी दवा asafoetida 30 – ऐसाफेटिडा का पेट उर्ध्वगामी वायु का मूर्त-चित्रण है। ऐसा लगता है कि वायु का निकास नीचे से बिल्कुल बन्द हो गया है। रोगी ‘प्रतिगामी अग्र-गति’ से पीड़ित हो जाता है। देखनेवाले को समझ नहीं पड़ता कि पेट में से इतनी हवा ऊपर कैसे निकल रही है। हर सेकेंड बन्दूक की आवाज की तरह डकार छूटते हैं जिन पर रोगी का कोई बस नहीं होता। जो कुछ खाता है गैस बन जाती है, जलन होती है और डकार आती है। ऐसे लक्षणों में asafoetida 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लेना है।

Iris versicolor 30 – जीभ, गला, पेट, आंतें, पैंक्रियास इत्यादि में जलन इसका मुख्य-लक्षण है। इस जलन के साथ खट्टे पित्त का वमन होता है। यह वमन इतना खट्टा होता है कि अन्न-नली खुरच जाती है। इस प्रकार की वमन और जलन के साथ पतले दस्त आते हैं। पतले दस्त के साथ मल-द्वार में आग की भांति जलन होती है। पैंक्रियास की बीमारी में भी आइरिस वर्सिकलर स्मरण रखना चाहिए। इन लक्षणों में iris versicolor 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लेना है।

Natrum Carb 30 – मुंह में बहुत अधिक पानी भरना, सुबह करीब 5 बजे बहुत तेज भूख लगना, रोगी के भोजन में थोड़ी सी लापरवाही होने पर उसकी पाचनक्रिया ख़राब हो जाती है। दूध को देखने से ही जी ख़राब होने लगता है। मुंह का स्वाद कड़वा होना, पाचनशक्ति के खराबी के पुराने रोगी जिन्हे हर समय डकारें आती रहती हैं उनको Natrum Carb 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लेनी है।

Aesculus 30 – अगर acid reflux की समस्या के साथ पेट पत्थर की तरह कड़ा महसूस होता हो तो आपको Aesculus 30 का सेवन करना है। Aesculus 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लें।

Calcarea carb 30 – अगर acid reflux की समस्या है, मुंह में खट्टा पानी आता है और अगर रोगी fair, fat and flabby हो, सिर पर पसीना आता हो, पसीने से भी खट्टी बू आती हो तो ऐसे रोगी को Calcarea carb 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार दें, acid reflux की समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

Ferrum Met 30 – इसका लक्षण है कि भूख या तो अधिक लगती है या बिलकुल नहीं लगती। खट्टे पदार्थ खाते ही दस्त लग जाते हैं। भोजन करने के तुरंत बाद उल्टी हो जाती है। भोजन करने के बाद अधिक डकारें आना और साथ में मिचली होती है। भोजन के बाद पेट फूल जाता है और वहां दबाव महसूस होता है। पेट में गर्मी और जलन होती है। दस्त होने पर उसमे अनपचे पदार्थ निकलते हैं साथ में acid reflux की समस्या होती ही है तो ऐसे लक्षणों में Ferrum Met 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लेना है।

Carbo Veg 30 – इसका लक्षण है कि इसमें पेट बहुत भारी महसूस होता है, कुछ खाने या पीने के बाद डकारें आती हैं, पेट में गैस के कारण सांस लेने में परेशानी होती है। अफारा के कारण सीने में जलन भी होती है, सीने में जलन हो, बार बार डकार आये, डकार आने से थोड़ा आराम मिले तो ऐसे लक्षण पर Carbo Veg 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लेना है।

Phosphorus 30 – Acid reflux की समस्या के कारण अगर गला बैठ जाये, मुँह से आवाज न निकले, बोली में खड़खड़ाहट हो जाया करे तो ऐसे में Phosphorus 30 की 2 बून्द दिन में 3 बार लें।

Argentum Nitricum 30 – अगर व्याकुलता के कारण खट्टी डकारें या एसिडिटी की समस्या हो जाये या होने वाली दुर्घटनाओं के पूर्वाभास के कारण एसिडिटी हो जाये, रोगी को मीठे पदार्थ खाने की इच्छा रहे तो ऐसे लक्षणों वाले रोगी के लिए Argentum Nitricum है, इसके 30 पोटेंसी की 2 बून्द दिन में 3 बार लें, Acid reflux की समस्या ठीक हो जाएगी।

यहाँ मैंने GERD रोग की 10 मुख्य होम्योपैथिक दवा की चर्चा की है, लक्षण मिलने पर दवा का सेवन कर सकते हैं।

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