सिजोफ्रेनिया का होम्योपैथिक इलाज || Homeopathic Medicine For Schizophrenia In Hindi

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सिजोफ्रेनिया का होम्योपैथिक इलाज

एक 16 साल का बच्चा जिसे schizophrenia की समस्या थी, वह कहता है, ‘लोग हमेशा मुझे चिढ़ाते हैं। वो मैं ही हूँ जिसे हमेशा बिना किसी गलती के सज़ा मिलती है।

स्कूल बस में बच्चे मुझे छेड़ते हैं, शिक्षक कहते हैं कि मैं ही सब परेशानी शुरू करता हूं। वे सभी मुझ पर इलज़ाम लगाते हैं। लोग हमेशा मेरे प्रति बुरे होते हैं। वे मेरा मज़ाक उड़ाते हैं।

मैं उन्हें नज़रअंदाज करने की कोशिश करता हूं लेकिन फिर मैं अपना आपा खो देता हूं और उन्हें मारने लगता हूं। बच्चे के घर का पारिवारिक माहौल अच्छा नहीं है, माता पिता के बीच बहुत झगड़े होते हैं।

पिता शराबी है और हमेशा अपने बच्चों को डांटता है, खासकर इस बच्चे को। लड़का बहुत बेचैन, जिद्दी, आलोचना सहन नहीं कर सकने वाला है

वह Actor बनना चाहता है लेकिन स्कूल के दोस्त उसे इस बात को लेकर चिढ़ाते हैं। उसकी माँ ने कहा कि उसकी बहुत सी माँगें हैं जिन्हें वे पूरा नहीं कर सकते। वह कहती है कि वह बहुत आलसी है और हर समय खाना मांगता है।

वह कहती है कि उसका पढ़ाई में ध्यान नहीं है। वह यह भी कहती है कि वह झूठ बोलता है या कई चीजें छिपाता है। वह वही करता है जो उसे पसंद है।

हाल फिलहाल उसके टखने में मोच आ गई है और एड़ियों में तेज दर्द हो रहा है जो चलने पर बढ़ जाता है। प्रिंसिपल ने उससे कहा कि अगर वह नहीं सुधरेगा तो उसे स्कूल से निकाल दिया जाएगा।

लड़के ने कहा, “मैं जानता हूं कि वह केवल धमकी दे रही है; कोई भी मुझे स्कूल से नहीं निकालेगा।” अब बच्चे के रुब्रिक को समझते हैं :-

मन कि वह सताया जा रहा है, मन – कपटी, झूठ बोलकर मांग करता है, मन – बेचैन, जिससे वह एक जगह टिकता नहीं है, मन – असंतुष्ट और जिद्दी, मन – क्रोधी और हिंसक प्रवित्ति का है, मन – शक्की प्रवित्ति

मन – साहसी, मन – आलसी, मन – एकाग्रता में कमी, मन – मनमौजीपन, हाथ-पैर – दर्द – टखने – मोच, चलने से दर्द का बढ़ना, पेट – भूख – अधिक, जनरल – सुस्ती, मन – सिज़ोफ्रेनिया – सताया हुआ महसूस करना

ड्रोसेरा ,जिसे आमतौर पर sundews के नाम से जाना जाता है, मांसाहारी पौधों की सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक है, जिसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, काली खांसी और तपेदिक के इलाज के लिए और कफ निकालने में किया जाता है।

sundews का उपयोग कामोत्तेजना बढ़ाने, दिल को मजबूत करने के साथ-साथ सनबर्न, दांत दर्द का इलाज करने और झाइयों को रोकने के लिए भी किया जाता है।

ड्रोसेरा और बच्चे के बीच के लक्षण को समझते हैं :-

1] ड्रोसेरा पानी वाली जमीन और आर्द्र वातावरण, कम पोषक तत्व वाली मिट्टी में उपजता है अर्थात नाइट्रोजन, फास्फोरस और कैल्शियम की कमी है। यहाँ बच्चे के परिवार का वातावरण ख़राब है, स्नेह भी कम है।

2] नाइट्रोजन की कमी से हिस्टीरिया, मिर्गी, फेफड़ों में जमाव होता है। फास्फोरस की कमी से चिंता, बेचैनी और सिज़ोफ्रेनिया होता है । कैल्शियम की कमी से व्यवहार में जल्दबाजी और बेचैनी होने लगती है। यहाँ बच्चा उतावला और बेचैन है।

3] मांसाहारी पौधे के लक्षण – धोखेबाज, धूर्त, शक्की, भरोसा नहीं कर सकते, चोट पहुंचाने की इच्छा, हिंसक, साहसी। बच्चे में ये सभी लक्षण हैं।

4] ड्रोसेरा कीटभक्षी है, कीड़ों को फँसाता है और उनसे प्रोटीन चूसता है। इस बच्चे ने अपनी मांगें पूरी करने के लिए अपनी मां से झूठ बोलता है।

5] यह एक जंगली पौधा है। चिड़चिड़ापन बच्चे के स्वभाव में है।

6] हवा का एक छोटा झोंका ड्रोसेरा पौधे को हिला देता है। यहाँ हर छोटी-छोटी बात पर बच्चा आपे से बाहर हो जाता है।

7] ड्रोसेरा रोगी को उत्पीड़न का भ्रम है। वह सोचता है कि उसे लोगों द्वारा धोखा दिया जा रहा है। बच्चा अपने माता-पिता और दोस्तों के लिए भी ऐसा ही सोचता है।

प्रिस्क्रिप्शन- ड्रोसेरा 200 15 दिन के लिए रोजाना एक बार दिया गया। ड्रोसेरा से बच्चे के टखने की समस्या के साथ-साथ मानसिक प्रवित्ति भी बदल गई।

Schizophrenia Homeopathic Solution Video 1

सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक रोग है जो व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और कार्य करने के तरीके को प्रभावित करता है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित किसी व्यक्ति को वास्तविक और काल्पनिक के बीच अंतर करने में कठिनाई हो सकती है; और सामाजिक परिस्थितियों में सामान्य भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई हो सकती है।

सिजोफ्रेनिया से पीड़ित अधिकांश लोग हिंसक नहीं होते हैं और दूसरों के लिए खतरा पैदा नहीं करते हैं। सिजोफ्रेनिया बचपन के अनुभवों, खराब पालन-पोषण या इच्छाशक्ति की कमी के कारण नहीं होता है, न ही प्रत्येक व्यक्ति के लिए लक्षण समान होते हैं।

सिजोफ्रेनिया के प्रकार

पैरानॉयड सिजोफ्रेनिया – व्यक्ति अत्यधिक सताया हुआ महसूस करता है, या इन भावनाओं के संयोजन का अनुभव करता है।

अव्यवस्थित सिजोफ्रेनिया – व्यक्ति अक्सर बोलने और विचार में असंगत होता है, लेकिन उसे भ्रम नहीं होता है।

कैटाटोनिक सिजोफ्रेनिया – व्यक्ति नकारात्मक हो जाता है और अक्सर शरीर की बहुत ही असामान्य स्थिति अपना लेता है।

स्किज़ोफेक्टिव डिसऑर्डर – व्यक्ति में सिजोफ्रेनिया और अवसाद जैसे प्रमुख मूड विकार दोनों के लक्षण होते हैं।

सिजोफ्रेनिया का कारण – सिजोफ्रेनिया का कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है। इस बीमारी के कारण के बारे में कुछ सिद्धांतों में शामिल हैं: आनुवंशिकी (आनुवंशिकता), मस्तिष्क के रसायन विज्ञान में असंतुलन; वायरल संक्रमण और कमजोर प्रतिरक्षा विकार

Hyoscyamus 200 – सिज़ोफ्रेनिया के उन मामलों के लिए एक प्रभावी दवा है जहां मुख्य लक्षण उत्पीड़न का भ्रम है और रोगी को लगता है कि अन्य लोग उसके खिलाफ कुछ साजिश रच रहे हैं। दूसरा लक्षण है – संदेह और रोगी की धारणा कि उसे जहर दिया जाएगा, इस प्रकार दी गई किसी भी चीज़ को लेने से इंकार कर देना, यहां तक कि दवा भी; एक अविश्वास है कि उसके दोस्त अब उसके दोस्त नहीं हैं और वह काल्पनिक लोगों के साथ बातचीत करता रहता है। यह उन रोगियों के लिए अच्छी दवा है जिनमें यह रोग पिछले प्रेम संबंधों के कारण उत्पन्न होता है।

Lachesis 200 – उत्पीड़न के भ्रम के इलाज के लिए एक और प्रभावी दवा है और इसका उपयोग तब किया जाता है जब बिना किसी कारण के संदेह और ईर्ष्या के लक्षण मौजूद होते हैं। अन्य लक्षण हैं दुनिया के साथ घुलने-मिलने से घृणा और अत्यधिक बातूनीपन। रोगी कल्पना करता है कि वह अलौकिक शक्तियों के नियंत्रण में है; उसके दोस्त और बच्चे उसे नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं; उसके दोस्त उसे पागलखाने में डालने की योजना बना रहे हैं और अन्य लोग उसके बारे में बात कर रहे हैं।

Platinum Met 200 – यह भ्रम के इलाज के लिए एक उत्कृष्ट दवा है। इस दवा में श्रेष्ठता की भावना रहती है, जहाँ व्यक्ति को लगता है कि उसके आस-पास के सभी लोग उससे कम हैं और उनका कोई मूल्य नहीं है और केवल वह ही श्रेष्ठ और महत्वपूर्ण है। जिन सिज़ोफ्रेनिक रोगियों को इस दवा की आवश्यकता होती है वे स्वभाव से बहुत घमंडी और अभिमानी होते हैं।

Phosphorus 200 – भ्रम को ठीक करने के लिए एक और उत्कृष्ट दवा है। अवसाद और परिवार और दोस्तों के प्रति उदासीन व्यवहार, और अजीब कल्पनाएँ जैसेकि हर कोने से कुछ न कुछ रेंग रहा है। आंधी-तूफ़ान के दौरान लक्षण बढ़ जाते हैं।

Anacardium 200 – इस दवा की आवश्यकता वाले रोगी को आमतौर पर दूर से आवाज़ें सुनने की शिकायत होती है जो उसे गतिविधियाँ करने के लिए आदेश देती हैं। उसे मरे हुए लोगों की आवाजें भी सुनाई देती हैं। यह दवा इन लक्षणों में भी अच्छा काम करती है – अत्यधिक बातूनीपन के साथ-साथ अपशब्दों का प्रयोग; अपने आस-पास की हर चीज पर संदेह करना। उसे ऐसा भी महसूस होता है जैसे कोई उसका पीछा कर रहा है और उसके बारे में बात कर रहा है।

Cannabis Indica 200 – मस्तिष्क में लगातार विचारों का जमावड़ा बने रहना, जो रोगी को बात करते समय भूलने पर मजबूर कर देता है। रोगी अंतिम कहे गए शब्दों को भूल जाता है और उन्हें याद नहीं कर पाता; और उसे पागल होने का डर रहता है। कभी कभी लगातार हँसता रहता है।

Stramonium 200 – लगातार बात करना, धार्मिक उन्माद, अंधेरे का डर और आत्माओं से बात करने की प्रवृत्ति, अत्यधिक हिंसक हो जाना।

Arsenic Album 200 – यह स्थिति भय या शोक के कारण होती है। बड़ी बेचैनी रहती है। थोड़ी सी भी उत्तेजना पर उदासी और रोना आता है। इसके अलावा मृत्यु का भय भी रहता है। साथ ही साफ-सफाई का भी बेहद शौक होता है।

Schizophrenia Homeopathic Solution Video 2

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