Homeopathic Treatment For Bedsores In Hindi [ बेड सोर का होम्योपैथिक इलाज ]

1,222

बिस्तर पर पड़े रहने के कारण शरीर में किसी जगह जख्म हो जाने को ‘शय्या-क्षत‘ या ‘शय्या-व्रण‘ कहते हैं ।

बेड सोर रोग में लक्षणानुसार निम्नलिखित औषधियाँ लाभ करती हैं :-

अर्जेण्टम-नाइट्रिकम 3, 30 – यदि शय्या-क्षत पर रक्त-मिश्रित खुश्क-पपड़ी (खुरण्ड) जम गई हो तो इसका प्रयोग करना चाहिए।

आर्निका 3, 30 – नितम्ब प्रदेश अथवा उससे ऊपर की तिकोनी हड्डी वाले स्थान पर जख्म हो जाने पर इसका प्रयोग हितकर रहता है ।

सल्फर 30, 200 – यदि ऐसे जख्म हो जाय, जिनके टिश्यूज मृत प्राय: हों तो इस औषध का प्रयोग करना चाहिए।

लैकेसिस 30, 200 – यदि शय्या-क्षत के जख्मों के नीले अथवा काले दाग पड़ जाय तो इसका प्रयोग करना चाहिए । ऐसी स्थिति प्राय: ‘टायफाइड’ में होती है ।

हाइपेरिकम ऑयल – टाइफाइड आदि रोग में बिस्तर पर पड़े रहने के कारण यदि शय्या-क्षत हो जाय तो इस तैल तो लगाना लाभकर रहता है । जैतून अथवा सरसों के गरम तैल में ‘हाइपेरिकम‘ औषध के मूल-अर्क को सम भाग मिला लेने से यह तैल तैयार हो जाता है ।

कैलेण्डुला – पूर्वोक्त औषधियों का सेवन कराने के अतिरिक्त ‘कैलेण्डुला‘ मदर-टिंकचर को गरम पानी में डालकर लोशन तैयार कर लें तथा उसके द्वारा जख्म को धोयें अथवा इस औषध के मूल-अर्क में रुई को भिगोकर, उसे जख्म पर रख दें । इन दोनों ही विधियों में लाभ होता है ।

 

Ask A Doctor

किसी भी रोग को ठीक करने के लिए आप हमारे सुयोग्य होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। डॉक्टर का consultancy fee 200 रूपए है। Fee के भुगतान करने के बाद आपसे रोग और उसके लक्षण के बारे में पुछा जायेगा और उसके आधार पर आपको दवा का नाम और दवा लेने की विधि बताई जाएगी। पेमेंट आप Paytm या डेबिट कार्ड से कर सकते हैं। इसके लिए आप इस व्हाट्सएप्प नंबर पे सम्पर्क करें - +919006242658 सम्पूर्ण जानकारी के लिए लिंक पे क्लिक करें।

Loading...

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.