Care Of Bugs – खटमलों से सुरक्षा

455

इससे मुक्ति पाने के लिये कई कीटनाशक दवाओं जैसे- डी. डी.टी., क्लोरोडीन, लिन्डेन, डायाजीनोल आदि का प्रयोग किया जाता है परन्तु इनका दुष्प्रभाव मानव-शरीर पर पड़ता रहता है । होमियोपैथी में इस समस्या का इलाज इस प्रकार है।

एजाडिरेक्टा इण्डिका Q- यह नीम से बनने वाली दवा है । इसे प्रतिदिन दो-तीन बार पानी में मिलाकर पीने से मच्छर, खटमल, जूं, चीलर आदि शरीर का रक्त पीने में असमर्थ हो जाते हैं और भाग खड़े होते हैं । इस दवा को किसी अच्छे तेल में मिलाकर शरीर पर लगाया भी जा सकता है। इस दवा को मिट्टी के तेल (केरोसिन) अथवा तारपीन के तेल में मिलाकर छिड़काव भी किया जा सकता है | इसके छिड़काव से खटमल भाग खड़े होते हैं क्योंकि इसकी गन्ध खटमलों के लिये बहुत ही अरुचिकर होती है।

बाजार में अर्युना अगरबत्ती मिलती है। यह अनेक वानस्पतिक कीटनाशकों जैसे- एजाडिरिक्टिन (जो नीम की निम्बोली से बनती है), गार्लिक, लम्फा, चायपत्ती, बोंबई आदि से मिलकर बनती है । इसे जलाकर घर के अन्दर रख दें और खिड़की-दरवाजे बन्द कर दें । कुछ देर बाद खिड़की-दरवाजे खोल सकते हैं । इस अगरबत्ती की गन्ध से मच्छर, खटमल आदि कीट भाग जाते हैं । इसकी महक कई दिनों तक धर में बनी रहती है जिससे ये कीट घर में प्रवेश नहीं कर पाते ।

Ask A Doctor

किसी भी रोग को ठीक करने के लिए आप हमारे सुयोग्य होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। डॉक्टर का consultancy fee 200 रूपए है। Fee के भुगतान करने के बाद आपसे रोग और उसके लक्षण के बारे में पुछा जायेगा और उसके आधार पर आपको दवा का नाम और दवा लेने की विधि बताई जाएगी। पेमेंट आप Paytm या डेबिट कार्ड से कर सकते हैं। इसके लिए आप इस व्हाट्सएप्प नंबर पे सम्पर्क करें - +919006242658 सम्पूर्ण जानकारी के लिए लिंक पे क्लिक करें।

Loading...

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.