कमर दर्द के लिए होम्योपैथी इलाज [ Homeopathic Medicines for Low Back Pain In Hindi ]

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आज इस पोस्ट में हम लोअर बैक पेन ( lower back pain ) के इलाज की कुछ अच्छी होम्योपैथिक दवा के बारे में जानेंगे जोकि lower back pain में बहुत अच्छा काम करती है।

हमारी रीढ़ की हड्डी चार भागों में बटी हुई है। सबसे ऊपरी भाग को सर्वाइकल, बीच वाले भाग को Thoracic, उसके नीचे वाले भाग को Lumbar और सबसे नीचे वाले को Sacrum कहा जाता है। अगर पूरे रीढ़ की हड्डी में दर्द होता है तो वो backache ( पीठ दर्द ) कहलाता है परन्तु सिर्फ Lumbar क्षेत्र में होने वाले दर्द को कमर दर्द कहा जाता है। कमर दर्द बहुत ही आम रोग है और करीब सभी को कभी न कभी यह होता ही है। किसी-किसी को कमर का दर्द लगातार बना ही रहता है। सबसे पहले हम कमर दर्द होने के कारण की चर्चा करेंगे।

कमर दर्द होने के कारण

  1. हमारी कमर माँसपेशी, हड्डी, स्नायुबंधन, नसें और डिस्क की जटिल संरचना होती है। अगर किसी कारण से हड्डी एक दुसरे से जुड़ जाए या हड्डियों के बीच गैप बन जाये तो कमर दर्द होने लगता है।
  2. कमर के चारों तरफ की नसें दब जाएं या टूट जायें तो कमर दर्द होने लगता है।
  3. अगर कमर के मांसपेशियों में चोट लग जाये या वो फट जाए तो भी कमर दर्द हो जाता है।
  4. तुरंत हो जाने वाला कमर दर्द ( acute lower back pain ) जोकि कोई भारी वजन उठाने से या हल्की चोट लगने से वहां की मांसपेशियाँ फट जाती है या नसें इधर उधर हो जाती है, जिससे कमर दर्द होता है ऐसा दर्द दो से तीन दिनों में ठीक हो जाता है।
  5. कुछ महिलाएं जिन्हें लिकोरिया की समस्या रहती है उन्हें कमर दर्द हुआ करता है।
  6. जिन महिलाओं का वजन बढ़ गया है और जिन्हे घर को संभालने के लिए अधिक समय तक खड़ा रहना पड़ता है उनको कमर दर्द हो जाता है जोकि कभी-कभी लगातार बना रहता है।
  7. महिलाओं में कमर दर्द का एक मुख्य कारण osteoporosis है जिसमे हड्डी पतली हो जाती है और कमर दर्द हुआ करता है।
  8. ऑस्टियोआर्थराइटिस में हड्डी एक दुसरे से चिपक जाती है जिससे कारण कमर दर्द होता है।
  9. स्लिप डिस्क, spinal disc herniation और कमर की हड्डी में चोट लग जाने से भी कमर दर्द हुआ करता है।
  10. महिलाओं में पीरियड के दौरान कमर दर्द हुआ करता है।
  11. HLA-B27 जिनका पॉजिटिव होता है उन्हें भी कमर दर्द की समस्या रहती है।

कमर दर्द की उत्तम होम्योपैथिक मेडिसिन

Arnica Montana 200 – यह कमर दर्द की बहुत अच्छी दवा है। इस दवा को 200 पोटेंसी में ही लेनी है। अगर बहुत तेज कमर दर्द होता हो, हाथ लगाने या बैठने से कमर दर्द बढ़ जाया करता हो तो Arnica Montana बहुत अच्छा काम करती है। महिलाओं में जिन्हे लगातार कमर दर्द बना रहता है उनके लिए भी यह दवा बहुत उत्तम रहता है। सियाटिका में भी यह अच्छा कार्य करती है। इस दवा की 2 बून्द जीभ पर सुबह और रात में टपकना है।

दूसरी दवा एक कॉम्बिनेशन है जिसमे 3 अलग-अलग दवा मिली हुई है। पहली दवा है rhus tox 30, इसमें लोअर बैक पेन बहुत होता है और ऐसा महसूस होता है जैसे दर्द नीचे की ओर जा रहा है। इस दवा में चलने-फिरने में आराम मिलता है। दूसरी दवा है ruta 30, यह कमर दर्द की ही दवा है। अगर सुबह उठते ही कमर में दर्द होता हो तो यह बहुत ही अच्छा कार्य करती है। तीसरी दवा है bellis per 30, यह दवा मांसपेशियों के दर्द की बहुत अच्छी दवा है। आप जब कोई वजन वाली चीज उठा लेते हैं और उसके बाद दर्द उभर आता है तो यह दवा लाभदायक है। इन तीनो दवा को बराबर मात्रा में एक खाली बॉटल में भर लें और इसकी दो बून्द दिन में तीन बार जीभ पे टपकाया करें। इन तीनो दवा को 30 पोटेंसी में ही लेनी है।

SBL Vertefine Drops – यह मेडिसिन लोअर बैक पेन की बहुत ही अच्छी दवा है। इस दवा में berberis vulgaris, bryonia alba, cimicifuga, rhus tox और ledum pal डली हुई है। इस दवा की 15-20 बून्द एक चौथाई कप पानी में डालकर दिन में 3 बार पीना है।

बताये गए सभी दवा को नियमित लेने से कमर दर्द पूरी तरह ठीक हो जाती है। अगर कमर दर्द लम्बे समय से चल रहा हो तो बताये गए सभी दवा को कम से कम 3 महीने तक अवश्य सेवन करें। याद रखें सुबह उठते ही Arnica Montana 200 की दो बून्द जीभ पे टपका लें, फिर 15 मिनट बाद बताया गया कॉम्बिनेशन की दो बून्द जीभ पे टपका लें, फिर उसके 15 मिनट बाद SBL Vertefine Drops की 15-20 बून्द एक चौथाई कप पानी में डालकर पी जाएं। ऐसा दिन में 3 बार सेवन करें और कमर दर्द को पूरी तरह दूर भगाएं।

कमर दर्द का इलाज करते हुए, 4 बातों पर ध्यान रखना आवश्यक है – (1) क्या चलने-फिरने से दर्द घटता है, (2) क्या चलने-फिरने से दर्द बढ़ता है, (3) कमर दर्द कमर के किस हिस्से में है, (4) क्या सर्दी से, नमी से कमर दर्द बढ़ता है। इन सभी दृष्टि पर विचार करना आवश्यक है। इस वीडियो में हम उस होम्योपैथिक दवा पर चर्चा करेंगे जिसमे कमर दर्द चलने-फिरने से घटता है।

(1) Rhus Tox – यह कमर दर्द की यह सबसे बढ़िया दवा है। इसका कमर की मांस-पेशियों पर विशेष प्रभाव है । Rhus Tox का सर्व-प्रधान लक्षण यह है कि पड़े रहने से दर्द बढ़ता है, हरकत से घटता है – ब्रायोनिया से ठीक उल्टा। बैठी हुई हालत से जब पहले-पहल कोई उठता है तब दर्द होता है, परन्तु उठकर कुछ देर जब चल लेता है, जिस्म में गर्मी आ जाती है, तब दर्द नहीं रहता। परन्तु कमर दर्द में चाहे हरकत से दर्द में कमी हो या न हो, इस दर्द में यह काम करता ही है, इसलिये कमर-दर्द की यह सर्वोत्तम औषधि है । कमर की ‘मांस-पेशियों’ (Mulcles) की गहराई तक इस दवा का असर जाता है। Rhus Tox में बैठने या उठने दोनों हालात में रोगी को कमर दर्द महसूस होता है – पहली हरकत में दर्द और लगातार की हरकत से दर्द चले जाना इसका लक्षण है ।

(2) Calcarea Flour 6x – कमर दर्द के पुराने रोगियों को 6x में Rhus Tox के साथ जरूर दें, अच्छा काम करती है। इसकी भी ‘प्रकृति’ (Modality) रस टॉक्स जैसी ही है। रोगी जितना चलता- फिरता है उतना दर्द कम हो जाता है ।

(3) Argentum nitricum – जब कोई व्यक्ति बैठा हुआ हो, तब पहले-पहल बैठी हुई हालत से उठने में बड़ा दर्द होता है – When rising from a sitting posture – और चलने-फिरने से ठीक हो जाता है। रोगी की टांगे काँपती हैं, उनमें कमजोरी महसूस होती है, और टांगों की पिंडलियों में दर्द होता है, ऐसा लगता है मानो कितना लम्बा सफर किया है, कमर दर्द होता ही है । Argentum गर्म और Rhus Tox शीत प्रकृति का दवा है।

(4) Zincum met – इसका दर्द प्रायः रीढ़ के निचले भाग में होता है। अगर बैठी हुई हालत से उठने पर कमर दर्द में अर्जेन्ट नाइट्रिकम उपयोगी है, तो खड़ी हुई हालत से बैठने पर कमर दर्द हो तो जिंकम उपयोगी है। वैसे चलते-फिरते रहने से आराम रहता है। जैसे मैंने बताया कि चलते-फिरते रहने से आराम रस टॉक्स में भी है, परन्तु रस टॉक्स में तो चलने- फिरने से शरीर के सब दर्दों को आराम पहुँचता है, जिंकम में सिर्फ कमर-दर्द में। जिंकम में रोगी की सारी रीढ़ की हड्डी में जलन होती है, और वह पैर चलाया करता है, पिंडलियों में कीड़ियाँ-सी रेंगती है।

(5) Pulsatilla – चलने-फिरने से आराम में Pulsatilla भी उपयोगी है, परन्तु Pulsatilla के कमर-दर्द में चलने-फिरने से आराम प्राय: स्त्रियों में मासिक-सम्बन्धी गड़बड़ी के समय होता है। इसमें भी बैठने में कमर-दर्द होता है- खासकर पीछे की तरफ झुकने में।

(6) Cobaltum – खड़ी हालत से बैठने में कमर दर्द होना जिंकम में है, कोबाल्ट में भी है, और दोनों में चलने-फिरने से कमर दर्द को आराम हो जाता है। जिंकम में वीर्य निकल जाने से रोगी को कमर दर्द में कुछ राहत मिलती है, कोबाल्ट में नहीं। कोबाल्ट भी कमर दर्द के लिये बहुत उपयोगी औषधि है ।

(7) Sulphur – इसमें कमर का दर्द रात को बढ़ जाता है, आराम करते समय दर्द आ जाता है, चलने-फिरने से चला जाता है; झुकने से दर्द बढ़ता है, तेज दर्द होता है; रीढ़ के सबसे नीचे की हड्डी Coccyx में दर्द होता है, रोगी कमर सीधी करके नहीं चल सकता ।

(8) Aesculus – रीढ़ की हड्डी के नीचे के हिस्से में जब चिनका पड़ जाता है, चला नहीं जाता, झुका नहीं जाता, तब इस औषधि को लेने से दर्द एकदम चला जाता है। कई चिकित्सकों का अनुभव है कि इस औषधि से उन्होंने बवासीर के रोगी इतने ठीक नहीं किये जितने कमर दर्द के ।

(9) Berberis Vulgaris Q – पहले कमर में दर्द हो और वह दर्द समूचे शरीर में फैल जाये, कमर से नीचे उतरे और उसके साथ पेशाब का रंग लाल हो और उसमें श्लेष्मा की तली जमे, तो बर्बेरिस एक महौषध है। हाथ की उँगलियों के नख के नीचे की गाँठों में दर्द, तकलीफ और सूजन हो तो उसमें – बर्बेरिस से विशेष फायदा होता है।

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